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Photograph: (the sootr)
singhasan-chhatisi/RAIPUR.छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों का पारा इन दिनों चढ़ा हुआ है। एक सीनियर आईपीएस अफसर ने बाउंसरों को पकड़ने का ऑर्डर दिया। आनन फानन में पुलिस ने बाउंसरों को धर लिया लेकिन एक भी बाउंसल जेल नहीं गया। ऐसा चमत्कार हुआ तो सीनियर साहब को पुलिस से बोलना पड़ा सॉरी अब ऐसा नहीं करेंगे। आखिर ऐसा क्या हुआ जो साहब को सॉरी बोलना पड़ा। वहीं राजनीति में भी एक बड़ा घटनाक्रम हुआ। जिसको घेरकर बीजेपी ने चुनावी नैया पार की उसी ने बीजेपी को मात दे दी। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
बड़े साहब ने छोटे से बोला सॉरी
पुलिस के सीनियर आईपीएस को सॉरी बोलना पड़ जाए तो फिर छत्तीसगढ़ की पुलिसिया प्रणाली को क्या कहा जाए। दरअसल बात ये है कि राजधानी रायपुर के बीयर-बारों के बाउंसरों के उत्पातों को रोकने बड़े साहब ने शहर के साहब को कार्रवाई करने कहा। चूंकि ऑर्डर बड़े साहब का था इसलिए फोर्स भेजकर दर्जन भर से अधिक शिकायती बारों के बाउंसरों को लाकर थाने में बिठा लिया गया।
लेकिन अब चमत्कार देखिए। इसमें से आधे बाउंसरों को पुलिस महकमे के सीनियर अफसरों ने फोन कर छुड़वा लिया। वो इसलिए क्योंकि वीआईपी रोड के कई बीयर-बारों में उनका पैसा लगा है। कुछ के लिए नेताओं ने फोन किया और कुछ को कोर्ट में पेश होते ही जमानत मिल गई।
यानी पकड़ कर लाने के बाद भी एक भी बाउंसर को पुलिस जेल नहीं भेज पाई। जाहिर है, इससे पुलिस की किरकिरी हो गई। इससे छोटे साहब बहुत मायूस हुए और बड़े साहब को यह पूरा एपीसोड बताया। बड़े साहब बोले सॉरी अब आगे से इस तरह के मामलों में कार्रवाई करने नहीं कहूंगा।
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भूपेश की चाल,बीजेपी की मात
राजनैतिक गलियारों में चर्चा सरगर्म है, कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर एजेंसियों का शिकंजा भी नहीं कस पाया और चैतन्य को जमानत मिल गई। शराब घोटाले ने एक बार फिर राजनैतिक रंग ले लिया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच और बघेल की भूमिका को लेकर बीजेपी की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी समेत बीजेपी के तमाम नेताओं ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाकर पूर्व मुख्यमंत्री बघेल पर शिकंजा कसे जाने का दावा किया था। लेकिन मौजूदा दौर में बीजेपी का यह दावा खोखला साबित नज़र आ रहा है।
भूपेश बघेल बीजेपी नेताओं पर जमकर आरोप लगा रहे हैं जबकि इन घोटालों के आरोप में पूर्व मंत्री समेत उनके करीबी अफसर जेल की हवा खा रहे हैं। इसे कहते हैं पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की चाल ने बीजेपी को मात दे दीऔर जांच एजेंसियां हाथ मलते रह गई। कहा तो ये भी जा रहा है कि कोर्ट ने इस मामले में डीजीपी तक पर कड़ी टिप्पणी कर दी।
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सूचना आयुक्त पर उलझन
विधानसभा का शीतकालीन सत्र निकल गया और अब नया साल भी लग गया है। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के दावेदार टकटकी लगाए बैठे है कि कब जीएडी से कोई आदेश निकलेगा। कई बार सरकार देर रात भी आर्डर जारी कर रही, इसलिए रात आंखों में कट रही है। सरकार भी बड़ी निर्मोही है साहब। कम-से-कम अपने एक्स चीफ सेकेट्री का ही ध्यान रख लेती। वो भी नहीं हुआ।
पता चला है, सिफारिशों की बोझ से सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की फाइल दब गई है। सिस्टम करें तो क्या करें। इतने भाई साहबों के फोन आ चुके हैं कि सिस्टम कुछ समझ नहीं पा रहा। आखिर किसको नाराज करें। सवाल चार लाख महीने सेलरी का है। सवा दो लाख वेतन और उपर से 54 परसेंट डीए। सब मिलाकर एकाउंट में करीब-करीब चार लाख। आवेदकों में कुछ योग्य और काबिल लोग भी हैं। मगर बाकी के चक्कर में उनका मामला भी उलझ गया है।
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कहना पड़ेगा जय रामजी
मनरेगा का नाम बदलकर जी जय रामजी हो गया है। मगर जब तक यह प्रचलन में नहीं आएगा तब तक इस योजना में कार्यरत लोगों को काफी कठिनाई आएगी। अब पदनाम को ही देखिए। छत्तीसगढ़ में इस योजना के कमिश्नर अपना परिचय क्या देंगे। कमिश्नर जी जय रामजी। कुछ दिन तो लोग समझ नहीं पाएंगे। पूछ रहा हूं पदनाम और बोल रहे जी जयराम जी। जय राम जी का दूसरा अर्थ भी निकाला जाता है। यानी नमस्ते करना। जी रामजी के एम्प्लाई ग्रुप में भी इस पर खूब चुटकी ली जा रही।
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