छत्तीसगढ़ में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की दस्तक, सूअर फार्म में करोड़ों का नुकसान
NEWS IN SHORT
- अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) के कारण 300 से अधिक सूअर मरे।
- पशुपालन विभाग ने बचे हुए सूअरों को जहरीला इंजेक्शन देकर मारा।
- फार्म मालिक को लगभग 1 करोड़ 20 लाख रूपए का नुकसान हुआ।
- फार्म को सील करने की तैयारी की और संक्रमण रोकने के लिए कड़े कदम उठाए।
- अफ्रीकन स्वाइन फीवर इंसानों को प्रभावित नहीं करता।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के नारधा-मुडपार गांव में स्थित एक सूअर फार्म में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) के कारण 300 से अधिक सूअरों की मौत हो गई। इस वायरस के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने फार्म में बचे हुए सूअरों को भी जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया और सभी मृत सूअरों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया।
फार्म मालिक को 1 करोड़ 20 लाख करोड़ का नुकसान
फार्म के मालिक ने बताया कि 29 मार्च को सैंपल लिए गए थे, जबकि एक अप्रैल से सूअरों की मौत शुरू हुई। छः अप्रैल तक करीब 300 सूअरों की मौत हो चुकी थी, जिनकी कीमत लगभग 30 हजार रूपए प्रति सूअर थी। फार्म में कुल 133 गर्भवती सूअर और 400 बच्चे भी थे, जिन्हें भी मारा गया। इस हादसे में फार्म मालिक को लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपए का भारी नुकसान हुआ है।
वायरस का इंसानों पर कोई असर नहीं
फार्म मालिक ने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए ताकि यह वायरस और ज्यादा फार्मों तक न पहुंचे। उनका कहना था कि इस वायरस का इंसानों पर कोई असर नहीं होता, लेकिन सूअरों के मांस का सेवन संक्रमण फैला सकता है।
ज्यादा खतरा सूअर के मांस से
छत्तीसगढ़ में सूअर के मांस की खपत काफी अधिक है। हर दिन महाराष्ट्र और नागपुर की ओर से बड़ी मात्रा में सूअर यहां लाए जाते हैं। वही बीमार जानवरों को भी काटा जा रहा है। जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। कई लोग बीमार सूअरों का मांस भी खाते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रशासन ने मांस के सेवन पर रोक लगाने की सलाह दी है।
फार्म को सील करने की प्रक्रिया शुरू
पशुपालन विभाग के अधिकारी वसीम शम्स ने कहा कि मामले की गंभीरता को समझते हुए टीम ने तुरंत कार्रवाई की और फार्म को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। अब इस वायरस के फैलाव को रोकने के लिए प्रशासन सतर्क हो गया है।
क्या है अफ्रीकन स्वाइन फीवर?
अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है, जो सूअरों को संक्रमित करती है और इसकी मृत्यु दर लगभग 100% तक होती है। हालांकि यह इंसानों को प्रभावित नहीं करता, यह सूअर पालन उद्योग के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। इस वायरस का प्रकोप अफ्रीका से शुरू हुआ था और अब कई देशों में फैल चुका है।
अफ्रीकन स्वाइन फीवर से बचाव के उपाय
पशुपालन विभाग ने साफ किया है कि इस वायरस का इंसानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन सूअर का मांस खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, सूअर पालन से जुड़े सभी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर के कारण 300 से अधिक सूअरों की मौत हो गई। पशुपालन विभाग ने बचे हुए सूअरों को मारकर शवों को दफनाया। फार्म मालिक को 1 करोड़ 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ। प्रशासन ने फार्म को सील कर संक्रमण फैलने से बचाने के लिए कार्रवाई की।
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