एमपी रोजगार मेले में अब नौकरी के नाम पर नहीं चलेगा खेल, जॉइनिंग तक साथ देगी सरकार

Kaushiki | May 11, 2026, 13:01 IST
MP Rojgar Mela
एमपी सरकार अब रोजगार मेले में सिर्फ ऑफर लेटर नहीं बांटेगी। अब सालभर तक युवाओं की मॉनिटरिंग होगी। देखा जाएगा कि उन्हें नौकरी मिली या नहीं और तय सैलरी मिल रही है या नहीं। जॉइनिंग में होने वाली धोखाधड़ी पर अब लगाम लगेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • एमपी सरकार अब रोजगार मेलों की सख्त मॉनिटरिंग करने जा रही है।
  • युवाओं को लेटर देने के बाद विभाग की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी।
  • अब सालभर तक चेक करेंगे कि युवा को नौकरी मिली या नहीं।
  • सैलरी में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए नया सिस्टम बनेगा।
  • कंपनियों को अब मौके पर ही फाइनल इंटरव्यू और लेटर देना होगा।

MP Rojgar Mela: मध्यप्रदेश के युवाओं के लिए एक बहुत अच्छी खबर आई है। अब रोजगार मेले में नौकरी का लेटर मिलना ही काफी नहीं होगा। सरकार अब यह सुनिश्चित करेगी कि आपको रियल में काम मिला या नहीं। अक्सर देखा गया कि ऑफर लेटर के बाद जॉइनिंग नहीं मिलती थी।



कंपनियां युवाओं को लेटर देकर बाद में चक्कर कटवाती रहती थीं। इसी समस्या को देखते हुए रोजगार विभाग ने नए नियम बनाए हैं। अब अफसरों को हर एक युवा का पूरा फीडबैक लेना होगा।



जॉइनिंग और सैलरी की होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग

नए नियमों के मुताबिक अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जाएगी। जैसे सीएम हेल्पलाइन पर फीडबैक लिया जाता है, वैसा ही होगा। विभाग आपसे पूछेगा कि क्या आपने कंपनी जॉइन कर ली है?



क्या आपको वही सैलरी मिल रही है जो मेले में बताई थी? अगर कंपनी ने वादे के मुताबिक पैसे नहीं दिए तो कार्रवाई होगी। इससे कंपनियों की मनमानी और युवाओं के साथ होने वाला धोखा रुकेगा। अब लेटर ऑफ इंटेंट की जगह सीधा ऑफर लेटर देने पर जोर है।



युवाओं को मिले ऑफर लेटर पर सवाल

पिछले एक साल में सरकार ने करीब 626 रोजगार मेले लगाए हैं। दावा है कि एक लाख से ज्यादा युवाओं को लेटर दिए गए। लेकिन इनमें से कितने असल में नौकरी कर रहे हैं, उसका कोई डेटा नहीं है।



इसी गैप को भरने के लिए अब फॉलोअप सिस्टम शुरू हो रहा है। युवा संगम रोजगार मेलों का पूरा रिकॉर्ड अब पोर्टल पर दिखेगा। हर जिले के अफसर को अपने यहां के युवाओं की रिपोर्ट देनी होगी। इससे सरकारी दावों और हकीकत के बीच का अंतर खत्म होगा।



इन सिस्टमों पर लगेगी रोक

बता दें कि, पहले कंपनियां लेटर देकर कहती थीं कि इंटरव्यू बाद में होगा। लेटर ऑफ इंटेंट का मतलब सिर्फ शॉर्टलिस्ट होना माना जाता था। लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसा नहीं चलेगा।



कंपनियों को मेले वाली जगह पर ही इंटरव्यू फाइनल करना होगा। युवाओं को मौके पर ही कंफर्म जॉब ऑफर लेटर देना पड़ेगा। इससे युवाओं का समय बचेगा और उन्हें मानसिक परेशानी नहीं होगी। सरकार अब केवल उन्हीं कंपनियों को बुलाएगी जो तुरंत नौकरी दें।



इन बड़े सेक्टर में युवाओं को मिल रहे नौकरी

मध्य प्रदेश में रोजगार मेला में कई तरह के सेक्टर शामिल हैं। इनमें ऑटोमोबाइल, आईटी, बैंकिंग और हेल्थ केयर जैसे बड़े नाम हैं। साथ ही टूरिज्म, टेक्सटाइल्स और लॉजिस्टिक्स में भी काफी मांग है।



मैनेजमेंट और रिटेल सेक्टर की कंपनियां भी युवाओं को चुन रही हैं। अब इन सभी सेक्टर की कंपनियों पर विभाग की नजर रहेगी। राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि शिकायतों का तुरंत समाधान होगा। युवाओं के करियर के साथ अब कोई भी खिलवाड़ नहीं कर पाएगा।



FAQ

  1. मध्यप्रदेश रोजगार मेले में मॉनिटरिंग का नया सिस्टम क्या है?
    मध्यप्रदेश सरकार ने अब रोजगार मेलों के लिए फॉलोअप और फीडबैक सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत, रोजगार मेले में जिन युवाओं को ऑफर लेटर मिलता है, उनकी पूरे एक साल तक मॉनिटरिंग की जाएगी। विभाग ये चेक करेगा कि युवा ने कंपनी जॉइन की है या नहीं और उसे वादे के मुताबिक सैलरी मिल रही है या नहीं। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और युवाओं से सीधा फीडबैक लिया जाएगा।
  2. लेटर ऑफ इंटेंट और ऑफर लेटर में क्या अंतर है और अब क्या बदलाव हुआ है?
    लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) का मतलब केवल यह होता है कि कंपनी ने आपको शॉर्टलिस्ट किया है और भविष्य में इंटरव्यू के लिए बुला सकती है। वहीं, ऑफर लेटर का मतलब पक्की नौकरी होता है। अब सरकार ने कंपनियों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। कंपनियों को अब मेले के दौरान ही इंटरव्यू लेकर सीधे ऑफर लेटर देना होगा, ताकि युवाओं को जॉइनिंग के समय किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
  3. अगर रोजगार मेले के बाद कंपनी जॉइनिंग नहीं देती या सैलरी कम देती है तो क्या करें?
    नए नियमों के मुताबिक, अब विभाग हर चयनित युवा से फीडबैक लेगा। अगर आपको जॉइनिंग में समस्या आ रही है या कंपनी ने मेले में बताई गई सैलरी से कम पैसे ऑफर किए हैं, तो आप विभाग के नए ऑनलाइन सिस्टम के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं। राज्यमंत्री गौतम टेटवाल के अनुसार, ऐसी शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाएगा और कंपनियों पर कार्रवाई भी हो सकती है।

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