News Strike: कांग्रेस को क्यों पसंद आ रही कॉकरोच जनता पार्टी? दिग्गज नेताओं ने किए ट्वीट
Harish Divekar | May 23, 2026, 07:00 IST
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सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। दिग्गज कांग्रेस नेता भी इसे पसंद कर रहे हैं। पार्टी ने ट्विटर पर बड़े फॉलोअर्स जुटाए और युवा वर्ग में चर्चा में है। राजनीतिक असर अब सवाल बन गया है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता को भी कॉकरोच पसंद है। कॉकरोच जनता पार्टी... पिछले कुछ दिनों से ये नाम इतना ज्यादा सुर्खियों में है कि घर में घूमते कॉकरोच को देखकर भी इस पार्टी की याद आ रही है। आलसी और बेरोजगारों के लिए बनी ये पार्टी युवाओं के लिए उम्मीद की किरण हो सकती है, लेकिन कांग्रेस को इससे क्या उम्मीदें हैं। सोशल मीडिया पर ये पार्टी कांग्रेस बीजेपी दोनों को पछाड़ चुकी है। जरा भी कुछ अच्छा करने में कामयाब रही तो बनी बात है कि कांग्रेस का ही ऑप्शन बन सकती है। उसके बाद भी कांग्रेस के बड़े नेता... नहीं.. नहीं इतने से काम नहीं चलेगा। ऐसा कहना चाहिए कि कांग्रेस के बड़े बड़े नेता कॉकरोच के फैन होते जा रहे हैं। क्या इसलिए कि कॉकरोच पार्टी ने वो कर दिखाया है, जो कांग्रेस नहीं कर सकी।
नमस्कार,
किचन में अगर एक जरा सा कॉकरोच नजर आता है तो उन दवाओं की बोतलें खुल जाती हैं, जो कॉकरोचों को खत्म कर सकते हैं। लेकिन वही कॉकरोच जब इंटरनेट पर अंग्रेजी लिबास पहनकर क्या नजर आया। उसने सबका ध्यान खींच लिया। लगा जैसे कॉकरोज हैंडसम होने की नई परिभाषा गढ़ रहा हो। बाहुबली डायरेक्टर एसएस राजामौली की फिल्म मक्खी ने इतनी शौहरत नहीं बटोरी थी, जो कॉकरोच ने एक ही दिन में बटोर ली है। वो भी मुफ्त के भाव में। सीजेआई के एक बयान पर बनी पार्टी को पॉपुलेरिटी मिली और क्रिटिसिजम भी।
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लेकिन जिस हिसाब से इसे सब्सक्राइबर मिले, उसे देखकर ये तो यकीन हो गया कि कॉकरोच वाले बयान ने ये पार्टी बनाने वाले अभिजीत दिपके का ही दिल नहीं दुखाया। बल्कि देश के सैकड़ों युवाओं को जैसे किसी नींद से जगा दिया। सीजेआई ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन बहुतों ने शायद खुद को कॉकरोच मान भी लिया और इस सोशल मीडिया पर इसके हैंडल को ज्वाइन भी कर लिया। जिसका नतीजा ये हुआ कि पार्टी ने कुछ ही दिनों में इतने सब्सक्राइबर जमा कर लिए कि कांग्रेस और बीजेपी के हैंडल उसके सामने फीके नजर आने लगे।
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ये सब बातें इस पार्टी के बारे में आप जानते ही हैं। फिर भी एक बार बता देता हूं कि पांच दिन में ही कॉकरोच पार्टी के ट्विटर पर 1.35 करोड़ फॉलोअर्स हो गए। बीजेपी और कांग्रेस दोनों के हैंडल को पछाड़कर कॉकरोच तेज रफ्तार से सोशल मीडिया पर आगे बढ़ रहा है। उसकी रफ्तार रोकने के लिए ट्विटर अकाउंट बैन भी किया गया, लेकिन आपने तो सुना ही होगा कि कॉकरोच को खत्म करना इतना आसान नहीं है। वर्चुअल वर्ल्ड में भी कॉकरोच उतना ही टफ सर्वाइवर साबित हुआ। एक हैंडल पर बैन लगा तो दूसरा हैंडल आ गया कॉकरोच इज बैक के नाम से और फिर उतना ही हिट हो गया।
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ये सारी बातें तो अपनी जगह ठीक हैं। नया जमाना है... कोई नया कॉन्सेप्ट मिलता है तो उसे अपनाने में वाले लोग भी मिल ही जाते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के मामले में ऐसा रिस्पॉन्स थोड़ा ज्यादा और थोड़ा ज्यादा ही जल्दी हो गया। अब जो मैं कहने जा रहा हूं वो शायद बहुत सारों को अच्छा न लगे, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि फिलहाल कॉकरोच जनता पार्टी फिलहाल सिर्फ एक सोशल मीडिया हैंडल है। इसकी वेबसाइट भी बन गई है, लेकिन ये भी सच है कि बेतार की दुनिया में कॉकरोच जितना पॉपुलर है, असल जमीन पर उसका नामोनिशान ढूंढना उतना ही मुश्किल है। ये भी सच है कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभीजित दिपके कहीं से दुबक कर ये कॉन्सेप्ट नहीं चला रहे हैं। वो पूरी तरह पब्लिक के सामने हैं। उन्हें जहां बातचीत के लिए या चर्चा के लिए बुलाया जा रहा है वहां जा भी रहे हैं और बेबाकी से अपनी पार्टी के बारे में और विचारधारा के बारे में बता रहे हैं। पर इससे ये सच्चाई नहीं बदल सकती कि सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग झेलना फिर भी आसान है। लेकिन जमीन पर उतर कर जरूरतमंदों की लड़ाई लड़ना और राजनीति में कदम रखना उतना ही कठिन है। सोशल मीडिया का एक नया हिट फिनोमिना बन सकी कॉकरोच जनता पार्टी क्या जमीन पर उतर पाएगी। चुनाव लड़ पाएगी। अगर चुनाव लड़ी भी तो क्या जीत पाएगी। जो युवा उसे सोशल मीडिया पर जमकर फॉलो कर रहे हैं क्या वो उसके वोटर्स बन पाएंगे। ये सब बाद की बात है।
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लेकिन एक बात और जो गौर करने वाली है वो ये कि आम लोग और युवा तो एक तरफ इस पार्टी को कांग्रेस के दिग्गज नेता बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं। क्या उन्हें इस बात का मलाल है कि जो तूफान कांग्रेस नहीं ला सकी। सोशल मीडिया पर ही सही वो तूफान कॉकरोच के जरिए आ गया। ये नेता हैं दिग्विजय सिंह। सिर्फ दिग्विजय सिंह ही नहीं, शशि थरूर भी कॉकरोच के फैन मालूम होते हैं। शशि थरूर ने कॉकरोच पार्टी की तारीफ की है, लेकिन दिग्विजय सिंह ने तो सलाह ही दे डाली है। आपको याद होगा कि पिछले कुछ ट्वीट्स में दिग्विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी को बहुत सी सलाह दी। सलाह देने की धुन में वो आरएसएस की तारीफ भी कर गुजरे, लेकिन कांग्रेस में अब दिग्विजय सिंह की दाल ज्यादा गलती नजर नहीं आती है। क्या इसलिए वो कॉकरोच को सलाह दे रहे हैं?
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दिग्विजय सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत डिबके को बधाई दी और फिर ये भी लिखा कि उनके घोषणा पत्र में एक महत्वपूर्ण विषय छूट गया है। उन्होंने लिखा कि क्या भारत में लोकतंत्र आवश्यक है। यदि आवश्यक है तो क्या निष्पक्ष चुनाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने अभिजीत को कुछ जरूरी प्वाइंट्स भी बताए हैं, जैसे मशीन रिडेबल वोटर लिस्ट, वोटिंग कैसे होना चाहिए. वीवीपैट स्लिप की पूरी काउंटिंग होना चाहिए। चौंकाने वाली बात ये है कि दिग्विजय सिंह ने ये रिक्वेस्ट भी की है कि दिबके अगर एग्री करते हैं तो ये बातें भी अपने एजेंडा में शामिल करें।
क्या दिग्विजय सिंह को ये पूरा यकीन है कि दिबके के ये प्वाइंट एड करने से कोई बड़ा बदलाव आ जाएगा। उनके लीडर राहुल गांधी से लेकर पूरा विपक्ष निष्पक्ष वोटिंग और ईवीएम जैसे मुद्दों पर मिशन की तरह काम कर चुका है, तब कुछ नहीं हुआ तो क्या अब हो सकेगा।
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इसका जवाब शशि थरूर ने एक इंटरव्यू में दिया है। हालांकि शशि थरूर से ये सवाल नहीं हुआ था, लेकिन संयोग है कि जो बात उन्होंने कही वो दिग्विजय सिंह से जुड़े सवालों का जवाब अपने आप बन जाती है। शशि थरूर ने एक इंटरव्यू में कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी की पॉपुलेरिटी बताती है कि लोग सरकार से कितना फ्रस्ट्रेट हो चुके हैं। ये अपोसिशन को भी ये बताता है कि सामने एक बड़ी ऑपरच्यूनिटी है। क्या कांग्रेस के ये दो बड़े नेता अपनी पार्टी को ये समझाने की कोशिश तो नहीं कर रहे कि सामने एक बड़ा मौका है, उसे समय पर कैश कर लो।
युवाओं की जो आवाज कांग्रेस नहीं बन सकी। वो कॉकरोच के जरिए अभिजीत दिबके बन चुके हैं। क्या कांग्रेस आने वाले दिनों में उन पर डोरे डाल सकती है। हालांकि बहुत से यूजर्स दिबके से भी ये पूछ चुके हैं कि कहीं वो उन्हें धोखा देकर किसी बड़ी पार्टी का हिस्सा तो नहीं बन जाएंगे। दिबके आने वाले समय में क्या करेंगे ये फिलहाल कहा नहीं जा सकता। पर ये बिलकुल कहा जा सकता है कि सारी ताकत झोंककर इंडिया गठबंधन नहीं कर सका वो अदने से कॉकरोच ने कर दिखाया है। दिग्विजय सिंह का समर्थन और शशि थरूर का इंप्रेस होना ये साबित करता है कि कॉकरोच पार्टी बड़ा राजनीतिक दल बन सके या न बन सके एक बड़ा मिशन जरूर बन सकता है।
अब तक अपनी गलतियों के तमाम मौके गंवा चुकी कांग्रेस क्या इस मौके का फायदा उठा सकेगी? या दिग्विजय सिंह जैसे पार्टी के शुभचिंतक का मलाल यूं ही कायम रहेगा।
नमस्कार,
किचन में अगर एक जरा सा कॉकरोच नजर आता है तो उन दवाओं की बोतलें खुल जाती हैं, जो कॉकरोचों को खत्म कर सकते हैं। लेकिन वही कॉकरोच जब इंटरनेट पर अंग्रेजी लिबास पहनकर क्या नजर आया। उसने सबका ध्यान खींच लिया। लगा जैसे कॉकरोज हैंडसम होने की नई परिभाषा गढ़ रहा हो। बाहुबली डायरेक्टर एसएस राजामौली की फिल्म मक्खी ने इतनी शौहरत नहीं बटोरी थी, जो कॉकरोच ने एक ही दिन में बटोर ली है। वो भी मुफ्त के भाव में। सीजेआई के एक बयान पर बनी पार्टी को पॉपुलेरिटी मिली और क्रिटिसिजम भी।
News Strike: मंत्रिमंडल विस्तार से पहले MP BJP में बड़ा ट्विस्ट, सत्ता संगठन में तालमेल के लिए आया पार्टी का ‘मास्टरमाइंड’!
फीके पड़े कांग्रेस और बीजेपी के हैंडल
News Strike: आंगनवाड़ियों में तीन महीने से नहीं बंटा टेक होम राशन, कुपोषण की जंग में पिछड़ेगा प्रदेश?
कॉकरोच को खत्म करना इतना आसान नहीं
🔴News Strike | MP आए बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री Shivprakash | Nikay Chunav
क्या जमीन पर उतर पाएगी कॉकरोच जनता पार्टी
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दिग्विजय ही नहीं, थरूर भी कॉकरोच के फैन
क्या दिग्विजय की रिक्वेस्ट मानेंगे दिबके
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दिग्विजय सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत डिबके को बधाई दी और फिर ये भी लिखा कि उनके घोषणा पत्र में एक महत्वपूर्ण विषय छूट गया है। उन्होंने लिखा कि क्या भारत में लोकतंत्र आवश्यक है। यदि आवश्यक है तो क्या निष्पक्ष चुनाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने अभिजीत को कुछ जरूरी प्वाइंट्स भी बताए हैं, जैसे मशीन रिडेबल वोटर लिस्ट, वोटिंग कैसे होना चाहिए. वीवीपैट स्लिप की पूरी काउंटिंग होना चाहिए। चौंकाने वाली बात ये है कि दिग्विजय सिंह ने ये रिक्वेस्ट भी की है कि दिबके अगर एग्री करते हैं तो ये बातें भी अपने एजेंडा में शामिल करें।
क्या दिग्विजय सिंह को ये पूरा यकीन है कि दिबके के ये प्वाइंट एड करने से कोई बड़ा बदलाव आ जाएगा। उनके लीडर राहुल गांधी से लेकर पूरा विपक्ष निष्पक्ष वोटिंग और ईवीएम जैसे मुद्दों पर मिशन की तरह काम कर चुका है, तब कुछ नहीं हुआ तो क्या अब हो सकेगा।
शशि थरूर के पास है इसका जवाब
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इसका जवाब शशि थरूर ने एक इंटरव्यू में दिया है। हालांकि शशि थरूर से ये सवाल नहीं हुआ था, लेकिन संयोग है कि जो बात उन्होंने कही वो दिग्विजय सिंह से जुड़े सवालों का जवाब अपने आप बन जाती है। शशि थरूर ने एक इंटरव्यू में कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी की पॉपुलेरिटी बताती है कि लोग सरकार से कितना फ्रस्ट्रेट हो चुके हैं। ये अपोसिशन को भी ये बताता है कि सामने एक बड़ी ऑपरच्यूनिटी है। क्या कांग्रेस के ये दो बड़े नेता अपनी पार्टी को ये समझाने की कोशिश तो नहीं कर रहे कि सामने एक बड़ा मौका है, उसे समय पर कैश कर लो।
जो कांग्रेस नहीं कर पाई वो कॉकरोच ने कर दिखाया
अब तक अपनी गलतियों के तमाम मौके गंवा चुकी कांग्रेस क्या इस मौके का फायदा उठा सकेगी? या दिग्विजय सिंह जैसे पार्टी के शुभचिंतक का मलाल यूं ही कायम रहेगा।
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