छत्तीसगढ़ में 176 शिक्षक निलंबित, युक्तियुक्तकरण आदेश की अनदेखी पर विभाग की बड़ी कार्रवाई
NEWS IN SHORT
- आदेश की अनदेखी पर 176 शिक्षक तत्काल निलंबित।
- कांकेर जिले में सबसे ज्यादा 72 शिक्षक सस्पेंड।
- कोंडागांव समेत अन्य जिलों में 14 शिक्षकों का वेतन बंद।
- 48 शिक्षकों के विरुद्ध कड़ी विभागीय जाँच शुरू।
- कुछ शिक्षकों ने हाई कोर्ट से स्टे हासिल किया।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने युक्तियुक्तकरण (Rationalization) प्रक्रिया के तहत जारी किए गए पदस्थापना आदेशों का पालन न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। विभाग ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही और आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नई जगहों पर ज्वाइनिंग न देने के कारण प्रदेश भर में 176 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है।
आदेश की अनदेखी और विभाग का सख्त रुख
प्रदेश में शिक्षकों की कमी को दूर करने और छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित करने के लिए राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत कुल 15 हजर 310 शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए थे। हालांकि, इनमें से 303 शिक्षकों ने निर्धारित समय सीमा (25 अप्रैल) बीत जाने के बाद भी अपनी नई पदस्थापना वाली जगहों पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद ज्वाइनिंग न देने पर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सख्त रुख अपनाते हुए जिला स्तर पर कार्रवाइयों के निर्देश दिए। विभाग की इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।
निलंबन का जिलावार लेखा-जोखा, कांकेर सबसे आगे
कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा गाज कांकेर जिले में गिरी है, जहाँ सर्वाधिक 72 शिक्षकों को निलंबित किया गया है। अन्य जिलों की स्थिति इस प्रकार है:
बस्तर संभाग: कोंडागांव में 23, सुकमा में 9 और बस्तर जिले में 3 शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है।
सरगुजा संभाग: बलरामपुर में 24, सरगुजा में 10 और एमसीबी (MCB) जिले में 5 शिक्षकों पर निलंबन की कार्रवाई हुई है।
अन्य जिले: रायपुर में 3, रायगढ़ में 4, दुर्ग में 2 और कबीरधाम में 2 शिक्षकों को निलंबित किया गया है।
वेतन पर रोक और विभागीय जांच (DE)
केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि विभाग ने आर्थिक और कानूनी मोर्चे पर भी सख्ती दिखाई है। जिसके तहत कुल 14 शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। इसमें अकेले कोंडागांव जिले के 12 शिक्षक शामिल हैं। 48 शिक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच संस्थित की गई है। इनमें जांजगीर-चांपा (17 मामले), बेमेतरा (6 मामले) और कबीरधाम (7 मामले) प्रमुख हैं। इन शिक्षकों को औपचारिक आरोप पत्र (Charge Sheet) भी थमा दिए गए हैं।
कोर्ट की शरण में शिक्षक
युक्तियुक्तकरण की इस प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई के बीच कई शिक्षकों ने कानूनी रास्ता अपनाया है। DPI के रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग एक दर्जन से अधिक शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। रायगढ़ और मोहला-मानपुर जैसे जिलों में कुछ शिक्षकों को कोर्ट से 'स्टे' (स्थगन आदेश) भी मिला है। वहीं, सक्ती जिले में 7 मामलों पर फिलहाल सुनवाई जारी है।
निष्कर्ष
स्कूल शिक्षा विभाग की इस विशाल कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कड़े निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगी। जहाँ एक तरफ विभाग अनुशासन बनाए रखने पर अड़ा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक संघों और कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल, 303 में से बाकी बचे शिक्षकों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।युक्तियुक्तकरण आदेश की अनदेखी, 176 शिक्षक निलंबित, विभाग की बड़ी कार्रवाई
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