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News in short
- डायल 112 प्रोजेक्ट में सॉफ्टवेयर गड़बड़ी का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
- 972 करोड़ के भारी-भरकम वाहन टेंडर पर हाई कोर्ट ने हैरानी जताई है।
- 30 किलोमीटर दूर खड़ी गाड़ियों को डायल 112 के कॉल पहुंच रहे हैं।
- 5400 प्राइवेट कर्मचारी को पुलिस विभाग भुगतान कर रहा है। इसका खुलासा कोर्ट में हुआ है।
- पुलिस विभाग के नए कॉन्ट्रैक्ट पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।
News in detail
मध्य प्रदेश में इमरजेंसी रिस्पांस और पुलिस सहायता के लिए शुरू हुए डायल 112 प्रोजेक्ट को अभी 1 साल भी पूरा नहीं हुआ है। लेकिन, उसके कॉल सेंटर पर कॉल रिसीव होने से लेकर उसके समाधान के लिए जिम्मेदार CAD (Computer Aided Dispatch) सॉफ्टवेयर का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है।
दरअसल, पुलिस विभाग के अनुसार जिस कंपनी को टेंडर दिया गया था, उनका सॉफ्टवेयर ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा है। इसके चलते ही पुराने टेंडर को कैंसिल किए बिना विभाग ने एक नया टेंडर जारी कर दिया। यही मामला विवाद की जड़ बन गया।
दे दिया दूसरी कंपनी को टेंडर
डायल 112 प्रोजेक्ट का टेंडर 972 करोड़ रुपए में EMRI (Emergency Management and Research Institute) ग्रीन सॉल्यूशंस को मिला था। इसमें डायल 112 की गाड़ियों से लेकर उसमें लगे उपकरण और कॉल सेंटर के सेटअप सहित कर्मचारी भी उपलब्ध कराने थे। पिछले दिनों यह सामने आ रहा था कि 112 पर कॉल आने के बाद 25 से 30 किलोमीटर दूर खड़ी गाड़ियों को कॉल अटेंड करने का मैसेज पहुंच रहा था।
यानी सॉफ्टवेयर में बड़ी शिकायतें आने लगी। ऐसे में पुलिस विभाग ने एक नया टेंडर जारी करते हुए CAD सॉफ्टवेयर का पूरा काम एक नई कंपनी को दे दिया। इसके बाद पिछली कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
972 करोड़ में 1200 गाड़ियों पर कोर्ट ने जताई हैरानी
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि CAD सॉफ्टवेयर के ऑपरेशन के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 6 करोड़ 29 लाख रुपए है। इसी दौरान 1200 वाहनों के प्रोजेक्ट टेंडर की लागत 972 करोड़ रुपए होने की बात सामने आई है। इसके चलते डिविजनल बेंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या आप डायल 112 में मर्सिडीज कार चला रहे हैं?
हालांकि सरकार की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया कि इस राशि में केवल वाहन ही नहीं, बल्कि उनमें लगने वाले उपकरण, सॉफ्टवेयर, डेटा सेंटर इक्विपमेंट और अन्य तकनीकी संरचना भी शामिल है। फिर भी कोर्ट ने यह भी पूछा कि इतने बड़े प्रोजेक्ट का मुख्य तकनीकी हिस्सा मात्र 6 करोड़ का कैसे हो सकता है।
एक दूसरे पर लगा रहे सुस्ती का आरोप
याचिकाकर्ता कंपनी EMRI ग्रीन हेल्थ सर्विसेज को 12 मार्च 2025 की निविदा के आधार पर 30 मई 2025 को सिस्टम इंटीग्रेटर के रूप में वर्क ऑर्डर मिला था। कंपनी का दावा है कि 4 सितंबर 2025 से उसने 1200 गाड़ियों के साथ सफलतापूर्वक सेवाएं शुरू कर दी थीं। कॉल हैंडलिंग छह हजार 281 से बढ़कर नौ हजार 408 प्रतिदिन हो गई। लेकिन, 31 दिसंबर 2025 को विभाग ने एक नई निविदा जारी कर दी। इसमें CAD सिस्टम को अलग से टेंडर किया गया।
कंपनी का आरोप है कि यह कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन है। पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए शर्तों में ढील दी गई। इस मामले में पुलिस विभाग से सॉफ्टवेयर गलती बता रहा है तो EMRI सर्विसेज का आरोप है कि पुलिस कर्मी जानकर केस को जल्द बंद नहीं करते। इसके कारण रिस्पांस में देरी हो रही है।
पुलिस ने गिनाई ये खामियां
पुलिस विभाग के अनुसार अभी उपयोग हो रहा CAD सॉफ्टवेयर तकनीकी रूप से सही काम नहीं कर रहा है। कॉल आने पर आसपास की FRV (First Response Vehicle) के बजाय 30 किलोमीटर दूर की FRV को मैसेज चला जाता है।
वहीं कंपनी का कहना है पुलिस कर्मी जानबूझकर कॉल को बंद नहीं करते। इसके कारण उनकी FRV व्यस्त बताती है और दूर की FRV को मैसेज जाता है। इसी आधार पर पुलिस विभाग ने CAD सॉफ्टवेयर के पूरे ऑपरेशन का टेंडर 6 करोड़ 29 लाख 80 हजार रुपए में नोएडा की NIRASYS इन्फोटेक को दे दिया गया।
पुलिस पर दबंगई के आरोप, बनवा लिया कैंटीन और कॉन्फ्रेंस हॉल
EMRI की ओर से आरोप लगाया गया है कि पुलिस डिपार्टमेंट में उससे ऐसे काम भी करवा लिए, जो टेंडर का हिस्सा ही नहीं थे। जैसे 1200 FRP वाहनों में अतिरिक्त फिटिंग, रेट्रोफिटिंग, और यहां तक कि कॉन्फ्रेंस हॉल निर्माण, कैंटीन नवीनीकरण जैसे काम भी करवाए। कंपनी का दावा है कि कुल 97 करोड़ के खर्च में से 54 करोड़ का ही पेमेंट किया गया है और 42 करोड़ रुपए रोक लिए गए हैं।
5400 कर्मचारी, वेतन पुलिस से
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी ने पुलिस विभाग को पांच हजार 400 कर्मचारी उपलब्ध कराए हैं। इन कर्मचारियों का वेतन मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 16 हजार रुपए प्रति व्यक्ति दिया जाता है। निविदा की शर्तों के अनुसार EMRI सर्विसेज को 112 गाड़ियों के ड्राइवर सहित कॉल सेंटर के लिए तकनीकी स्टाफ भी देना था।
वहीं, कोर्ट में यह बात सामने आई कि कंपनी के जरिए दिए गए कुल पांच हजार 400 के स्टाफ की सैलरी पुलिस विभाग कर रहा है। कोर्ट ने इस व्यवस्था पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में फाइनेंशियल मैनेजमेंट किस प्रकार काम कर रही है।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस 972 करोड़ के प्रोजेक्ट की डिटेल जानना चाहते हैं। हालांकि यह याचिका का विषय नहीं था इसलिए डिविजनल बेंच ने फिलहाल 31 दिसंबर 2025 के नए टेंडर से होने वाले सॉफ्टवेयर पर रोक लगा दी है।
सरकार को एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने और CAD सॉफ्टवेयर की डे-टू-डे परफॉर्मेंस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई तक न तो नया सॉफ्टवेयर लागू होगा और न ही नई निविदा के तहत कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
19 फरवरी को सरकार को देना है जवाब
अब निगाहें सरकार के जवाब और परफॉर्मेंस रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि कोर्ट को तकनीकी खामियां गंभीर प्रतीत होती हैं तो परियोजना का ढांचा बदल सकता है। वहीं यदि कंपनी के आरोप सही पाए गए तो पूरी निविदा प्रक्रिया पर सवाल खड़ा हो सकता है।
हस्तक्षेप याचिका हो सकती है दायर
डायल 112 जैसी संवेदनशील आपातकालीन सेवा से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ अनुबंध विवाद नहीं, बल्कि पब्लिक मनी के इस्तेमाल की पारदर्शिता का भी मुद्दा बन चुका है। जानकारी के अनुसार अब इस मामले में हस्तक्षेप याचिका (इंटरवेंशन) भी दायर होने वाली है।
इसके बाद इस 972 करोड़ रुपए और डायल 112 के लिए किराए पर ली गई गाड़ियों का स्पेसिफिकेशन मांगा जाएगा। हस्तक्षेप याचिका दायर होने के बाद कोर्ट क्या करेगा, यह देखना होगा।
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