एम्स भोपाल का हाईटेक हेलमेट, AI से दांत और जबड़े का 3D एक्स-रे करेगा

Sandeep Kumar | Apr 04, 2026, 22:09 IST
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haeetek helamet
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BHOAPL: एम्स भोपाल में ICMR के सहयोग से AI आधारित हेलमेट विकसित हो रहा है। पहनते ही दांत और जबड़े का 3D एक्स-रे होगा। यह दुनिया का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है।

News in Short

  • एम्स भोपाल में AI हेलमेट हो रहा है विकसित।
  • ICMR के फर्स्ट इन वर्ल्ड चैलेंज में मिली मंजूरी।
  • हेलमेट पहनते ही होगी दांत की 3D जांच।
  • आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क से मिलेगी सटीक रिपोर्ट।
  • डेंटल और मैक्सिलोफेशियल जांच होगी आसान।

News in Detail

भोपाल के एम्स में एक ऐतिहासिक तकनीकी प्रयोग हो रहा है। यहां एक ऐसा हाईटेक हेलमेट (Hightech Helmet) विकसित किया जा रहा है जो पहनते ही दांत और जबड़े की 3D जांच कर सकेगा। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR के "फर्स्ट इन वर्ल्ड" चैलेंज के तहत यह प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। AI आधारित यह डिवाइस डेंटल जांच में नई क्रांति लाने वाला है।

हाईटेक हेलमेट

एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) में एक अनोखी तकनीक पर काम चल रहा है। यहां एक खास हाईटेक हेलमेट बनाया जा रहा है। इसे पहनते ही दांत और जबड़े की पूरी 3D जांच हो जाएगी।

यह भारत और दुनिया दोनों के लिए नई बात है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने इसे मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्ट फर्स्ट इन वर्ल्ड चैलेंज के तहत चुना गया है। इसकी अहमियत पूरी दुनिया में मानी जा रही है।

AI से होगी सटीक डेंटल जांच

इस हेलमेट की सबसे बड़ी खूबी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) है। इसमें आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क तकनीक का इस्तेमाल होगा। इस तकनीक से दांत और जबड़े की विस्तृत 3D इमेज तैयार होगी।

डॉक्टरों को बीमारी की सटीक और तेज जानकारी मिलेगी। पारंपरिक एक्स-रे की तुलना में यह कहीं अधिक स्पष्ट होगा। रिपोर्ट भी ज्यादा विस्तृत और भरोसेमंद होगी। इससे सही समय पर सही इलाज संभव हो सकेगा।

डॉ. बाबूलाल सोनी की अहम भूमिका

इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व डॉ. बाबूलाल सोनी कर रहे हैं। वे एम्स भोपाल के ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डॉ. सोनी इस प्रोजेक्ट में प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (Principal Investigator) की भूमिका निभा रहे हैं।

उनकी पूरी टीम इस नई तकनीक को विकसित करने में जुटी है। उनका लक्ष्य इस हेलमेट को जल्द से जल्द मरीजों के लिए उपलब्ध कराना है। यह प्रोजेक्ट उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है। पूरे देश की नजरें इस टीम पर टिकी हैं।

मैक्सिलोफेशियल जांच में बड़ा बदलाव

यह हेलमेट डेंटल और मैक्सिलोफेशियल जांच (Maxillofacial Diagnosis) के क्षेत्र में क्रांति लाएगा। अभी तक इस तरह की जांच में काफी समय और संसाधन लगते हैं। हेलमेट पहनने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरी रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। मरीज को अलग-अलग मशीनों के पास जाने की जरूरत नहीं होगी। इससे अस्पतालों में समय और पैसे दोनों की बचत होगी। जटिल मामलों में डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। यह तकनीक ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

ICMR का फर्स्ट इन वर्ल्ड चैलेंज

ICMR का "फर्स्ट इन वर्ल्ड चैलेंज" (First in World Challenge) उन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देता है जो दुनिया में पहली बार हो रहे हों। एम्स भोपाल का यह हेलमेट प्रोजेक्ट इसी श्रेणी में आता है।

इसका मतलब यह है कि इस तरह का डिवाइस आज तक कहीं नहीं बना है। इस मंजूरी से प्रोजेक्ट को वित्तीय और तकनीकी सहयोग मिल रहा है। यह भारत के मेडिकल रिसर्च (Medical Research) की बड़ी उपलब्धि है। इससे भारत वैश्विक स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।

मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा

इस हेलमेट डिवाइस के तैयार होने के बाद मरीजों को सबसे अधिक फायदा होगा। जांच प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी। मरीज को बस हेलमेट पहनना होगा।

कुछ ही समय में 3D एक्स-रे रिपोर्ट (3D X-Ray Report) तैयार हो जाएगी। इससे डेंटल बीमारियों का इलाज समय पर हो सकेगा। बुजुर्ग और बच्चों के लिए यह खासतौर पर मददगार साबित होगा। यह भारत में स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) को एक नया आयाम देगा।

FAQ

  1. AI हेलमेट क्या करेगा?
    एम्स भोपाल में विकसित हो रहा AI हेलमेट (AI Helmet) एक हाईटेक मेडिकल डिवाइस है। इसे पहनते ही मरीज के दांत और जबड़े की पूरी 3D एक्स-रे जांच हो जाएगी। इसमें आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
  2. AI हेलमेट से मरीजों को क्या फायदा होगा?
    AI हेलमेट से मरीजों को डेंटल और मैक्सिलोफेशियल जांच में बड़ा फायदा होगा। हेलमेट पहनते ही कुछ ही मिनटों में 3D रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। इससे जांच प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और सटीक हो जाएगी।
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