सुशासन शिविर में घूसखोरी : रिटायरमेंट से पहले हेडमास्टर से घूस, सलाखों के पीछे बाबू

Aishwarya Dwivedi | May 30, 2026, 13:27 IST
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छत्तीसगढ़ के कोरबा और रायगढ़ में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वत लेते दो बाबुओं को रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जो हेडमास्टर और महिला से घूस मांग रहे थे।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ में एसीबी ने दो भ्रष्ट बाबुओं को गिरफ्तार किया।
  • सुशासन शिविर में बाबू प्रदीप 40 हजार लेते पकड़ाया।
  • हेड मास्टर से जीपीएफ एंट्री के एवज में घूस मांगी थी।
  • रायगढ़ में नाम सुधारने के लिए एक लाख मांगे गए।
  • बाबू तुलाराम को 60 हजार की किश्त लेते दबोचा।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार को दो अलग-अलग जिलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लिपिकों (बाबू) को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। पहली कार्रवाई कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा में हुई, जहां सुशासन शिविर के दौरान ही एक बाबू को दबोचा गया। वहीं दूसरी कार्रवाई रायगढ़ जिले के छाल तहसील कार्यालय में की गई। दोनों ही मामलों की शिकायत बिलासपुर एसीबी से की गई थी।



मामला 1: सुशासन शिविर में ही ले रहा था 40 हजार की घूस

पहला मामला पोड़ी उपरोड़ा खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय का है। यहां पदस्थ बाबू प्रदीप मिश्रा को एसीबी की टीम ने तुमान में आयोजित 'सुशासन तिहार समाधान शिविर' के दौरान 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।



रिटायरमेंट से ठीक पहले परेशान करने का आरोप

करतला ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला रोगदा में पदस्थ हेड मास्टर अमृतलाल बघेल इसी महीने 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वे पहले लंबे समय तक पोड़ी उपरोड़ा के कोरबी में पदस्थ थे। उस दौरान की जीपीएफ (GPF) कटौती की एंट्री उनकी पासबुक में नहीं हुई थी। सेवानिवृत्ति से पहले इसे अपडेट कराने के लिए उन्होंने अपनी पासबुक बाबू प्रदीप मिश्रा को दी थी। आरोप है कि बाबू ने इस काम के एवज में 50 हजार रुपए की मांग की थी, जिसका सौदा बाद में 40 हजार रुपए में तय हुआ। हेड मास्टर रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इसकी शिकायत एसीबी से कर दी।



Bribery at Good Governance Camp


मामला 2: भूल सुधारने के मांगे 1 लाख

दूसरा मामला रायगढ़ जिले के छाल तहसील कार्यालय का है, जहां राजस्व रिकॉर्ड (बी-1) में एक लिपिकीय त्रुटि के कारण महिला का नाम 'कंचन' की जगह 'कचरा' दर्ज हो गया था। इस नाम को सुधारने के एवज में तहसील कार्यालय के बाबू तुलाराम पटेल ने महिला से एक लाख रुपए की भारी-भरकम रिश्वत की मांग कर डाली।



ग्राम धसकामुड़ा निवासी भानुप्रताप पटेल ने अपनी परिचित कंचन बाई की जमीन खरीदी-बिक्री के रिकॉर्ड को दुरुस्त कराने के लिए बिलासपुर एसीबी में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। एसीबी के निर्देश पर योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया। जैसे ही प्रार्थी ने बाबू तुलाराम को रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 60 हजार रुपए दिए, टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। दोनों ही मामलों में एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।



निष्कर्ष

यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करती है, जहाँ सेवानिवृत्ति के लाभ और क्लर्कियल गलतियों को सुधारने के लिए भी घूस मांगी जा रही है। हालांकि, सुशासन शिविर जैसी जगहों पर एसीबी की यह त्वरित कार्रवाई यह संदेश देती है कि सतर्क नागरिकों की सजगता से भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी जा सकती है।



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