सिंहासन छत्तीसी : मेडम पर मेहरबान हैं साहब, लड़कियों की सेहत सप्लाई कर रही है टेबल कुर्सी बनाने वाली कंपनी

छत्तीसगढ़ में राजनीतिक हलचल और प्रशासनिक फैसले कभी शांत नहीं होते। आज के सिंहासन छत्तीसी में पढ़िए इस हफ्ते चर्चा रही एक पुलिस अफसर पर साहब की मेहरबानी और एक टेबल-कुर्सी बनाने वाली कंपनी से स्वास्थ्य सप्लाई का ठेका के बारे में विस्तार से...

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Arun Tiwari
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Raipur.छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे कभी शांत नहीं होते। इनमें हलचल का तूफान आता ही रहता है। एक पुलिस वाली मेडम हैं जिन पर एक साहब की बड़ी मेहरबानी है। साहब का वरदहस्त होने से मेडम का बाल भी बांका नहीं हो रहा। जबकि एक पुलिस अफसर छोटी गलती पर ही नप गए।

दूसरी ओर पढ़ने वाली लड़कियों की सेहत की सरकार को बहुत चिंता है। इसी चिंता से ग्रसित सरकार ने टेबल कुर्सी बनाने वाली कंपनी को उनकी सेहत से जुड़ी जरूरत की सप्लाई का ठेका दे दिया। अब स्वास्थ्य संबंधी चीजों की सप्लाई फर्नीचर बनाने वाली कंपनी करेगी तो क्या होगा।

इतना ही नहीं अब मदिरा प्रेमियों को कांच की बॉटल की जगह प्लास्टिक की बॉटल में शराब मिलेगी। ये फैसला आखिर किसके इशारे पर हुआ। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।

साहब बने कोतवाल तो डर काहे का

छत्तीसगढ़ में पुलिस महकमे की एक अफसर मेडम की खूब चर्चा है। चर्चा इसलिए नहीं है कि उन्होंने क्या किया और क्या नहीं किया। बल्कि इसलिए है कि आखिर उनका बाल भी बांका क्यों नहीं हो रहा। इसकी पड़ताल से पता चला कि उन पर एक ऐसे साहब का हाथ है जो सरकार में बहुत पॉवरफुल हैं। बल्कि सत्ता के नाभि केंद्र में बैठे हैं।

यह साहब भी मेडम को बचा रहे हैं। मेडम से जुड़ी जांच रिपोर्ट गृह विभाग में पहुंच चुकी है। इस रिपोर्ट में यह संकेत मिले हैं कि उनकी तरफ से गोपनीय सूचनाएं लीक की गई हैं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई न होना हैरान करता है। जबकि पुलिस विभाग के एक अफसर के रिश्वत का वीडियो वायरल होते ही उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। अब इससे साफ हो जाता है कि साहब ही कोतवाल हैं तो फिर मेडम को किस बात का डर है।

सेहत बेच रही फर्नीचर कंपनी

छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत चल रही सुचिता योजना में कुछ ज्यादा ही सुचिता अपनाई जा रही है। वो भी तब जबकि मामला लड़कियों की सेहत से जुड़ा हो। सुचिता ऐसी कि सैनेटरी पैड की सप्लाई किसी सैनेटरी उत्पाद निर्माता या मेडिकल सप्लायर को नहीं, बल्कि फर्नीचर बनाने वाले एक फर्नीचर फर्म को दिया गया है।

विभाग की ओर से जारी आदेश में 350 चिन्हांकित स्कूलों और कॉलेजों के लिए सैनेटरी नैपकिन की आपूर्ति का निर्देश दिया गया। जिस फर्म को यह जिम्मेदारी दी गई है, उसका काम फर्नीचर निर्माण से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठता है कि कंपनी को सैनेटरी या हाइजीन प्रोडक्ट से जुड़ा पूर्व अनुभव है या नहीं।

आदेश के मुताबिक सैनेटरी पैड की दर 3.25 रुपए प्रति यूनिट तय की गई है। इस हिसाब से कुल 35 लाख पैड पर सरकार को करीब 1 करोड़ 13 लाख 75 हजार रुपए का खर्च आया। इतनी बड़ी राशि की खरीदी बिना टेंडर के कर दी गई। यही है सरकार की सुचिता योजना।

किसने बनाई शराब नीति

छत्तीसगढ़ में नए साल में शराब अब नई बोतल में मिलेगी। बोतल होगी प्लास्टिक की। यानी प्लास्टिक की बोतल में शराब। इसके पीछे तर्क दिया गया कि कांच की बोतल फूट जाती है जिससे नुकसान होता है और यह रास्ता नुकसान से बचाने के लिए अपनाया जाएगा।

बोतल का नुकसान तो देख लिया लेकिन स्वास्थ्य का जो नुकसान होगा उसका क्या। सूत्र बताते हैं कि यह बदलाव सरकार ने कुछ खास कंपनियों के दबाव में किया है। बताया तो यह भी जा रहा है कि यह नीति मंत्रालय के चैंबर में नहीं बल्कि किसी के घर के कमरे में बैठकर बनाई गई है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि किसको फायदा पहुंचाने के लिए यह बदलाव किया गया है। खैर सवाल तो उठते रहते हैं, विभाग को अपना फायदा भी तो देखना है।

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