रायपुर से Dial-112 सेवा शुरू, अमित शाह ने दिखाई 400 इमरजेंसी वाहनों को हरी झंडी

Arun Tiwari | May 18, 2026, 12:53 IST
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन CG Dial-112 सेवा’ का शुभारंभ किया। ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर शुरू की गई इस हाईटेक आपातकालीन सेवा के तहत 400 आधुनिक डायल-112 वाहनों को रवाना किया गया।

Raipur. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को रायपुर के माना पुलिस परेड ग्राउंड में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन CG Dial-112 सेवा’ और मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव से और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में 400 आधुनिक डायल-112 वाहनों और 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।



एक्के नंबर, सब्बो बर:

राज्य सरकार ने इस नई आपातकालीन सेवा को ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम के साथ शुरू किया है। इसका उद्देश्य पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सहायता जैसी सभी आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत कर नागरिकों तक त्वरित मदद पहुंचाना है। अब प्रदेश के लोग एक ही नंबर के माध्यम से सड़क दुर्घटना, आगजनी, अपराध या अन्य आपात स्थितियों में तुरंत सहायता प्राप्त कर सकेंगे।



नई तकनीकों से लैस डायल 112:

नई डायल-112 सेवा के तहत शुरू किए गए वाहनों को आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इनमें स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम, मोबाइल एनवीआर और सोलर बैकअप जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन तकनीकों की मदद से घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग, रियल टाइम ट्रैकिंग और तेज संचार संभव हो सकेगा।



24 घंटे सेवा:

सेवा को 24 घंटे और सातों दिन संचालित किया जाएगा। इसमें जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग, एसआईपी ट्रंक टेक्नोलॉजी और ऑटोमैटिक कॉलर लोकेशन पहचान जैसी हाईटेक सुविधाएं दी गई हैं। राज्य के सभी 33 जिला समन्वय केंद्रों को इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। नागरिक वॉयस कॉल, एसएमएस, ईमेल, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, चैटबॉट और SOS-112 इंडिया ऐप के जरिए भी मदद मांग सकेंगे।



मोबाइल फोरेंसिक लैब शुरू:

कार्यक्रम के दौरान ‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ थीम पर आधारित 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन भी लॉन्च की गईं। “32 वैन - 32 जिले - एक संकल्प: सटीक जांच, त्वरित न्याय” के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल अपराध अनुसंधान प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।



करीब 65 लाख रूपए लागत वाली प्रत्येक फॉरेंसिक वैन में घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण और सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, हाई क्वालिटी फोटोग्राफी सिस्टम, बैलिस्टिक जांच किट और गनशॉट रेजिड्यू (GSR) टेस्टिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच और डिजिटल दस्तावेजीकरण संभव हो सकेगा।



ज्यादा सटीक जांच:

अब तक अपराध स्थल से साक्ष्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में देरी और साक्ष्यों के दूषित होने की आशंका बनी रहती थी। नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के जरिए मौके पर ही साक्ष्य संरक्षण और जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी, जिससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार आएगा। राज्य सरकार का कहना है कि इस पहल से साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली को मजबूती मिलेगी, अपराध नियंत्रण में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका बढ़ेगी और लोगों का कानून व्यवस्था व न्याय प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होगा।



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