News Strike: इंदौर में 500 करोड़ जमीन विवाद या सिस्टम की चुप्पी? पुलिस पर हमला, रसूखदारों पर सवाल
News Strike:इंदौर को सुर्खियों में रहने की आदत पड़ गई है, लेकिन इन दिनों तारीख सुनहरी नहीं काले अक्षरों में लिखी जा रही है। एक जमीन का टुकड़ा इंदौर में बड़े-बड़े गुल खिला रहा है।
बात पुलिस के गिरेबान तक जा पहुंची है। एक शख्स के नाम पर खाकी घायल हो रही है, लेकिन वर्दी के रखवाले ऊंचे पदों पर बैठे अफसरान ही खामोश हैं।
आखिर क्यों एक जमीन का टुकड़ा एक कंपनी का मालिका इतना बड़ा शख्स बन गया कि पुलिस विभाग भी उसके आगे नतमस्तक हो रहा है। सत्ता से लेकर प्रशासन तक सब खामोश हैं।
इंदौर में सच की पड़ताल
इंदौर या आसपास के रहने वाले हैं तो भी आप शायद इंदौर में घट रही इन घटनाओं के बारे में जान पा रहे हों। क्योंकि इससे जुड़ी बहुत सी खबरें हर मीडिया चैनल या प्लेटफॉर्म कवर नहीं कर पा रहा।
हम जो घटना आपको बताने जा रहे हैं। उसके बारे में डिटेल में जानना है तो आप द सूत्र को फॉलो कीजिए। न्यूज स्ट्राइक को पढ़िए... क्योंकि हम सिर्फ भगवान से डरते हैं। इसलिए हम इस मुद्दे को लगातार पब्लिश कर रहे हैं।
रसूखदारों के दबाव में नहीं आते और आप तक सही जानकारी पहुंचाते हैं। जिम्मेदारों से सवाल भी पूछते हैं। इस बार हमारा सवाल इंदौर के हर पुलिस अधिकारी से हैं जो अपने मातहतों से हुई मारपीट के बाद खुद भी खामोश रहे और उन्हें भी चुप रहने को कह दिया।
उनसे हम जरूर पूछेंगे कि क्या एक जमीन का टुकड़ा एक शख्स इतना कद्दावर हो सकता है कि उसके आगे पुलिस प्रशासन भी खामोश रहने को मजबूर हो जाए।
कानून बनाम रसूख की बहस
अक्सर ये कहा जाता है कि कहीं कुछ भी गड़बड़ हो, सुनवाई हो न हो। आम आदमी को ये यकीन होता है कि कानून आज भी उसके साथ है। वही कानून अगर किसी रसूखदार से खौफजदा हो जाए तो उस आम आदमी के भरोसे का क्या होगा। क्यों कोई व्यक्ति इतना दमदार हो सकता है कि कानून से भी बड़ा हो जाए। ये सवाल हम उठा रहे हैं डायमंड कॉलोनी की घटना पर।
पुलिस पर हमला, सिस्टम पर सवाल
पहले घटना को तफसील से जानिए। इंदौर के कनाडिया थाना क्षेत्र में आने वाली इस कॉलोनी में दो पुलिसकर्मियों के साथ बुरी तरह मारपीट होती है। 8 से 10 लोगों का हुजूम अचानक पुलिसकर्मियों पर टूट पड़ता है।
दोनों पुलिसकर्मियों को इतना मारा जाता है कि एक के सिर आठ टांके आते हैं और दूसरे के सिर में 16 से 18 टांके आते हैं। जो पुलिसवाले सरेआम पिटे उनमें से एक का नाम है विजय सिंह और एक हैं आशीष शर्मा।
घटना के बाद ये खबरें भी आईं कि पुलिस अधिकारियों ने ही उन्हें ताकीद किया कि वो मुंह न खोलें। बात दूर-दूर तक न जाए। घटना का लोगों का न पता चले इसलिए उन दोनों को तुरंत छुट्टी पर भी भेज दिया गया, लेकिन ऐसी घटनाएं छुपती कहां हैं।
हम जैसे मीडिया संस्थानों को इस घटना की जानकारी हुई और जिम्मेदारों से सवाल भी हुए। जिसका नतीजा ये हुआ कि पुलिस कमिश्नर से मामले पर एफआईआर के निर्देश दिए।
संयम इंफ्रा और विवाद का खेल
समस्या ये थी कि जिन पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ वो हमलावरों की पहचान नहीं कर पाए। हालांकि, उनका दावा था कि हमलावर सामने आएं तो वो पहचान सकते हैं।
जिसके बाद कनाड़िया पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जुगाड़े। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ और अज्ञात हमलावरों पर मामला दर्ज हो गया, जबकि इस घटना में एक शख्स का नाम बहुत तेजी से सामने आया है। ये शख्स हैं मोहसिन खान। जो संयम इंफ्रा कंपनी से जुड़े हैं। इस कंपनी के नाम पहले से ही काफी विवाद दर्ज हैं।
मोहसिन खान का एक वीडियो भी कथित तौर से वायरल हुआ। जिसके बाद पुलिसकर्मियों से मारपीट पर उनका हाथ होने का शक पुख्ता हो रहा है, लेकिन एफआईआर में मोहसिन खान का नाम कहीं भी नहीं है। जबकि पूरी लड़ाई डायमंड कॉलोनी और संयम इंफ्रा कंपनी की बताई जा रही है। इन दोनों से पक्षों से जुड़े लोगों के बीच लड़ाई चल रही थी। जिसे रोकने के लिए दोनों पुलिसकर्मी गए और उन पर भी हमला हो गया।
500 करोड़ जमीन विवाद से बढ़ा मामला
इस मामले पर हमारी टीम ने टीआई सहर्ष यादव से भी बात की। उन्होंने इसे दो पक्षों का विवाद बताया और ये भी कहा कि पुलिस पर कोई हमला नहीं हुआ है। इसके बाद एफआईआर दर्ज हुई तो पूरा मामला ही बदल गया। जो जाहिर करता है कि दाल में कुछ काला जरूर है। मामले की गहराई तक गए तो पता चला कि मामला 500 करोड़ की जमीन से जुड़ा है।
ये जमीन डायमंड गृह निर्माण सोसायटी की डायमंड कॉलोनी है। जिसका कुछ हिस्सा संयम इंफ्रा के पास भी है। जमीन की कीमत सुनकर आपको ये तो अंदाजा हो ही गया होगा कि जमीन कितनी कीमती है।
भूरी टेकरी के पास स्थित इस जमीन पर डायमंड गृह निर्माण सोसायटी ने प्लॉट काटकर बेचे। साल 2016 में जमीन का सात एकड़ हिस्सा संयम इंफ्रा ने ले लिया। इसके बाद से जमीन विवादों में हैं। अब तक जमीन का विवाद दो संस्थाओं के बीच में था, लेकिन अब पुलिस के गिरेबान तक पहुंच चुका है और कुछ हद तक सियासी भी हो चुका है।
पुलिस पिटाई पर सियासी घमासान
पुलिस वालों के साथ हुई मारपीट पर सत्ताधारी दल के नेताओं को सांप सूंघ गया है। कोई एक शब्द कहने को तैयार नहीं है, लेकिन कांग्रेस इस मामले पर हमलावर है।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सवाल किया है कि भूमाफिया इतना स्ट्रांग कैसे हो सकता है कि पुलिस वालो को पीट सके। दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि इस जमीन की डील विशाल खंडेलवाल नाम के शख्स ने की है। उन्होंने सवाल भी उठाए हैं कि खंडेलवाल और सरकार के बीच में ऐसे क्या संबंध हैं कि पुलिस वाले भी उनके सामने असहाय हो रहे हैं।
खंडेलवाल विवाद पर सफाई बयान
कांग्रेस नेता का सवाल बिलकुल जायज है। ये जानना जरूरी है कि विशाल खंडेलवाल कौन हैं। खंडेलवाल असल में एसएस ग्लोबल ग्रुप के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। इस कंपनी से लखन यादव का नाम भी जुड़ा है।
खंडेलवाल का पुलिस से मारपीट की घटना पर कहना है कि रास्ते को लेकर कुछ इशू है, लेकिन कोई बड़ा विवाद नहीं है। खंडेलवाल ने अपने खिलाफ छप रही खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।
सिस्टम और रसूख की चुप्पी
इस पूरी घटना से ये तो साफ है कि कुछ रसूखदार लोगों के आगे वर्दी की इज्जत और ताकत दांव पर लग चुकी है। इंदौर वो शहर है जहां बड़े-बड़े नेता हैं और सब के सब सत्ताधारी दल से हैं। कुछ मंत्री हैं और कुछ मंत्री रहे हैं। फिर ऐसा कौन सा शख्स इंदौर में आ गया। जिसके आगे पूरे सिस्टम की बोलती बंद हो गई है।
बात सिर्फ सत्ताधारी दल की नहीं है. कांग्रेस भी घटना पर चुप है। जबकि किसान के मुद्दे से लेकर पेपर लीक जैसे मुद्दे पर कांग्रेसी सड़क पर आ जाते हैं। इस क्षेत्र से आने वाले जीतू पटवारी खुद कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हैं, लेकिन मजाल है कि आपने किसी सोशल मीडिया पर जीतू पटवारी को इस घटना पर आक्रामक होते देखा हो।
रसूखदारों के आगे सिस्टम खामोश
जो सत्ता में बैठे लोगों को चुनौती देते हैं। ऐसे मुद्दे पर वही विपक्ष खामोश है तो सवाल ये भी उठना चाहिए कि रसूखदार के आगे सब एक ही थाली के चट्टेबट्टे बन बैठे हैं। पुलिस का अदना कर्मचारी पिटे। आम जनता महफूज महसूस करे या न करे। इन पर आंच नहीं आनी चाहिए। क्या यही इस घटना की सीख है। अगर नहीं तो सवाल है उन तमाम नेताओं से जिनके हाथ में इंदौर की बागडोर है।
और सवाल है उन तमाम अफसरों से जो इंदौर को सुरक्षित और व्यवस्थित रखते हैं। क्या वो अपने महकमें तक पहुंचे इन हाथों को रोकने की हिम्मत दिखा सकेंगे। या भू माफिया और भी ताकतवर होता जाएगा।
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