सिंहासन छत्तीसी : आखिर वह कौन सी चिट्ठी आई है, जिसने एक मंत्री को मुश्किल में डाल दिया है और क्यों पुलिस कमिश्नरी की चमक फीकी पड़ गई?
Arun Tiwari | Jan 18, 2026, 12:41 IST
singhasan chhattisi minister letter police commissionary chhattisgarh politics
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक पत्र ने मंत्री को मुश्किल में डाल दिया है। वहीं, पुलिस कमिश्नरी का असर अब कमजोर होता नजर आ रहा है। आज के सिंहासन छत्तीसी में जानिए यहां की सियासत और प्रशासनिक बदलाव के बारे में विस्तार से...
Raipur. छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे एक बार फिर गर्म हैं। राजनीतिक गलियारों में एक ऐसी चिट्ठी चल रही है, जिसने एक मंत्री को मुश्किल में डाल दिया है। हालांकि यह चिट्ठी पिछली सरकार की है, जिसे इस सरकार ने लापता कर दिया है, लेकिन यह चिट्ठी जिस मंत्री से जुड़ी है, वह इस सरकार में मंत्री बने हैं।
वहीं छत्तीसगढ़ में लागू होने जा रही पुलिस कमिश्नरी की टीआरपी कम हो गई है। एक ऐसी वजह है, जिसने इस सिस्टम की चमक फीकी कर दी है। वहीं बिलासपुर में चार नेताओं के बीच प्रोटोकॉल को लेकर भौकाल चल रहा है।
खासतौर पर अहम का सवाल दो नेताओं के बीच है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
![79e342ee-741]()
इन दिनों साय सरकार के एक मंत्री बहुत चर्चा में हैं या यूं कहें विवादों में हैं। मसला है चिट्ठी आई है, चिट्ठी आई है। जी हां, यही वह चिट्ठी है, जिसने मंत्रीजी को मुश्किल में डाल दिया है। यह चिट्ठी छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और प्रशासनिक फिजाओं में तैर रही है।
जमाना सोशल मीडिया का है, इसलिए यह चिट्ठी वहां तक भी पहुंच गई है। इस चिट्ठी में एक मंत्रीजी के भ्रष्टाचार की जांच करने को कहा गया है। जब यह सरकारी पत्र लिखा गया था, तब भले ही यह मंत्री न हों, लेकिन अब तो हैं और इसीलिए यह पत्र चर्चा में है।
यह चिट्ठी साल 2019 में लोक शिक्षण संचालनालय के संयुक्त संचालक ने एक संस्था के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी को लिखी थी। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि भ्रष्टाचार की शिकायत पर जांच के लिए यह पत्र लिखा गया है।
खैर, एक शेर है, मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है, क्या मेरे हक में फैसला देगा? इनकी जांच के लिए यह चिट्ठी लिखी गई है, वह अब मंत्री हैं, इसलिए चिट्ठी भले ही इधर-उधर घूम रही हो, लेकिन नेताजी को मुश्किल में डाल रही है।
![91f6e39f-921]()
छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिसिंग में बड़ा रिफार्म करते हुए पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का फैसला लिया, लेकिन कमिश्नरेट के क्षेत्र में कैंची चल जाने की वजह से इस पद की टीआरपी कम हो गई है। पुलिस कमिश्नर के दावेदारों में चार्म सिर्फ पहले पुलिस कमिश्नर बनने तक रह गया है।
बाकी तो सिटी एसपी जैसा ही मामला रहेगा। पुलिस कमिश्नर के बाद दूसरे नंबर का पद ज्वाइंट कमिश्नर का होगा। इस पर डीआईजी लेवल के अधिकारी की पोस्टिंग की जाएगी। वहीं, सवाल यह है कि डीआईजी रैंक के जो एसपी बड़े जिले संभाल रहे हैं, वे रायपुर कमिश्नरेट में एडिशनल एसपी टाईप काम क्यों करना चाहेंगे। यदि ऐसा हुआ, तो यह उनका डिमोशन ही तो होगा। कुल मिलाकर कमिश्नरेट को लेकर पुलिस महकमे में कोई उत्सुकता नहीं है।
![a88130f2-d4b]()
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के लिए एक मुश्किल पैदा कर दी है। पीएम मोदी ने एक को पद में बड़ा कर दिया है, जबकि एक कद में हमेशा बड़ा रहा है। दोनों एक ही क्षेत्र से आते हैं, इसलिए समस्या ज्यादा हो गई है। दोनों नेताओं का भौकाल ऐसा है कि प्रोटोकॉल की मुश्किल हो गई है।
केंद्रीय राज्य मंत्री का नाम न होने की वजह से बिलासपुर में आयोजित नगरीय निकाय का कार्यक्रम निरस्त हो गया। वह भी ऐसे वक्त पर जब पब्लिक आनी शुरू हो गई थी। मुद्दा था कि बिलासपुर के सांसद होने के नाते भी नेताजी का नाम अतिथियों में शामिल नहीं था। विधायक भी कार्यक्रम से नदारद थे।
कुछ दिन पहले बिलासपुर में आयोजित युवा महोत्सव में भी माननीय का नाम प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं लिखा गया, इसको लेकर भी उनके खेमे में बेचैनी थी। दरअसल बात यह है कि डिप्टी सीएम और केंद्रीय मंत्री एक ही विधानसभा क्षेत्र से हैं। दोनों साहू हैं। एक ही स्कूल के सहपाठी भी।
एक की अध्यक्षता में चुनाव होने के बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया, ऊपर से दूसरे को केंद्रीय मंत्री बनाकर प्रोटोकॉल में ऊपर कर दिया। उधर, बिलासपुर के अफसर भी मजे लेने में कम नहीं। नेहरू चौक पर घर अलॉट कर दिया अगल-बगल। यानी सुबह उठने के साथ फुल तनाव।
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोटोकॉल में राज्य के मंत्री से ऊपर होते हैं। ऐसे में, यदि केंद्रीय मंत्री किसी कार्यक्रम में पहुंचेंगे तो उनका नाम सबसे ऊपर लिखा जाएगा। राज्य के मंत्री को यह मंजूर नहीं होगा। इस चक्कर में बिलासपुर के अधिकारी पिस रहे हैं। अमर, धरम, अरुण और तोखन को अगर टेंशन होगा तो गुस्सा अफसरों पर ही निकलेगा।
सिंहासन छत्तीसी : ईडी की जद में आने वाले हैं कौन से माननीय, पुलिस की नई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, ऐसी कैसी कमिश्नरी
सिंहासन छत्तीसी : सीनियर आईपीएस ने क्यों बोला सॉरी, बाउंसरों को पकड़ना पड़ गया भारी, भूपेश ने कैसे दी बीजेपी को मात
सिंहासन छत्तीसी : नेताजी की नाराजगी से हटे कलेक्टर, सजा मिली या तोहफा, नबीन के हाथों में नेताओं की नब्ज
सिंहासन छत्तीसी : छत्तीसगढ़ में विधायकों की नहीं सुन रहे मंत्री, नए साल के सैर सपाटा को क्यों भूले अफसर
वहीं छत्तीसगढ़ में लागू होने जा रही पुलिस कमिश्नरी की टीआरपी कम हो गई है। एक ऐसी वजह है, जिसने इस सिस्टम की चमक फीकी कर दी है। वहीं बिलासपुर में चार नेताओं के बीच प्रोटोकॉल को लेकर भौकाल चल रहा है।
खासतौर पर अहम का सवाल दो नेताओं के बीच है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
मुसीबत में मंत्री
79e342ee-741
इन दिनों साय सरकार के एक मंत्री बहुत चर्चा में हैं या यूं कहें विवादों में हैं। मसला है चिट्ठी आई है, चिट्ठी आई है। जी हां, यही वह चिट्ठी है, जिसने मंत्रीजी को मुश्किल में डाल दिया है। यह चिट्ठी छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और प्रशासनिक फिजाओं में तैर रही है।
जमाना सोशल मीडिया का है, इसलिए यह चिट्ठी वहां तक भी पहुंच गई है। इस चिट्ठी में एक मंत्रीजी के भ्रष्टाचार की जांच करने को कहा गया है। जब यह सरकारी पत्र लिखा गया था, तब भले ही यह मंत्री न हों, लेकिन अब तो हैं और इसीलिए यह पत्र चर्चा में है।
यह चिट्ठी साल 2019 में लोक शिक्षण संचालनालय के संयुक्त संचालक ने एक संस्था के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी को लिखी थी। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि भ्रष्टाचार की शिकायत पर जांच के लिए यह पत्र लिखा गया है।
खैर, एक शेर है, मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है, क्या मेरे हक में फैसला देगा? इनकी जांच के लिए यह चिट्ठी लिखी गई है, वह अब मंत्री हैं, इसलिए चिट्ठी भले ही इधर-उधर घूम रही हो, लेकिन नेताजी को मुश्किल में डाल रही है।
कम हुई कमिश्नरी की टीआरपी
91f6e39f-921
छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिसिंग में बड़ा रिफार्म करते हुए पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का फैसला लिया, लेकिन कमिश्नरेट के क्षेत्र में कैंची चल जाने की वजह से इस पद की टीआरपी कम हो गई है। पुलिस कमिश्नर के दावेदारों में चार्म सिर्फ पहले पुलिस कमिश्नर बनने तक रह गया है।
बाकी तो सिटी एसपी जैसा ही मामला रहेगा। पुलिस कमिश्नर के बाद दूसरे नंबर का पद ज्वाइंट कमिश्नर का होगा। इस पर डीआईजी लेवल के अधिकारी की पोस्टिंग की जाएगी। वहीं, सवाल यह है कि डीआईजी रैंक के जो एसपी बड़े जिले संभाल रहे हैं, वे रायपुर कमिश्नरेट में एडिशनल एसपी टाईप काम क्यों करना चाहेंगे। यदि ऐसा हुआ, तो यह उनका डिमोशन ही तो होगा। कुल मिलाकर कमिश्नरेट को लेकर पुलिस महकमे में कोई उत्सुकता नहीं है।
दो नेताओं का भौकाल - मुश्किल में प्रोटोकॉल
a88130f2-d4b
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के लिए एक मुश्किल पैदा कर दी है। पीएम मोदी ने एक को पद में बड़ा कर दिया है, जबकि एक कद में हमेशा बड़ा रहा है। दोनों एक ही क्षेत्र से आते हैं, इसलिए समस्या ज्यादा हो गई है। दोनों नेताओं का भौकाल ऐसा है कि प्रोटोकॉल की मुश्किल हो गई है।
केंद्रीय राज्य मंत्री का नाम न होने की वजह से बिलासपुर में आयोजित नगरीय निकाय का कार्यक्रम निरस्त हो गया। वह भी ऐसे वक्त पर जब पब्लिक आनी शुरू हो गई थी। मुद्दा था कि बिलासपुर के सांसद होने के नाते भी नेताजी का नाम अतिथियों में शामिल नहीं था। विधायक भी कार्यक्रम से नदारद थे।
कुछ दिन पहले बिलासपुर में आयोजित युवा महोत्सव में भी माननीय का नाम प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं लिखा गया, इसको लेकर भी उनके खेमे में बेचैनी थी। दरअसल बात यह है कि डिप्टी सीएम और केंद्रीय मंत्री एक ही विधानसभा क्षेत्र से हैं। दोनों साहू हैं। एक ही स्कूल के सहपाठी भी।
एक की अध्यक्षता में चुनाव होने के बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया, ऊपर से दूसरे को केंद्रीय मंत्री बनाकर प्रोटोकॉल में ऊपर कर दिया। उधर, बिलासपुर के अफसर भी मजे लेने में कम नहीं। नेहरू चौक पर घर अलॉट कर दिया अगल-बगल। यानी सुबह उठने के साथ फुल तनाव।
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोटोकॉल में राज्य के मंत्री से ऊपर होते हैं। ऐसे में, यदि केंद्रीय मंत्री किसी कार्यक्रम में पहुंचेंगे तो उनका नाम सबसे ऊपर लिखा जाएगा। राज्य के मंत्री को यह मंजूर नहीं होगा। इस चक्कर में बिलासपुर के अधिकारी पिस रहे हैं। अमर, धरम, अरुण और तोखन को अगर टेंशन होगा तो गुस्सा अफसरों पर ही निकलेगा।
द सूत्र पर पढ़िए सिंहासन छत्तीसी के अन्य कॉलम...
सिंहासन छत्तीसी : सीनियर आईपीएस ने क्यों बोला सॉरी, बाउंसरों को पकड़ना पड़ गया भारी, भूपेश ने कैसे दी बीजेपी को मात
सिंहासन छत्तीसी : नेताजी की नाराजगी से हटे कलेक्टर, सजा मिली या तोहफा, नबीन के हाथों में नेताओं की नब्ज
सिंहासन छत्तीसी : छत्तीसगढ़ में विधायकों की नहीं सुन रहे मंत्री, नए साल के सैर सपाटा को क्यों भूले अफसर
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari