बलौदाबाजार अग्निकांड: हाईकोर्ट ने ठुकराई अमित बघेल की जमानत याचिका

Harrison Masih | May 19, 2026, 16:43 IST
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बलौदा बाजार अग्निकांड मामले में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है, उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। इससे पहले निचली अदालत भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी।

News In Short

  • अमित बघेल की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की।
  • निचली अदालत भी जमानत याचिका अस्वीकार कर चुकी है।
  • मामला 2024 में गिरौधपुरी धाम में जैतखाम तोड़फोड़ से शुरू हुआ।
  • प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय में आगजनी।
  • हिंसा में करोड़ों की सरकारी संपत्ति का नुकसान, 187 गिरफ्तारियां हुई थीं।

News In Details

बलौदा बाजार अग्निकांड मामले में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। आगजनी कांड में गिरफ्तारी के बाद अमित बघेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने फिलहाल उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।



कई धाराओं में दर्ज हैं मामले

अमित बघेल को बलौदा बाजार कोतवाली पुलिस ने आगजनी और हिंसा मामले में संलिप्तता पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किए हैं।



गिरफ्तारी के बाद उन्होंने पहले निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन वहां से याचिका खारिज हो गई। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से भी उन्हें राहत नहीं मिल सकी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब कानूनी लड़ाई और लंबी हो सकती है।



कैसे भड़की थी हिंसा की चिंगारी?

बलौदा बाजार हिंसा की जड़ मई 2024 में गिरौधपुरी धाम में हुई एक घटना से जुड़ी हुई है। 15 और 16 मई 2024 की दरमियानी रात कुछ असामाजिक तत्वों ने सतनामी समाज के धार्मिक स्थल में स्थित पूज्य जैतखाम में तोड़फोड़ कर दी थी।



इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन समाज के कई लोग इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए। बढ़ते दबाव के बीच गृहमंत्री विजय शर्मा ने न्यायिक जांच की घोषणा भी की थी, लेकिन इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन थमा नहीं।



10 जून को हिंसा में बदला प्रदर्शन

10 जून 2024 को जैतखाम तोड़फोड़ मामले के विरोध में हजारों लोग बलौदा बाजार कलेक्ट्रेट के पास एकत्र हुए। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन बाद में हालात अचानक बिगड़ गए।



भीड़ उग्र हो गई और देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठा। उपद्रवियों ने कलेक्टर कार्यालय और एसपी कार्यालय को आग के हवाले कर दिया। सरकारी वाहनों और अन्य संपत्तियों में भी जमकर तोड़फोड़ की गई। इस हिंसा में सरकारी संपत्ति को लगभग 12.53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।



43 मामले, 187 गिरफ्तारियां और लगातार कार्रवाई

आगजनी और हिंसा के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने अलग-अलग थानों में कुल 43 मामले दर्ज किए और अब तक 187 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट और मौके पर मौजूद लोगों के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही हैं। कई अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच जारी है।



हाईकोर्ट के फैसले के बाद क्या?

हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अमित बघेल की कानूनी चुनौतियां और बढ़ गई हैं। अब उनके पास सुप्रीम कोर्ट का विकल्प बचता है। वहीं दूसरी ओर, बलौदा बाजार अग्निकांड की जांच अभी भी जारी है और पुलिस पूरे मामले में साजिश, उकसावे और हिंसा के पीछे की भूमिका को लेकर अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है।



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