सिंहासन छत्तीसी : जंगल में लौटी वनकन्या की कथा,मंत्री का पीए पालेगा बकरी
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में हुए कुछ नए ट्रांसफर पोस्टिंग से एक पुरानी कथा फिर से गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। कहानी एक वनकन्या की है। जिसका वनमानुष कहाए जाने वाले अफसरों ने शिकार कर लिया। वनकन्या भी विषकन्या बन गई थी,जिसके कारण वो इस अंजाम तक पहुंची। खैर कुछ रिटायर हो गए हैं तो कुछ नई कुर्सी पर आ गए हैं। वहीं एक मंत्रीजी के पीए को बकरी पालन का शौक लग गया है। उन्होंने भविष्य की योजना बना ली है। गांव में थोड़ी सी जमीन लेकर नए उद्योग का खाका भी तैयार कर लिया है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए द सूत्र पर पढ़िए सिंहासन छत्तीसी।
जंगल में मंगल :
रायपुर के सरकारी गलियारों में इन दिनों एक पुराने किस्से की धूल फिर उड़ने लगी है। वजह बनी जंगल महकमे में साहब की आमद। हालांकि वन कन्या से इन साहब का सीधे तौर पर कोई लेना देना नहीं है। लेकिन किसी करीबी की वजह से यह चर्चा शुरु हुई है। कुछ लोगों ने तो सरनेम देखते ही उन्हें उस चर्चित जंगल गैंग का सदस्य घोषित कर दिया। बाद में पता चला कि मामला सिर्फ उपनाम का था। असली किरदार तो कोई और थे, जो अब रिटायर होकर आराम की जिंदगी जी रहे हैं। कहानी की असली नायिका हैं वनकन्या। बताया जाता है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने इंश्योरेंस सेक्टर में कदम रखा।
अब इंश्योरेंस बेचने के लिए लोगों को भरोसा दिलाना पड़ता है, लेकिन उसके बारे में कहा जाता है कि वह भरोसा दिलाने की कला में इतनी माहिर थीं कि सामने वाला पॉलिसी के नियम-कायदों से ज्यादा उनकी बातों पर ध्यान देता था। जंगल विभाग उनके लिए सबसे उपजाऊ बाजार साबित हुआ। साहब लोग भी सरकारी फाइलों की नीरस दुनिया से निकलकर मीठी बातों की हरियाली में घूमना पसंद करने लगे। धीरे-धीरे बीमा पॉलिसियों और निजी मुलाकातों का ऐसा मिश्रण तैयार हुआ कि कई अफसरों को लगने लगा कि यह सिर्फ कारोबारी रिश्ता नहीं, बल्कि दिल का मामला है। वनकन्या अब विषकन्या बनने वाली थी।
इसके बाद कुछ ऐसी सामग्री इकट्ठी होने लगी, जिसने कई प्रभावशाली लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन दोनों उड़ा दिया। अधिकांश साहबों ने इसे एक महंगी गलती मानकर चुप्पी का कंबल ओढ़ लिया। लेकिन एक अधेड़ और शादीशुदा रेंजर साहब इस पूरे खेल को प्रेम कथा समझ बैठे। साहब ने दिल खोलकर खर्च किया। बात ब्लैकमेलिंग पर पहुंची तो प्यार का पंचनामा बन गया। घटनाक्रम ऐसा चला कि आखिरकार विषकन्या बनी वनकन्या खुद कानून के शिकंजे में फंस गईं। कौन सही था और कौन गलत, इसका फैसला अदालत और कानून के जिम्मे है। लेकिन इस पूरे प्रकरण ने गॉसिप प्रेमियों को मसाला जरूर दे दिया।
पीए का बकरी पालन :
छत्तीसगढ़ के मंत्री और उनके पीए इन दिनों बहुत चर्चा में है। निज सहायकों को अब अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। अब मंत्री पद भी ऐसा है कि आज है कल नहीं। ऐसे ही एक मंत्रीजी के पीए हैं जो अपने भविष्य को ध्यान में रखकर व्यवसायिक बुद्दि लगा रहे हैं।
पीए साहब ने अपने गांव में थोड़ी सी जमीन ली है। इस जमीन पर आने वाले समय में बकरी पालन की योजना है। भविष्य के बारे में सोचना सबका अधिकार है। अभी तो ढाई साल हैं फिर आगे न जाने क्या हो। यदि सबकुछ ठीक रहा तो ठीक नहीं तो बकरी पालन जिंदाबाद।
अंधड़ में गिरी 40 लाख की झोंपड़ी :
राजधानी के साइंस सेंटर में एक झोपड़ी बनाई गई। झोपड़ी यानी बैंबू हट। सूत्र बताते हैं कि इस झोपड़ी को बनाने में 40 लाख रुपए खर्च किए गए। राजधानी में एक दिन आंधी आई और बैंबू हट तितर बितर हो गया।
अब सवाल ये है कि 40 लाख में तो पक्की झोपड़ी बन जाती तो आंधी पानी में भी खड़ी रहती। बांस की झोपड़ी में भला इतना पैसा लगता है क्या। सूत्र कहते हैं कि झोपड़ी तो झोपड़ी जैसी ही बनी है लेकिन पैसा तो इस झोपड़ी को बनाने वाले साहब लोगों की जेब में चला गया।
लाल बत्ती वाले साहब :
छत्तीसगढ़ के एक कलेक्टर साहब इन दिनों अपने प्रशासनिक फैसलों से कम और गाड़ी के फ्रंट बंपर से ज्यादा चर्चा में हैं। वजह है उनकी लग्ज़री गाड़ी, जिस पर आधुनिक प्रशासन और पारंपरिक अंधविश्वास का ऐसा संगम दिखाई दिया कि देखने वाले भी कुछ देर के लिए सोच में पड़ गए। गाड़ी के आगे नींबू-मिर्ची लटक रही है, मानो जिले का पूरा भाग्य अब फाइलों, योजनाओं और बैठकों से नहीं बल्कि इसी देसी सुरक्षा कवच से संचालित हो रहा हो। और चर्चा सिर्फ गाड़ी की नहीं है। गाड़ी पर लगी बत्ती भी लोगों की उत्सुकता का विषय बनी हुई है।
राह चलते लोग पूछ रहे हैं कि आखिर साहब को यह विशेषाधिकार कब और कैसे प्राप्त हो गया? क्योंकि देश में 2017 से वीआईपी लाल बत्ती संस्कृति पर आधिकारिक विराम लग चुका है। अब तो पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं को ही विशेष फ्लैशिंग लाइट की अनुमति है। नंबर देखकर तो लगता है कि यह गाड़ी रायपुर से किराए पर ली गई है या फिर किसी भाई बंधु की होगी।
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