नक्सल खत्म हुआ, अब निशानियां मिटाएंगे, अमित शाह बोले, कांग्रेस ने बस्तर को कुछ नहीं दिया

Arun Tiwari | Oct 15, 2026, 21:44 IST
बस्तर में नक्सल हिंसा के जख्म मिटाने की तैयारी।
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर में दशकों तक चली नक्सली हिंसा के बाद अब सरकार के सामने पीड़ितों की जिंदगी संवारने और विकास की नई इबारत लिखने की चुनौती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि नक्सलवाद समाप्त हो गया है, लेकिन इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा और उसके निशान मिटाना अभी बाकी है।

सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का खात्मा करना नहीं, बल्कि हिंसा के शिकार लोगों को सम्मानजनक जीवन देना और बस्तर को फिर से खुशहाल बनाना है। इसी कड़ी में बस्तर के 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इन केंद्रों से अब सुरक्षा के साथ जुड़ी भूमिका की जगह जनसेवा, रोजगार और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।



वीडियो कांफ्रेंसिंग में बोले अमित शाह

अमित शाह ने दंतेवाड़ा में आयोजित दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए। 15 से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 हितग्राही शामिल हैं।




आईईडी विस्फोटों ने छीने हाथ-पैर, अब पुनर्वास की चुनौती

अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा ने बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरे घाव दिए हैं। नक्सलियों ने आईईडी विस्फोटों के जरिए अनेक निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बना दिया। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए आम लोगों को इस तरह की पीड़ा देना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी पांच दशकों की पीड़ा अपने आप खत्म नहीं हो जाएगी। प्रभावित लोगों को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे। दिव्यांगजनों को कृत्रिम हाथ-पैर, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और स्मार्ट वॉकिंग स्टिक जैसे उपकरण उपलब्ध कराना इसी दिशा में एक कदम है।




इससे पहले 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें बस्तर जिले के 1,570 से अधिक लोग शामिल थे। अब दूसरे चरण में तीन जिलों के 768 लोगों को सहायता दी जा रही है।



8,526 आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास का दावा

गृह मंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा भी दिया। उनके मुताबिक, लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई है। वहीं, 455 लोगों को नौकरी और 129 लोगों को जमीन आवंटित की गई है।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए और 2,808 परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई गई है।




क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और 44 पंचायतों को इलवाद पंचायत पुरस्कार के तहत सम्मानित किया गया है। सरकार का उद्देश्य इन प्रयासों के जरिए नक्सल प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।



जहां सुरक्षा बल तैनात थे, वहां अब सरकारी योजनाओं का लाभ

बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 500 से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे। अब इनमें से 200 से अधिक शिविरों को सेवा केंद्रों में बदलने की योजना है। अमित शाह ने कहा कि जिन स्थानों पर कभी सुरक्षा बलों के जवान लोगों की रक्षा के लिए तैनात रहते थे, वहां अब केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी बैठकर विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे।



मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सेवा डेरों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल विकास और आजीविका से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इससे युवाओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।




शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया जा चुका है। यहां सिलाई-कढ़ाई के प्रशिक्षण के साथ जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं। आने वाले समय में अन्य केंद्रों पर भी स्थानीय संसाधनों के आधार पर रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे।

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