सिंहासन छत्तीसी : मंत्री की मोहब्बत के चर्चे, इलेक्ट्रिक एक्टिवा के गिफ्ट पर खर्चे
RAIPUR : छत्तीसगढ़ के मंत्री बहुत रसिक हैं। कोई अपनी प्रेमिका को बंगला दिलाता है तो कोई गाड़ी। ताज़ा मामला इलेक्ट्रिक एक्टिवा का है। अभी तक तो मिठाई और केक ही मंत्रीजी की तरफ से जाते थे अबकी बार उन्होंने अपनी चहेती को इलेक्ट्रिक एक्टिवा की चाबी थमा दी। सवाल ये है कि दिल आपका है किसी को भी दें लेकिन उस पर खर्च तो जनता का पैसा न करें। वहीं विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं लेकिन बीजेपी नेत्रियों में टिकिट की होड़ लग गई है। परेशान तो वो नेता जिनकी सीट पर नेत्रियों ने नज़रें गड़ा रखी हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
मंत्री बने रसिक बलमा:
प्यार, इश्क और मोहब्बत को भला कौन बुरा कह सकता है। लेकिन जब उसका भार जनता पर पड़ता है तो सवाल उठता है। मंत्री जी के इश्क के चर्चे भी इन दिनों कुछ ऐसे ही हैं। इश्क छिपाने की चीज़ भी नहीं है, वो तो बाहर आ ही जाती है। पहले और अब के प्रेम में फर्क सिर्फ इतना है कि उस जमाने में प्रेमी-प्रेमिका पार्क में मिलते थे, आजकल सोशल मीडिया पर प्रेम का प्रेस नोट जारी होता है।
कभी फेसबुक पर जन्मदिन के केक की तस्वीर तो कभी दिवाली की मिठाइयों की तस्वीर। अब इसमें किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। जब उनकी चहेती ही यह सब जाहिर कर रही है। आखिर मंत्री जी भी इंसान हैं, उनका भी दिल है। दिल पर किसी का बस थोड़े ही चलता है।लेकिन असली सवाल वहां शुरू होता है, जहां दिल के साथ सरकारी संसाधन भी जुड़ जाएं।
प्रेमिका की सवारी के लिए चमचमाती सरकारी कार दिखाई दे तो जनता का दिल भी थोड़ा धड़कने लगता है। और अगर चर्चाओं पर यकीन करें तो मामला सिर्फ चार पहियों तक सीमित नहीं है। प्रेम की इस गाड़ी के साथ बैटरी वाली दुपहिया सवारी की भी चर्चा है। मंत्रीजी ने अपनी चहेती को हाल ही में इलेक्ट्रिक एक्टिवा भी गिफ्ट की है।
यानी पेट्रोल का झंझट खत्म।प्रेम की इस कहानी का एक और अध्याय भी दिलचस्प है।कहा जा रहा है कि मंत्री जी अपनी इस खास हमसफर को सफर में ही नहीं, अब संगठन की सियासत में भी साथ लेकर चल रहे हैं। यानी पहले दिल में एंट्री, फिर कार में सीट और अब संगठन में जगह। यही नहीं मंत्रीजी सेल्फी भी लेते हैं। सेल्फी तो खुद की लेकिन दिखाई देती है हंसती हुई प्रेमिका।वाह रे इश्क। रहम कीजिये मंत्रीजी, जनता की कमाई को अपने प्रेम की अग्नि में हवन मत कीजिये।
विधायकी की दौड़:
विधानसभा चुनाव में भले ही वक्त हो लेकिन दावेदारी की दौड़ शुरू हो गई है। यह बात इसलिए भी रोचक है क्योंकि यह दौड़ बीजेपी की महिला नेत्रियों की है। वे सीधे पार्षद से विधायक बनना चाहती हैं। एक महिला नेत्री ने अपने आपको विधायक के तौर पर प्रचारित करना शुरू कर दिया है। वे भले ही पार्षद हैं लेकिन अपने आपको भावी विधायक मानने लगी हैं।
वे जिस विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी कर रही हैं वहां के मौजूदा विधायक अपने आप पर राष्ट्रपति भवन की मेहरबानी बताने लगे। इस सीट पर दूसरी पार्षद मेडम की भी नज़र है। उनका साथ दे रहे हैं संगठन के एक बड़े नेता। तो उन्होंने भी अपनी विधायकी का राज्याभिषेक कर लिया है। तीसरी मेडम वे हैं जो बड़े पद पर हैं।
उनको इस पद तक पहुंचाने में जिन विधायक जी ने मेहनत की अब उनकी ही सीट खतरे में आ गई। मेडम की नज़र उनकी ही सीट पर लग गई है। अब विधायक परेशान हैं। कोई सीएम की परिक्रमा कर रहा है तो कोई दिल्ली की दौड़ लगा रहा है।
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