23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को उम्रकैद

Arun Tiwari | Apr 06, 2026, 11:48 IST
amit-jogi-life imprisonment-cg-high-court-verdict-jaggi-hatyakand
रायपुर के रामावतार जग्गी हत्याकांड में दो दशक बाद बड़ा फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

Raipur. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में दो दशक बाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने के आरोप हों, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग या पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया जा सकता।



क्या कहा हाईकोर्ट ने:

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि यदि सभी आरोपियों के खिलाफ समान प्रकार के साक्ष्य मौजूद हैं, तो किसी एक को बरी करना और बाकी को उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी जोड़ा कि ऐसा तभी संभव है जब किसी आरोपी को अलग से राहत देने के लिए ठोस और विशिष्ट कारण मौजूद हों।



अमित जोगी को उम्रकैद:

कोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया। इसके तहत उन्हें उम्रकैद के साथ 1000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त 6 महीने की सजा भुगतनी होगी। यह फैसला लंबे समय से लंबित इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इससे पहले हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी माना था और तीन सप्ताह में सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।





जग्गी हत्याकांड का पूरा मामला :

4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि अमित जोगी (Amit Jogi) को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।



31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। जिस पर पहले अमित जोगी के पक्ष में स्टे मिला। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया।





करीब दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।



शुरुआती जांच में पुलिस पर पक्षपात और ढिलाई के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि उस समय पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन अब केस दोबारा खुलने के बाद इस पर फिर से सुनवाई हो रही है।



जानिए कौन थे रामावतार जग्गी :

कारोबारी पृष्ठभूमि से आने वाले रामावतार जग्गी छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक प्रभावशाली नाम थे। वे देश के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे। जब विद्याचरण शुक्ल ने कांग्रेस छोड़कर NCP का दामन थामा, तब रामावतार जग्गी भी उनके साथ इस पार्टी में शामिल हो गए। इसके बाद शुक्ल ने उन्हें छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ और मजबूत हो गई।



हत्याकांड में 28 लोग पाए गए थे दोषी :

जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।



2 CSP, थाना प्रभारी समेत अन्य को हुई थी सजा :

इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाने वालों में 2 तत्कालीन CSP और एक तत्कालीन थाना प्रभारी के अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं।



जग्गी हत्याकांड की टाइमलाइन :

2003- बिलासपुर में रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या


2003-04 - मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई


2004-05- सीबीआई ने अमित जोगी समेत 29 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट को सौंपी


- ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी करार दिया और अमित जोगी को बरी कर दिया


- सीबीआई ने अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की


- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा खोला गया


- 2026 में हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई,11 हजार पन्नों की चार्जशीट पर हुई सुनवाई


- अप्रैल 2026,हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया तीन सप्ताह में सरेंडर का आदेश



ये खबरें भी पढ़ें...

छत्तीसगढ़ के पहले सीएम अजीत जोगी के पुत्र अमित 23 साल बाद जेल जाएंगे, जग्गी हत्याकांड का जिन्न फिर निकला बाहर



रामावतार जग्गी हत्याकांड पर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई, अमित जोगी के वकील ने मांगा समय



जग्गी हत्याकांड हाईकोर्ट में रिओपन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुनवाई शुरू



Jaggi Murder Case : ढेबर ने सुप्रीम कोर्ट से ली मोहलत, आज किया सरेंडर



Tags:
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • Amit Jogi
  • अमित जोगी
  • रामावतार जग्गी हत्याकांड
  • Jaggi Murder Case
  • जग्गी हत्याकांड
  • जस्टिस रमेश सिन्हा