Ashok Gehlot किस प्रस्ताव की कर रहे हैं बात
यानी कांग्रेस काफी पहले से इसे मुद्दा बना चुकी थी...और योजनाओं घोषणाओं में सभी प्रदेशों में एक मत होने के साथ ही कांग्रेस देश और सभी चुनावी प्रदेशों में मुद्दों को लेकर भी एकमत नजर आ रही है...मप्र और छत्तीसगढ़ में तो उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है लेकिन राजस्थान में 25 नवंबर का महासंग्राम अभी बाकी है....अब ये तो 3 दिसंबर की तारीख ही बताएगी कि राजस्थान में कांग्रेस के भरोसे पर वोट पड़ते हैं या लोगों को मोदी की गारंटी ज्यादा रास आती है।