अमित जोगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, कपिल सिब्बल ने रखा पक्ष
रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। जिसपर आज सुनवाई हुई। अमित जोगी की तरफ से कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा है। जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को गलत बताया है। जिसमें अमित होगी को 3 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने कहा गया था। मामले में अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
उम्रकैद की सजा पर गिरफ्तारी नहीं
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में दो दशक बाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने के आरोप हों, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग या पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया जा सकता। हालांकि पिछले आदेश के मुताबिक अमित जोगी के पास अभी 3 सप्ताह का समय है। इस दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी। 3 सप्ताह का समय पूरा होने के बाद ही कोर्ट अगला निर्णय देगी।
क्या कहा हाईकोर्ट ने
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि यदि सभी आरोपियों के खिलाफ समान प्रकार के साक्ष्य मौजूद हैं, तो किसी एक को बरी करना और बाकी को उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी जोड़ा कि ऐसा तभी संभव है जब किसी आरोपी को अलग से राहत देने के लिए ठोस और विशिष्ट कारण मौजूद हों।
अमित जोगी को उम्रकैद:
कोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा हत्या और आपराधिक साजिश के तहत दोषी ठहराया। इसके तहत उन्हें उम्रकैद के साथ 1000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त 6 महीने की सजा भुगतनी होगी। यह फैसला लंबे समय से लंबित इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इससे पहले हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी माना था और तीन सप्ताह में सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।
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