एम्स की बदहाल व्यवस्था; एक्स-रे और सोनोग्राफी के लिए 8 महीने का इंतजार
NEWS IN SHORT
- एम्स में मरीजों को जरूरी जांचों के लिए छः से आठ महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
- फ्रैक्चर या महिलाओं की जांच में भी महीनों की देरी हो रही है।
- मरीजों को निजी अस्पतालों का महंगा सहारा लेना पड़ रहा है।
- एम्स में रोजाना 3 हजार से अधिक ओपीडी होते हैं, जिससे दबाव बढ़ता है।
- एम्स ने सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है, और ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रक्रिया शुरू की गई है।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित एम्स स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है। मरीजों को एक्स-रे, सोनोग्राफी और बायोप्सी जैसी आवश्यक जांचों के लिए छः से आठ महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस देरी के कारण मरीजों का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी हालत और गंभीर हो रही है।
मरीजों को जांच के लिए लंबा इंतजार
हालात इतने खराब हैं कि जिन मरीजों को हड्डी में फ्रैक्चर है या महिलाओं को सोनोग्राफी की जरूरत है, उन्हें भी महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि महीनों बाद किसी तरह जांच के लिए नंबर मिल जाता है, लेकिन फिर रिपोर्ट लेने के लिए 15 से 20 दिन तक अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। यह स्थिति मरीजों के लिए काफी तनावपूर्ण और दर्दनाक बन चुकी है।
एम्स में ओपीडी और जांचों का बोझ
एम्स में रोजाना करीब 3 हजार से अधिक ओपीडी होते हैं। इसके अतिरिक्त, सैकड़ों मरीजों को एमआरआई, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन जैसी जटिल जांचों की आवश्यकता रहती है। इन जांचों में देरी के कारण कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जहां इलाज महंगा होता है।
जांच के लिए खराब व्यवस्था
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एम्स के बेसमेंट स्थित CT-स्कैन और MRI कक्ष में मरीजों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। नाम पुकारे जाने के बाद मरीजों को तीन से छः महीने बाद की तारीख दी जाती थी। इसी प्रकार, रेडियोग्राफी विभाग में भी एक्स-रे और सोनोग्राफी के लिए महीनों बाद की डेट दी जा रही थी।
अब सवाल यह उठता है की इस लापरवही की जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या एम्स प्रशासन इस व्यवस्था में बदलाव करेगा या स्थिति जस की तस बनी रहेगी।
निष्कर्ष
हालांकि एम्स ने सुधारात्मक कदम उठाने का दावा किया है, लेकिन वर्तमान में मरीजों को जांचों के लिए लंबा इंतजार और बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने की समस्या बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल सुधारने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों का इलाज समय पर शुरू हो सके और उनकी स्थिति गंभीर न हो।
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