सिंहासन छत्तीसी : माननीय ही करा रहे हैं धर्म परिवर्तन,बाबा का मंतर मोटा माल अंदर
RAIPUR : छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे इन दिनों ज्यादा गर्म हैं। खबरें ही कुछ ऐसी हैं जो अचंभे में डालती हैं। लेकिन ये घटनाएं घट रही हैं और इसीलिए उनका जिक्र हम आपके सामने करते हैं वो भी कुछ पर्देदारी के साथ। बीजेपी की सियासत में गर्मी ज्यादा है। क्योंकि उनके सामने ये खबर आई है कि उनके ही कुछ माननीय धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं। एक तो सरकार धर्मांतरण रोकने लिए नया कानून ले आई और उसके ही लोग उसके खिलाफ जा रहे हैं। वहीं सियासत से जुड़ी बाबागिरी भी चर्चा में है। सरकार ने एक बाबा को ऐसा पद दे दिया जो मलाईदार है और बाबा का इतिहास आपराधिक रहा है। और क्यों मुश्किल में हैं मंत्राणी। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
माननीय और धर्मांतरण :
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा है। बीजेपी धर्मांतरण रोकने के लिए नया और कड़ा कानून लेकर आई है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा बड़ी तेजी से चल रही है। जो पार्टी धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून लेकर आई है उसी से जुड़े कुछ माननीय ही धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। यह माननीय अंदरुनी क्षेत्रों से आते हैं और यह दूसरे धर्म के समर्थक माने जाते हैं। धर्म बदलने के लिए लोगों को प्रलोभन भी दिया जाता है और सुविधाएं भी।
चूंकि माननीय प्रभावशाली हैं इसलिए इनके प्रभाव में भी लोग आ जाते हैं। इनसे जुड़े लोग ही इस बात की पुष्टि करते हुए नजर आते हैं। कुछ लोग इसे सामाजिक सहायता बताते हैं तो कुछ इसे धर्मांतरण की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। माननीय के करीबी माने जाने वाले कुछ लोगों की बातचीत भी इन चर्चाओं को हवा देती नजर आती है। क्या सही है क्या गलत यह तो अलग बात है लेकिन यदि चर्चाएं सही हैं तो फिर धर्मांतरण विरोधी कानून की असली परीक्षा बाहर नहीं घर के भीतर ही होगी।
सियासत और बाबागिरी :
छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों बाबागिरी खूब चल रही है। लोग अपराधी से महंत बन जाते हैं और सियासत उनके चरणों में झुक जाती है। बीजेपी ऐसी ही राजनीतिक पार्टी मानी जाती है जिसका बाबाओं के प्रति कुछ ज्यादा ही झुकाव है। एक ऐसे ही बाबा हैं जिनका बैकग्राउंड क्रिमिनल रहा है। कुछ तो इन पर गंभीर आरोप हैं। इन्होंने मठ मंदिरों की जमीनों का भी हेरफेर किया है। इन्होंने अपना रुप बदला,छवि बदली और पैरों में चप्पल की जगह खड़ाऊं पहनने लगे।
बाबा ने ऐसा मंतर मारा कि सियासत झुक गई और इनको प्रदेश स्तर के एक बड़े और मलाईदार पद पर बैठा दिया। अब बाबा हैं और कमाई है। कुछ लोगों ने संगठन के बड़े नेताओं को इस बारे में बताया भी लेकिन उनके कान पर जूं नहीं रेंगी। वहीं एक और बाबा हैं। उनका पिछला इतिहास भी कुछ इसी तरह का रहा है। वे भी बाबा बने और सरकार से आश्रम के लिए जमीन मांग ली। सरकार ने भी लंबी चौड़ी जमीन उनको देने की तैयारी कर ली है।
मंत्राणी,मलमास और मंगलसूत्र :
प्रदेश की एक मंत्राणी इन दिनों मलमास और मंगलसूत्र के फेर में आ गईं। दरअसल हिंदू धर्म के हिसाब से मलमास में कोई पुण्य काम नहीं किया जाता। बीजेपी तो इस मान्यता को और ज्यादा मानती है। यहां तक कि पार्टी की कार्यकारिणी भी इस मास में घोषित नहीं की जाती। फिर यह चूक कैसे हो गई यह बात हैरान करती है।
मलमास में सामूहिक विवाह कार्यक्रम करा दिया गया। बात यहां तक होती तो ठीक थी। इस कार्यक्रम में कन्या विवाह योजना के तहत नकली मंगलसूत्र भी बांट दिए गए। बात सामने आई तो मंत्री ने कह दिया कि सोने पर छाई महंगाई मैं नकली ले आई। एक तो विवाद और दूसरा मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें। मंत्री महोदया को अब उनके करीबी लोग इस संकट को टालने के लिए किसी बड़े तांत्रिक से तंत्र मंत्र और हवन पूजन कराने की सलाह दे रहे हैं। देखते हैं यह हवन पूजन कितना काम आता है।
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