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Raipur.छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे एक बार फिर गर्म हैं। गर्माहट इसलिए है क्योंकि एक माननीय ईडी की जद में आ गए हैं। वैसे ईडी का छत्तीसगढ़ से रिश्ता कुछ ज्यादा ही गहरा हो चला है। ये माननीय कांग्रेस के नहीं बल्कि बीजेपी के हैं।
ईडी की आंखों में इनके मंत्री रहते अर्जित की गई अकूत संपत्ति खटक रही है। अचल तो छोड़िए चल संपत्ति भी बहुत है। वहीं पुलिस की नई व्यवस्था रायपुर में लागू होने जा रही है। इस व्यवस्था में थोड़ा झोल नजर आ रहा है।
रायपुर तो इसके दायरे में हैं लेकिन नवा रायपुर कमिश्नर साहब की सीमा रेखा से बाहर रहेगा। तो फिर पुलिस कमिश्नर तो सिटी एसपी जैसे हो जाएंगे। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
पूर्व मंत्री पर ईडी ने तरेरी आंखें
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बीजेपी के पूर्व मंत्री और रसूखदार विधायक पर ईडी की तिरछी नजर हो गई है। इससे तो यह लगता है कि ईडी सिर्फ विपक्ष के नेताओं पर ही नहीं सत्ता पक्ष के नेताओं पर भी आंखें तरेरती है। यह अलग बात है कि तेजी में कुछ मंदी और रुख में कुछ नरमी जरूर आ जाती होगी।
ऐसे ही एक बीजेपी के माननीय हैं। इनकी विधानसभा के अंदर से लेकर बाहर तक तूती बोलती है। सूत्र कहते हैं कि ईडी की नजर में कुछ ऐसी चीजें आ गई हैं जो उसकी आंखों में खटक रही हैं। मंत्री रहते जमीनों में निवेश, अपने करीबियों के नाम पर संपत्ति ने इनको जांच के दायरे में ला लिया है।
इतना ही नहीं करोड़ों के फिक्स डिपॉजिट भी जांच की जद में आ रहे हैं। सूत्र कहते हैं कि जांच तो पहले से चलना चाह रही है लेकिन अब तेजी आने वाली है।
ऐसी कैसी कमिश्नरी
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छत्तीसगढ़ में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने जा रहा है। तारीख भी तय हो गई है 23 जनवरी। लेकिन इसके फॉर्मेट में एक गड़बड़झाला दिखाई देता है। रायपुर शहर में पुलिस कमिश्नरी होगी तो नवा रायपुर इससे बाहर होगा। कमिश्नर का इलाका सिटी एसपी के बराबर ही नजर आता है।
पंडरी के आगे का पुराना विधानसभा थाना, माना, नवा रायपुर, अभनपुर जैसे बाहरी इलाके इससे अलग होंगे। पुलिस कमिश्नर का कार्यक्षेत्र सिटी एसपी से भी कम हो गया। जबकि, शहरों के आउटर में ही सबसे अधिक क्राइम होते हैं और आउटर ही क्रिमिनल के ठौर-ठिकानों के लिए सबसे मुफीद होते हैं। और यही इलाके पुलिस कमिश्नर के दायरे में नहीं होंगे। एक और बिंडबना देखिए।
माना एयरपोर्ट पर कोई वीवीआईपी आएगा तो ग्रामीण एसपी उसे रिसीव करेंगे और वीआईपी रोड पर आने के बाद फिर पुलिस कमिश्नर। रायपुर से मंत्रालय और विधानसभा जाने वाले मंत्रियों के लिए अब डबल पायलेटिंग की व्यवस्था करनी होगी।
माना थाना से पहले तक रायपुर पुलिस कमिश्नर अपनी गाड़ी लगाएंगे और माना के आगे रायपुर ग्रामीण एसपी की व्यवस्था रहेगी। खैर बड़ा काम तो शुरु हो रहा है, शुरु होने के बाद सुधार की गुंजाइश तो रहती ही है।
बड़े बेआबरु होकर तेरे कूचे से हम निकले
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ओएसडी यानी एक तरह से दूसरा मंत्री। मंत्रीजी का सबसे खास यदि कोई होता है तो है ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी यानी ओएसडी। ओएसडी सभी तरह की भूमिकाओं में होते हैं। डिप्टी सीएम के एक ओएसडी की इन दिनों खूब चर्चा है। चर्चा इसलिए क्योंकि उनकी हालत वही हुई कि बड़े बेआबरु होकर तेरे कूचे से हम निकले।
पुराना साल जा रहा था और ओएसडी साहब की रवानगी भी हो गई यानी 31 दिसंबर को रात में उनको हटा दिया गया। इनकी छुट्टी के लिए जीएडी अधिकारी को स्पेशली फोन किया गया कि आज ही ऑर्डर निकलना है। सवाल तो यही है आखिर ऐसा क्या हो गया था जो उनको इस तरह हटाया गया।
बात तो कुछ है और बहुत गहरी है। दरअसल ओएसडी का काम आजकल व्यवस्थापक का हो गया है। ओएसडी के बारे में कहा जाता है कि मंत्री के बंगले में बैठ सारे काले-पीले कामों को ओएसडी अंजाम देते हैं। मंत्रियों की जिस रास्ते की जानकारी नहीं होती, वो ओएसडी लोग सुझाते हैं।
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