सिंहासन छत्तीसी: पीएमओ से छत्तीसगढ़ के तीन अफसरों की शिकायत, गोपनीय चिट्ठी ने मचाया हड़कंप
Raipur. छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक गोपनीय चिट्ठी की बहुत चर्चा है। सूत्र बताते हैं कि इस चिट्ठी तीन अफसरों का नाम है। इनके भ्रष्टाचार की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से की गई है। पीएमओ ने इस चिट्ठी को रजिस्टर्ड कर लिया है।
चिट्ठी में इन अफसरों की काली कमाई का कच्चा चिट्ठा लिखा हुआ है। वहीं एक नेताजी ऐसे हैं जिनकी मंत्रियों से ज्यादा चल रही है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
गोपनीय चिट्ठी,गुम सिट्टी पिट्टी
एक गोपनीय चिट्ठी जिसने गुम कर दी सिट्टी पिट्टी। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने पीएम को चिट्ठी लिखकर हड़कंप मचा दिया है। अभी तो यह चिट्ठी सामने भी नहीं आई है और इसकी खबर ने ही प्रशासनिक गलियारों में गर्मी बढ़ा दी है। इस चिट्ठी में तीन अफसरों का जिक्र है। एक आईपीएस, एक आईएफएस और एक राज्य पुलिस सेवा के अफसर का नाम है।
इन अफसरों के भ्रष्टाचार का पूरा कच्चा चिट्ठा इसमें लिखा हुआ है। कली कमाई से खरीदी गई संपत्ति का भी पूरा खुलासा है। सूत्र बताते हैं कि यह शिकायत पीएमओ में रजिस्टर्ड हो गई है। जल्द ही इस बारे में राज्य सरकार को पीएमओ से नोटिस जारी हो सकता है। फिलहाल तो लोग इन तीन नामों के बारे में जानने की कवायद में लगे हुए हैं। द सूत्र जल्द ही इन नामों का खुलासा करेगा।
सबसे ताकतवर चेयरमैन
क्या निगम मंडल के चेयरमैन की ताकत मंत्री से ज्यादा होती है। आमतौर पर लोग यही कहेंगे कि नहीं। लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं है। छत्तीसगढ़ में एक निगम के चेयरमैन ऐसे हैं जो मंत्री से ज्यादा ताकत रखते हैं। इनके पास एक ऐसा अधिकार है जो सिर्फ मंत्री के पास होता है। वो है तबादलों का अधिकार। आमतौर पर यह अधिकार निगम के चेयरमैन के पास नहीं होता।
लेकिन पिछली सरकार में इस निगम में जो अध्यक्ष बने थे उन्होंने नियम ही कुछ ऐसा कर दिया कि चेयरमैन को ट्रांसफर का अधिकार मिल गया। सरकार चली गई और नई सरकार आ गई। नई सरकार में इस निगम के जो चेयरमैन बने हैं उनको भी वही अधिकार मिल गया। अब चेयरमैन साहब के पास तबादलों की खूब फाइलें आ रही हैं। आखिर इनके कद के साथ इनका पद भी तो बड़ा है।
सीएम इन वेटिंग
छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटें खाली हुईं। इन सीटों पर दोनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। बीजेपी ने नए चेहरे के तौर पर लक्ष्मी वर्मा को भेजा तो कांग्रेस ने फिर से फूलोदेवी नेताम को राज्यसभा का टिकट कटा दिया। अब कहानी यहीं से शुरु होती है। फूलोदेवी नेताम का राज्यसभा का पिछला कार्यकाल ऐसा नहीं था कि उनको ही दोबारा मौका मिले। जबकि इस रेस में चरणदास महंत,टीएस सिंहदेव और दीपक बैज जैसे नेता शामिल थे। फूलोदेवी के चयन ने बड़े नेताओं का चैन छीन लिया।
कांग्रेस के अंदर अब ये सवाल उठने लगा है कि कहीं ये सीएम इन वेटिंग तो नहीं। क्योंकि इनके नाम पर सोनिया गांधी ने ही मुहर लगाई थी। अब इनकी गांधी परिवार से निकटता छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बेचैनी पैदा करने लगी है। ये आदिवासी हैं और महिला हैं। इस नाते कहीं ये बीजेपी के आदिवासी सीएम की काट के तौर पर तो अगले चुनाव में तो नहीं उतारी जाएंगी। यही बात कांग्रेस के बड़े नेताओं का चैन उड़ा रही है।
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