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Raipur. छत्तीसगढ़ के दो सरकारी महकमे एक ही कंपनी पर फिदा हो गए हैं। अब इस कंपनी में कौन सा हरा रंग लगा है यह तो सरकार के ये विभाग ही बता सकते हैं। हैरानी की बात तो देखिए कि इस कंपनी को कांट्रेक्ट देने के लिए तीन तीन बार टेंडर कॉल किए गए। तीन बार टेंडर के बाद इस कंपनी को दोनों विभागों ने काम देने की तैयारी कर ली है।
यह दो विभाग हैं हेल्थ और होम यानी स्वास्थ्य और गृह विभाग। स्वास्थ्य की संजीवनी 108 और पुलिस की डायल 112 दोनों का टेंडर इसी कंपनी के हवाले हो रहा है। अब यहां पर सवाल है कि आखिर इस कंपनी पर यह दोनों विभाग क्यों मेहरबान हैं।
एक कंपनी पर फिदा दो विभाग:
एक ही कंपनी पर सरकार के दो विभाग मेहरबान हैं। इसको ठेका देने के लिए तीन बार टेंडर कॉल किए गए। टेंडर की शर्तें बदली गईं और सब कुछ ऐसा रखा गया जो इस कंपनी के माफिक हो। यह कंपनी है ईएमआआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज । इस पर जो दो विभाग मेहरबान हैं वे हैं स्वास्थ्य और गृह यानी पुलिस।
स्वास्थ्य विभाग की संजीवनी 108 और पुलिस की डायल 112, इन दोनों गाड़ियों को चलाने का काम एक ही एजेंसी को देने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग ने तीसरा टेंडर बुलाकर उसमें भाग लेने वाली इकलौती ईएमआआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज को कांट्रेक्ट देने का काम तय कर दिया है। वहीं पुलिस की डायल 112 की गाड़ियां चलाने का काम भी EMRI ग्रीन हेल्थ सर्विसेज हेल्थ सर्विसेज के हवाले किया जा रहा है।
सवाल यही है कि आखिर एक ही एजेंसी को यह काम क्यों दिया जा रहा है जबकि टेंडर में और भी योग्य कंपनियों ने भाग लिया था। उन कंपनियों को बाहर कर शर्तें इसी कंपनी के मुताबिक बना दी गईं और इसको काम देने की तैयारी कर ली गई।
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यह है डायल 112 की कहानी :
लंबे समय से अटका पड़ा डायल 112 का टेंडर पुलिस मुख्यालय ने फायनल कर दिया है। यह टेंडर करीब 300 करोड़ में जीवीके ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज को दिया गया है। पुलिस मुख्यालय की कमेटी ने इसे फायनल कर दिया है।
400 नई बुलेरो को अब डायल 112 में चलाया जाएगा। इस कंपनी को अब तक सिर्फ एंबुलेंस संचालन का अनुभव है। पहली बार पुलिस संबंधित इमरजेंसी गाड़ियों के संचालन का ​का जिम्मा कंपनी को मिला है। टेंडर में से पुलिस की गाड़ियां चलाने के अनुभव की अनिवार्यता की शर्त हटा दी गई थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अक्टूबर में डायल-112 और हाइवे पेट्रोलिंग की गाड़ियां चलाने के लिए टेंडर जारी किया गया था। इसमें 7 कंपनियां शामिल हुई थीं। इनमें से ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज और डेनेब एंड पोलक्स टूर एंड ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड को शॉर्टलिस्ट किया गया था।
इस तरह जारी हुए टेंडर :
- पहला टेंडर 12 जून 2023 को कॉल किया गया। इसमें तीन कंपनियों ने भाग लिया। टीसीआईएल एंड सम्मान फाउंडेशन, जेडएचएल और वीटीएल ने इस टेंडर में भाग लिया। पर्याप्त पात्रता न होने का कारण बताकर यह टेंडर निरस्त कर दिया गया।
- दूसरी निविदा 14 मार्च 2024 को कॉल किया गया। इस टेंडर में 5 कंपनियों ने भाग लिया। इसमें बीवीजी, सीएमएस, टीसीआईएल, वीटीएल और जेडएचएल शामिल थीं। इस टेंडर को भी सरकार ने रद्द कर दिया।
- तीसरा टेंडर 3 अक्टूबर 2025 को निकाला गया। इसमें दो कंपनियों ने भाग लिया। इसमें ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज और डेनेब एंड पोलक्स टूर्स एंड ट्रेवल्स प्रालि शामिल थीं। गृहमंत्री विजय शर्मा कहते हैं कि कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। लेकिन सूत्रों की मानें तो ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज को टेंडर फायनल कर दिया गया है।
हेल्थ की गाड़ी भी ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ के हवाले :
स्वास्थ्य विभाग के संजीवनी 108 के ठेका देने में भी वही कंपनी पंसद आई जो डायल 112 का संचालन करने जा रही है। मेडिकल कार्पोरेशन ने अपनी चहेती एजेंसी का टेंडर पास करने के लिए सारे नियम बदल डाले। दो टेंडर रद्द करने के बाद मेडिकल कार्पोरेशन ने तीसरा नया टेंडर निकाला।
इस टेंडर में एक एक शर्तें ऐेसी थी जो चहेती कंपनी के लिए ही बनाई गई थीं। तीसरे टेंडर में एक ही बोलीदाता कंपनी आई जोकि कार्पोरेशन चाहता था। इस एक ही बोलीदाता को एलिजिबिल मानते हुए प्रक्रिया पूरी करने के लिए आगे बढ़ा दी गई। यानी पूरे रास्ते पर रेड कार्पेट बिछाते हुए अपनी चहेती कंपनी की संजीवनी एक्सप्रेस दौड़ा दी गई।
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यह है तीन टेंडरों की कहानी :
- पहला टेंडर : पहला टेंडर 9 अप्रैल 2025 को निकाला गया। इसमें 15 बोलीदाताओं ने प्री-बिड मीटिंग में हिस्सा लिया और शर्तों पर आपत्ति जताई, लेकिन CGMSC ने सभी को नजरअंदाज कर दिया। केवल 5 बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया। तकनीकी मूल्यांकन में 92 अंक पाने वाली CAMP प्रथम, EMRI Green 87 अंक के साथ द्वितीय और Jai Ambey 78 अंक के साथ तृतीय रही।
CAMP को अनुबंध मिलना तय था। लेकिन वित्तीय बोलियां खोलने से पहले CGMSC ने “तकनीकी कारणों” का हवाला देकर निविदा रद्द कर दी।
- दूसरा टेंडर : दूसरा टेंडर 11 जुलाई 2025 को निकाला गया। CGMSC ने शर्तें इस तरह बदलीं कि खास कंपनी को सीधा फायदा पहुंचे। ये शर्तें केवल खास कंपनी के अनुकूल थीं। 7 संस्थाओं ने प्री-बिड में आपत्ति जताई, लेकिन विभाग द्वारा सभी की आपत्ति अनसुनी कर दी गई। केवल खास कंपनी ने सिर्फ बोली लगाई। फिर से 22 सितंबर 2025 को निविदा रद्द कर दी गई।
- तीसरा टेंडर 24 सितंबर 2025 को बुलाया गया। इसमें EMRI Green को फायदा पहुंचाने वाली शर्तें रखी गईं। 8 संस्थाओं ने प्री-बिड में आपत्ति जताई, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ। 16 अक्टूबर 2025 को केवल EMRI Green ने बोली लगाई। इस कंपनी के अनुरूप बनाई गई नियम और शर्तों ने बाकी कंपनियों को बोली लगाने से बाहर कर दिया गया।
CGMSC अब एकमात्र बोली को स्वीकार कर इसको ठेका देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। जबकि नए टेंडर में सिंगल बिडर की बोली नहीं खोली जाती और फिर से टेंडर बुलाया जाता है।
ये रिश्ता क्या कहलाता है :
अब सवाल उठता है कि ये रिश्ता क्या कहलाता है। ईएमआआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज में ही वो हरा रंग लगा हुआ जो दोनों विभागों को यही कंपनी पसंद आई। जिसको हेल्थ की गाड़ियां चलाने का अनुभव है उसी को पुलिस की गाड़ियों का स्टेयरिंग थमा दिया गया। बात यह नहीं है कि इस कंपनी को टेंडर क्यों मिला बल्कि आपत्ति यह है कि इसी कंपनी को टेंडर देने के लिए तीन बार टेंडर कॉल किए गए और शर्तें भी ऐसी रखी गईं जो सिर्फ यही कंपनी पूरी करती है।
तो सवाल तो उठना लाजिमी है। छत्तीसगढ़ राज्य मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन के अध्यक्ष दीपक म्हस्के कहते हैं कि संजीवनी 108 का टेंडर नियमानुसार किया गया है। यह तीसरा टेंडर है जिसमें एक बोलीकर्ता को भी टेंडर दिया जा सकता है। फिर भी यदि टेंडर प्रक्रिया के संबंध में कोई शिकायत करता है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
स्वास्थ्यमंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि पहले टेंडर के दस्तावेज के कुछ खंड में अस्पष्टता और विसंगति के कारण उसे निरस्त किया गया। दूसरे टेंडर में एक ही बोलीकर्ता होने के कारण रद्द किया गया। तीसरे टेंडर में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
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