शराब दुकान प्रिंटर टेंडर फर्जीवाड़े में एसेंट टेक्नोलॉजीज पर लगा प्रतिबंध
NEWS IN SHORT
- सीएसएमसीएल ने ब्लूटूथ प्रिंटर खरीदी टेंडर में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा।
- गलत दस्तावेज देने पर एसेंट टेक्नोलॉजीज को एक साल का प्रतिबंध।
- सत्यापन के दौरान टर्नओवर सर्टिफिकेट और UDIN में अंतर मिला।
- फर्म ने गलती स्वीकारते हुए पूरा दोष सीए पर मढ़ा।
- दोबारा गड़बड़ी करने पर सीधे तीन साल का बैन लगेगा।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की सरकारी शराब दुकानों के लिए ब्लूटूथ ऑपरेटेड प्रिंटर की खरीदी के टेंडर में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) ने टेंडर प्रक्रिया में गलत और भ्रामक दस्तावेज पेश करने के आरोप में एमएस एसेंट टेक्नोलॉजी (M/S Ascent Technologies) को आगामी सभी निविदाओं से एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) कर दिया है।
कैसे खुला फर्जीवाड़े का खेल?
सीएसएमसीएल द्वारा शराब दुकानों के लिए ब्लूटूथ प्रिंटर की खरीदी हेतु गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM Portal) के जरिए निविदा आमंत्रित की गई थी। 29 नवंबर 2025 को जब टेंडर खोले गए, तो उसमें कुल 5 फर्मों ने हिस्सा लिया था। हालांकि, तकनीकी और पात्रता शर्तों की कड़ाई से जांच करने पर कोई भी फर्म मानदंडों पर खरी नहीं उतरी।
इसी जांच के दौरान एसेंट टेक्नोलॉजीज द्वारा जमा किया गया चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) का टर्नओवर प्रमाण-पत्र बेहद संदिग्ध पाया गया। जब विभाग ने फर्म के टर्नओवर सर्टिफिकेट और उसके यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) का सत्यापन (Verification) कराया, तो दोनों में भारी अंतर मिला।
सुनवाई में खुली पोल, सीए पर मढ़ा दोष
दस्तावेजों में हेरफेर पकड़े जाने के बाद निगम ने फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसके बाद 18 मई को सीएसएमसीएल के प्रबंध संचालक (MD) पीएस एल्मा ने इस मामले में एक मौखिक सुनवाई रखी।
माफीनामा खारिज: सुनवाई के दौरान फर्म के प्रतिनिधि आनंद सुहाने ने यह बात स्वीकार की कि टर्नओवर सर्टिफिकेट में दी गई जानकारियां गलत थीं। हालांकि, खुद को बचाने के लिए उन्होंने इस पूरे फर्जीवाड़े का ठीकरा अपने सीए (CA) पर फोड़ दिया और इसे 'सीए की गलती' बताते हुए माफी मांगी। लेकिन निगम ने इस दलील और माफीनामे को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
दोबारा गलती की तो 3 साल का लगेगा बैन
प्रबंध संचालक पीएस एल्मा द्वारा जारी आदेश के तहत एसेंट टेक्नोलॉजीज पर न सिर्फ एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है, बल्कि उसे भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी (अल्टीमेटम) भी दी गई है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि फर्म ने भविष्य में दोबारा कभी भी किसी टेंडर में गलत, भ्रामक या फर्जी जानकारी देने का प्रयास किया, तो जनरल फाइनेंशियल रूल (GFR) 2017 के तहत उसे सीधे 3 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर बाहर कर दिया जाएगा। इस सख्त कार्रवाई से सरकारी टेंडरों में हेरफेर करने वाली अन्य कंपनियों को भी कड़ा संदेश गया है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) द्वारा की गई यह कार्रवाई सरकारी निविदाओं में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे टेंडर हथियाने की कोशिशों पर ऐसी सख्त कार्रवाई से अन्य कंपनियों को कड़ा संदेश जाएगा कि जालसाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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