तिरुपती बालाजी मंदिर के अनोखे रहस्य, मूर्ती को आता है पसीना, वैज्ञानिक भी हैं हैरान
भगवान वेंकटेश्वर ने देवी पद्मावती से विवाह के लिए कुबेर जी से ऋण लिया था। मान्यता है कि भक्तों का दान ही कलयुग के अंत तक इस कर्ज को चुकाने में सहायक होता है।
यहां की मान्यता है कि मूर्ति पर जो बाल लगे हैं, वे एकदम असली हैं ,ये बाल न तो कभी उलझते हैं और न ही कभी रूखे होते हैं।
भक्तों का मानना है कि मूर्ति के सीने वाली जगह पर आज भी एक धड़कन सुनाई देती है। इसी वजह से, गर्भगृह में हमेशा एक दीपक जलता रहता है ।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, भगवान की मूर्ति पर हमेशा एक अजीब सी ठंडक या नमी रहती है। मूर्ति के पीछे के हिस्से पर ओस या पसीना आने की बात कही जाती है।
बाहर से देखने पर, ऐसा लगता है जैसे भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति गर्भगृह के बिल्कुल बीच में स्थापित है, लेकिन वास्तव में, वे दाहिनी ओर की दीवार के करीब स्थित हैं।
कहा जाता है कि मंदिर से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक अज्ञात गांव है। इस गांव का उपयोग केवल मंदिर के लिए फूल, फल, दही और घी जैसी पूजा सामग्री उगाने के लिए किया जाता है।
भक्तों और पुजारियों का मानना है कि यदि आप कान लगाकर मूर्ति के पास सुनते हैं, तो आपको समुद्र की लहरों के टकराने की हल्की-सी आवाज महसूस हो सकती है।
विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर: मान्यता है कि बचपन में एक बार भगवान वेंकटेश्वर को किसी ने छड़ी से मार दिया था, जिससे उनकी ठुड्डी पर चोट आ गई थी। इसलिए आज भी हर शुक्रवार को उनकी ठुड्डी पर चंदन का लेप लगाया जाता है। डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।