सुशासन में लगा घूसखोरी का घुन, ढाई साल में 161 अफसर रिश्वत लेते पकड़ाए

Arun Tiwari | Jun 15, 2026, 14:25 IST
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार में पर एसीबी की रिपोर्ट 2026
छत्तीसगढ़ में एसीबी की 29 महीनों की कार्रवाई के आंकड़ों से बड़ा खुलासा हुआ है। इस दौरान 128 ट्रैप मामलों में 161 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए गए और 45.38 लाख रूपए से अधिक की राशि जब्त की गई।

Raipur. छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हो रही है, लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की ट्रैप कार्रवाइयों के आंकड़े यह भी बताते हैं कि आम नागरिकों से सीधे जुड़े सरकारी विभाग अब भी रिश्वतखोरी के सबसे बड़े केंद्र बने हुए हैं। पिछले 29 महीनों में एसीबी ने 128 ट्रैप कार्रवाई करते हुए 161 अधिकारी-कर्मचारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इन मामलों में 45.38 लाख रूपए से अधिक की रिश्वत राशि भी जब्त की गई है। सबसे अधिक मामले राजस्व, शिक्षा और पुलिस विभाग से सामने आए हैं, जहां लोगों का रोजमर्रा के कामों के लिए सबसे ज्यादा संपर्क होता है।



रोजमर्रा के काम में रिश्वत:

जमीन का नामांतरण, सीमांकन, रिकॉर्ड दुरुस्त कराने, मुआवजा लेने, निर्माण कार्यों का भुगतान, पेंशन-ग्रेच्युटी की फाइल आगे बढ़ाने और बिजली कनेक्शन दिलाने जैसे कामों में रिश्वत मांगने की शिकायतें लगातार दर्ज हुई हैं। एसीबी के रिकॉर्ड यह संकेत देते हैं कि भ्रष्टाचार केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पहुंच प्रशासनिक व्यवस्था के ऊपरी स्तर तक भी बनी हुई है।



29 माह में एसीबी की कार्रवाई :

ट्रैप कार्रवाई - 128


गिरफ्तार अधिकारी-कर्मचारी- 161


जब्त रिश्वत राशि - ₹45.38 लाख


कार्रवाई वाले विभाग - 27


अवधि - जनवरी 2024 – मई 2026



घूसखोरी में मग्न कर्मचारी, अधिकारी :

कार्रवाई के दौरान पटवारी और लिपिक से लेकर एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधिकारी, निरीक्षक, सब-इंस्पेक्टर और अभियंता स्तर के अधिकारी भी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं। इससे साफ है कि रिश्वतखोरी का नेटवर्क केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण पदों तक फैला हुआ है।





इतने अधिकारी घूसखोर:

SDM - 2


तहसीलदार - 1


नायब तहसीलदार - 2


अतिरिक्त तहसीलदार - 1


DEO - 1


BEO - 2


BMO - 2


CMO - 1


इंस्पेक्टर - 1


एसआई - 1


एएसआई - 6


कई इंजीनियर और अधिकारी



भ्रष्टाचार में पर एसीबी की रिपोर्ट


राजस्व,पुलिस रिश्वत में अव्वल:

सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन से जुड़े मामलों में सामने आईं। कई मामलों में फाइल आगे बढ़ाने, सीमांकन कराने, रिकॉर्ड सुधारने और नामांतरण के बदले पैसे मांगे गए। इसके अलावा निर्माण कार्यों के बिल पास कराने, मुआवजा राशि जारी करने और पेंशन संबंधी मामलों में भी रिश्वत मांगने की शिकायतें दर्ज हुईं। बिजली कनेक्शन और अन्य सरकारी भुगतानों से जुड़े मामलों में भी लोगों को अवैध मांगों का सामना करना पड़ा।



पुलिस विभाग से जुड़े मामलों में भी कई चौंकाने वाली शिकायतें सामने आईं। कुछ मामलों में कार्रवाई को प्रभावित करने, चालान में राहत दिलाने, जब्त वाहन छोड़ने या प्रकरण में मदद करने के नाम पर पैसे मांगे गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार का दायरा केवल विकास कार्यों या राजस्व विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक सेवाओं की पूरी व्यवस्था में इसकी मौजूदगी महसूस की जा रही है।



ये हैं रिश्वत में अव्वल विभाग:

राजस्व


शिक्षा


पंचायत


पुलिस


नगरीय प्रशासन



सुशासन पर भारी घूसखोरी:

सरकार बदलने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई तेज होने का दावा किया जा रहा है। एसीबी की बढ़ी हुई ट्रैप कार्रवाइयों से यह भी संकेत मिलता है कि शिकायतों पर पहले की तुलना में अधिक सक्रियता से कार्रवाई हो रही है। हालांकि, लगातार सामने आ रहे मामलों से यह सवाल भी उठ रहा है कि कार्रवाई बढ़ने के बावजूद रिश्वतखोरी की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है।



रिश्वत में अव्वल जिले:

सूरजपुर


सरगुजा


रायपुर


रायगढ़


मुंगेली


बिलासपुर



जवाबदेही तय होना जरूरी:

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ट्रैप कार्रवाई और गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने, डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने, जवाबदेही तय करने और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। जब तक आम नागरिक बिना किसी दबाव और अतिरिक्त भुगतान के अपने वैध काम आसानी से नहीं करा पाएंगे, तब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान की वास्तविक सफलता अधूरी मानी जाएगी।



निष्कर्ष:

पिछले 29 महीनों के आंकड़े यह भी बताते हैं कि रिश्वतखोरी की सबसे बड़ी मार उन्हीं लोगों पर पड़ रही है जो अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। यही वजह है कि राजस्व, शिक्षा और पुलिस जैसे विभाग भ्रष्टाचार की चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं और इन पर प्रभावी निगरानी की मांग लगातार बढ़ रही है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में ACB ने कितनी ट्रैप कार्रवाई की है?
    जनवरी 2024 से मई 2026 के बीच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने कुल 128 ट्रैप कार्रवाई की हैं, जिनमें रिश्वत लेते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को पकड़ा गया है।
  2. सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार किन विभागों में पाया गया है?
    सबसे ज्यादा मामले राजस्व, शिक्षा और पुलिस विभाग से सामने आए हैं। इसके अलावा पंचायत और नगरीय प्रशासन विभाग में भी कई शिकायतें दर्ज हुई हैं।


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