छत्तीसगढ़ के इस अभयारण्य में आएंगे 50 काले हिरण, जंगल सफारी की तैयारी, स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
Umeshwari Baghel | Oct 13, 2026, 20:09 IST
अब गोमर्डा में होगी जंगल सफारी!
सारंगढ़-बिलाईगढ़।छत्तीसगढ़ के वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य में अब 50 काले हिरण लाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने इसके प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार की इस पहल से अभयारण्य में वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही जंगल सफारी और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पर्यटन बढ़ने से आसपास के गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
गोमर्डा अभयारण्य में काले हिरणों को लाने का फैसला राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठक में लिया गया। नवा रायपुर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता वन मंत्री केदार कश्यप ने की। बैठक में अभयारण्य के विकास और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इसी दौरान गोमर्डा में 50 काले हिरण स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
इस फैसले के बाद वन विभाग हिरणों को अभयारण्य में लाने की आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। हालांकि हिरणों को कब और कहां से लाया जाएगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभयारण्य में पहले भी काले हिरणों को उनके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की पहल की जा चुकी है। इस प्रयोग को सफल बताया गया है। इसी अनुभव के आधार पर अब गोमर्डा अभयारण्य में भी काले हिरणों को बसाने की तैयारी है।
वन विभाग का उद्देश्य अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना है। काले हिरणों के आने से यहां जैव विविधता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।हालांकि हिरणों को नए वातावरण में बसाने के लिए उनके भोजन, पानी और सुरक्षा की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य अपनी हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां के जंगल और वन्यजीव प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।अब काले हिरणों को लाने की मंजूरी मिलने से इस अभयारण्य को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की उम्मीद बढ़ गई है। आने वाले समय में यहां जंगल सफारी की सुविधाओं का विस्तार किया जा सकता है।
अगर सफारी और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित होती हैं तो पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलेगा। इससे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है।
गोमर्डा अभयारण्य में पर्यटन बढ़ने का फायदा आसपास के गांवों को भी मिल सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।युवाओं को पर्यटक गाइड, वाहन चालक और परिवहन सेवाओं में काम मिल सकता है। वहीं गांवों में छोटे होटल, भोजनालय और होमस्टे जैसी सुविधाएं शुरू होने की संभावना बढ़ेगी।
स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीण कारोबारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। पर्यटकों के आने से स्थानीय सामान की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि रोजगार के ये अवसर पर्यटन सुविधाओं के विकास और पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर करेंगे।
पर्यटन के विस्तार से गांवों में काम कर रहे महिला स्वसहायता समूहों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं। महिलाएं स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद तैयार कर पर्यटकों को बेच सकती हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा ग्रामीण परिवार अपने घरों में ठहरने की सुविधा देकर भी आय का नया साधन शुरू कर सकते हैं। इससे स्थानीय संस्कृति और खानपान को भी पहचान मिलेगी।
गोमर्डा अभयारण्य को बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए जरूरी सुविधाओं पर भी ध्यान देना होगा। पर्यटकों के लिए अच्छी सड़कें, साफ पानी, शौचालय, सुरक्षा और मार्गदर्शन केंद्र जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होंगी। इसके लिए वन विभाग और जिला प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ की कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के नेतृत्व में जिला प्रशासन विकास कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार में प्रशासन की भूमिका अहम हो सकती है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को गाइड और पर्यटन सेवाओं से जुड़ा प्रशिक्षण देने की जरूरत होगी। इससे उन्हें अपने ही जिले में काम करने के अवसर मिल सकेंगे।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ छत्तीसगढ़ का नया जिला है। इसका गठन पूर्ववर्ती रायगढ़ और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलों के क्षेत्रों को मिलाकर किया गया था। प्राकृतिक संसाधनों और जंगलों के कारण इस जिले में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। अब गोमर्डा अभयारण्य में 50 काले हिरणों को लाने की मंजूरी से इन संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी आगे बढ़ाना चाहती है। इससे स्थानीय कारोबार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है। फिलहाल 50 काले हिरणों को लाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। अब देखना होगा कि इन्हें अभयारण्य में कब तक बसाया जाता है और जंगल सफारी की सुविधाएं कितनी जल्दी विकसित होती हैं।
वन्यजीव बोर्ड की बैठक में मिली मंजूरी
इस फैसले के बाद वन विभाग हिरणों को अभयारण्य में लाने की आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। हालांकि हिरणों को कब और कहां से लाया जाएगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बारनवापारा के बाद अब गोमर्डा की बारी
वन विभाग का उद्देश्य अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना है। काले हिरणों के आने से यहां जैव विविधता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।हालांकि हिरणों को नए वातावरण में बसाने के लिए उनके भोजन, पानी और सुरक्षा की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
पर्यटकों के लिए बढ़ेगा आकर्षण
अगर सफारी और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित होती हैं तो पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलेगा। इससे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है।
गांवों में रोजगार के खुलेंगे रास्ते
स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीण कारोबारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। पर्यटकों के आने से स्थानीय सामान की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि रोजगार के ये अवसर पर्यटन सुविधाओं के विकास और पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर करेंगे।
महिला समूहों को भी मिल सकता है फायदा
इसके अलावा ग्रामीण परिवार अपने घरों में ठहरने की सुविधा देकर भी आय का नया साधन शुरू कर सकते हैं। इससे स्थानीय संस्कृति और खानपान को भी पहचान मिलेगी।
पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाना जरूरी
सारंगढ़-बिलाईगढ़ की कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के नेतृत्व में जिला प्रशासन विकास कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। पर्यटन सुविधाओं के विस्तार में प्रशासन की भूमिका अहम हो सकती है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को गाइड और पर्यटन सेवाओं से जुड़ा प्रशिक्षण देने की जरूरत होगी। इससे उन्हें अपने ही जिले में काम करने के अवसर मिल सकेंगे।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ को मिलेगी नई पहचान
राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी आगे बढ़ाना चाहती है। इससे स्थानीय कारोबार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है। फिलहाल 50 काले हिरणों को लाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। अब देखना होगा कि इन्हें अभयारण्य में कब तक बसाया जाता है और जंगल सफारी की सुविधाएं कितनी जल्दी विकसित होती हैं।
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