News Strike : इंदौर नंबर वन का सच ? पानी, क्राइम और सिस्टम पर बड़े सवाल !
Harish Divekar | Jun 18, 2026, 07:00 IST
न्यूज स्ट्राइक
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की छवि पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। दूषित पानी से मौतों, बढ़ते अपराध, सूखते बोरवेल और प्रशासनिक चुनौतियों ने नंबर वन मॉडल की हकीकत पर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या सफाई की उपलब्धि बाकी समस्याओं को ढक रही है?
स्वच्छता में नंबर वन इंदौर, स्वाद में नंबर वन इंदौर, भाईचारे में नंबर वन कौन, भिया इंदौर...
नंबर वन कहा नहीं कि इंदौरियों का सीना चौड़ा हो जाता है, लेकिन अब नंबर वन का ये नकाब इंदौर के चेहरे से उतरने लगा है। एक के बाद एक ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जो इंदौरियत के जज्बे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहने को इंदौर में बरसों से डबल इंजन, ट्रिपल इंजन जैसे ढेरों इंजनों की सरकार है। उसके बाद भी हाल बेहाल है। आप इंदौर का दूषित पानी कांड तो अब तक नहीं भूले होंगे। आज मैं आपको चंद और ऐसी तस्वीर दिखा रहा हूं, जो इंदौर के नाम पर सजी नंबर वन की चमचमाती हुई पट्टी पर धब्बा लगा रही हैं।
नमस्कार
किसी शहर की तरक्की केवल इस बात से तय हो सकती है कि वो शहर बहुत साफ सुथरा है। इस बात पर एक शेर अर्ज करता हूं।
तमाम उम्र में यही भूल करता रहा.. धूल थी चेहरे पर आईना साफ करता रहा...
इंदौर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। इसे चमचमाते हुए आईने में तब्दील कर दिया गया और पूरी कोशिश की गई कि बस अब चेहरे की हकीकत सामने न आए, लेकिन सच कब तक छुपेगा। इंदौर से एक एक कर ऐसी खबरें आने लगी हैं, जो इंदौर की चमचमाते चेहरे के पीछे का सच जाहिर कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे ये वीडियोज इस बात के गवाह हैं।
क्या इंदौर के बाशिंदों का दर्द ये बयां करने के लिए काफी नहीं है कि इंदौर की हकीकत क्या है। वैसे तो ये हकीकत उसी दिन जाहिर हो गई थी, जब यहां दूषित पानी की वजह से कई लोगों की मौत हो गई थी। वो भी उस इलाके की जहां के सरमाए बरसों से कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज बीजेपी नेता ही रहे हैं। फिर भी देश के सबसे साफ शहर में दूषित पानी बंटा। और, इतना बंटा कि लोगों को मौत की कगार पर पहुंचा दिया। जो बच गया वो अस्पताल में दर्द भरे दिन काटने पर मजबूर हुआ।
आप ही सोचिए इंदौर के ये मामले कितने गंभीर हैं। मैं अक्सर प्रदेश की राजनीति की बात करता हूं। प्रदेश के हालात पर बात करता हूं, लेकिन आज सिर्फ और सिर्फ इंदौर की बात कर रहा हूं। क्यों... इसलिए कि इंदौर ने देशभर में नाम कमाया। एक मिसाल कायम की और अब इंदौर के चेहरे पर चढ़ी नंबर वन के मेकअप की परत उतर रही है। फिक्र तो होगी ही, क्योंकि जब जब इंदौर नंबर वन हुआ हमने भी खुशी जाहिर की। हमारे चैनल पर हमारी वेबसाइट पर इंदौर की खबरें बढ़ चढ़कर लगी। और, अब जब इंदौर की दूसरी खबरें नजर आती हैं तो तकलीफ होना लाजमी है। और, उस पर चर्चा करना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
एक एक कर आपको और कुछ घटनाएं याद दिलाता हूं। दूषित पानी की बात तो ही चुकी है। ये मामला भागीरथपुरा का था, जहां एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस कांड के बाद कैलाश विजयवर्गीय पर भी सवाल उठे। उनका गुस्सा मीडिया के सामने नजर भी आया, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ। कांग्रेस ने जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया। ये घटना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही हलकों की लापरवाही का बड़ा उदाहरण थी। इसने जो दाग लगाया है वो इंदौर के माथे से मिटाना आसान नहीं होगा।
क्राइम के मामले में भी इंदौर बुरे हाल में है। आप इसका एक नमूना वायरल वीडियो में देख ही चुके हैं। क्राइम के किस्से इतने पर ही खत्म नहीं होते, ताजा मामला ही देख लीजिए... अन्नपूर्णा मंदिर मर्डर केस चंद घंटे ही पुराना है। शहर के अन्नपूर्णा इलाके में स्थित मंदिर के ट्रस्टी की चौकीदार ने हत्या कर दी। ट्रस्टी का नाम कैलाश मोदी है, जो करीब 70 साल के थे। मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना है। कैलाश मोदी को चौकीदार ने डंडे से तब तक पीटा जब तक वो मर नहीं गए। कुछ महीनों पहले एमजी रोड पर एक व्यापारी पर जानलेवा हमले की खबर सामने आई थी। कुछ ही दिन पहले पंढरीनाथ थाने का मामला सामने आया। यहां कुछ बदमाशों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर तीस लाख रुपए की लूट को अंजाम दिया।
क्राइम का हाल समझने के लिए इतना काफी है या मैं और भी किस्से गिनाऊं। आप समझ सकते हैं बदमाशों के हौंसले इतने बुलंद हैं कि वो नकली पुलिस बनकर सरेआम लूट को अंजाम दे रहे हैं। सरेआम व्यापारी से लेकर ट्रस्टी तक पर हमला हो रहा है। ये तो बदमाश, चोर लुटेरे डाकू जैसे क्रिमिनल्स की बात हो रही है। कुछ समय पहले पांच पुलिस वालों को सस्पेंड करने की खबर आई थी। उन पर एक बिजनेसमैन गौरव जैन ने अपने घर से 22 तोला सोना चुराने के आरोप लगाए थे। बिजनेसमैन का ये आरोप भी था कि पुलिसवालों ने सीसीटीवी कैमरे से भी छेड़छाड़ की है।
अब आप ही बताइए इंदौर में ये क्या हो रहा है। अपने तरह-तरह के जायके के लिए मशहूर इंदौर इतने तरह के क्राइम के लिए बदनाम भी हो रहा है।
एक बार को ये कहा जा सकता है कि क्राइम तो होते ही रहते हैं। पुलिस मुस्तैदी से उन्हें सॉल्व करती है। पर पानी... पानी का क्या। इंदौर समेत पूरा मालवा अपने पानी के लिए जाना जाता है, लेकिन इस साल इंदौर पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसा है। ग्राउंड रियलिटी ये है कि 6500 से ज्यादा सरकारी बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं। यानी इंदौर को पानी सप्लाई करने वाले पचास फीसदी बोरवेल में पानी नहीं है। अमीर से लेकर गरीब हर बाशिंदे को टैंकर मंगवा कर काम चलाना पड़ा। जब ये बोरवेल सूख रहे थे तब इंदौर के सरकार क्या कर रहे थे। इस मुद्दे को भी कांग्रेस जितना उठा सकती थी, उतना उठाया। उसके बाद सब कुछ भगवान भरोसे है।
इन हालातों पर ध्यान देने की जगह बीजेपी का तीसरा इंजन यानी कि नगर सरकार की कमान संभालने वाले जनप्रतिनिधि क्या कर रहे हैं। वो वंदे मातरम् गाना है या नहीं, इस चर्चा में डूबे हुए हैं। इंदौर का ये मसला भी खूब सुर्खियों में रहा। विपक्ष की एक पार्षद फौजिया शैख ने वंदे मातरम् गाने से इनकार कर दिया। जिसके बाद ये मुद्दा सारे न्यूज चैनल्स में गूंजा। मैं ये नहीं कहता कि इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। चर्चा भी हो और आलोचना भी हो। लेकिन इस के साथ आम आदमी से जुड़े मुद्दों को भी याद रखना चाहिए।
इंदौर की खामियां सुनाने बैठूं तो लंबी बातचीत कर सकता हूं लेकिन यहां का पॉलिटिकल सेनेरियो भी समझना जरूरी है। महू और सांवेर को मिलाकर इंदौर में कुल नौ विधानसभा सीटें आती हैं।
आप चाहें तो फेहरिस्त देखिए या मुझसे सुन लीजिए। आपको एक भी जगह कांग्रेस नजर नहीं आएगी। देपालपुर से विधायक हैं मनोज पटेल, जो बीजेपी से हैं। इंदौर वन में बीजेपी के कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर टू से बीजेपी के रमेश मेंदोला, इंदौर थ्री से बीजेपी के गोलू शुक्ला, इंदौर फोर से मालिनी गौड़, इंदौर फाइव से महेंद्र हार्डिया, महू से उषा ठाकुर, राऊ से मधु वर्मा, सांवेर से तुलसीराम सिलावट, ये सब नाम बीजेपी के हैं। कुछ नाम अब भी मोहन केबिनेट का हिस्सा हैं। और कुछ को शिवराज केबिनेट में रहने का मौका मिल चुका है। कैलाश विजयवर्गीय और सीएम मोहन यादव की अनबन की खबरें भी जोर पकड़ती रही हैं।
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नंबर वन कहा नहीं कि इंदौरियों का सीना चौड़ा हो जाता है, लेकिन अब नंबर वन का ये नकाब इंदौर के चेहरे से उतरने लगा है। एक के बाद एक ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जो इंदौरियत के जज्बे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहने को इंदौर में बरसों से डबल इंजन, ट्रिपल इंजन जैसे ढेरों इंजनों की सरकार है। उसके बाद भी हाल बेहाल है। आप इंदौर का दूषित पानी कांड तो अब तक नहीं भूले होंगे। आज मैं आपको चंद और ऐसी तस्वीर दिखा रहा हूं, जो इंदौर के नाम पर सजी नंबर वन की चमचमाती हुई पट्टी पर धब्बा लगा रही हैं।
नमस्कार
किसी शहर की तरक्की केवल इस बात से तय हो सकती है कि वो शहर बहुत साफ सुथरा है। इस बात पर एक शेर अर्ज करता हूं।
तमाम उम्र में यही भूल करता रहा.. धूल थी चेहरे पर आईना साफ करता रहा...
इंदौर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। इसे चमचमाते हुए आईने में तब्दील कर दिया गया और पूरी कोशिश की गई कि बस अब चेहरे की हकीकत सामने न आए, लेकिन सच कब तक छुपेगा। इंदौर से एक एक कर ऐसी खबरें आने लगी हैं, जो इंदौर की चमचमाते चेहरे के पीछे का सच जाहिर कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे ये वीडियोज इस बात के गवाह हैं।
इंदौरियों का दर्द बयां कर रही हकीकत
उतरने लगी मेकअप की परत
इंदौर के माथे से दाग मिटाना आसान नहीं
क्या अपराध में भी नंबर वन है इंदौर
किस्से अभी और भी हैं
अब आप ही बताइए इंदौर में ये क्या हो रहा है। अपने तरह-तरह के जायके के लिए मशहूर इंदौर इतने तरह के क्राइम के लिए बदनाम भी हो रहा है।
क्राइम तो ठीक मगर पानी का क्या
आखिर क्या कर रही है नगर सरकार
इंदौर की खामियां सुनाने बैठूं तो लंबी बातचीत कर सकता हूं लेकिन यहां का पॉलिटिकल सेनेरियो भी समझना जरूरी है। महू और सांवेर को मिलाकर इंदौर में कुल नौ विधानसभा सीटें आती हैं।
आप चाहें तो फेहरिस्त देखिए या मुझसे सुन लीजिए। आपको एक भी जगह कांग्रेस नजर नहीं आएगी। देपालपुर से विधायक हैं मनोज पटेल, जो बीजेपी से हैं। इंदौर वन में बीजेपी के कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर टू से बीजेपी के रमेश मेंदोला, इंदौर थ्री से बीजेपी के गोलू शुक्ला, इंदौर फोर से मालिनी गौड़, इंदौर फाइव से महेंद्र हार्डिया, महू से उषा ठाकुर, राऊ से मधु वर्मा, सांवेर से तुलसीराम सिलावट, ये सब नाम बीजेपी के हैं। कुछ नाम अब भी मोहन केबिनेट का हिस्सा हैं। और कुछ को शिवराज केबिनेट में रहने का मौका मिल चुका है। कैलाश विजयवर्गीय और सीएम मोहन यादव की अनबन की खबरें भी जोर पकड़ती रही हैं।
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