एमपी में शराब दुकानों का आवंटन शुरू, 55 जिलों में 1200 दुकानों के लिए ई-टेंडर

मध्य प्रदेश में शराब दुकानों का आवंटन शुरू हो गया है। प्रदेश के 55 जिलों में 1200 शराब की दुकानों के लिए ई-टेंडर निकाले गए हैं। हालांकि, भोपाल समेत 5 जिलों में अभी तक एक भी टेंडर नहीं आया है।

author-image
Anjali Dwivedi
New Update
alcohol-store-allocation-madhya-pradesh-tender-2026

News In Short

  • एमपी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों का बंटवारा शुरू किया है।
  • पहले चरण में प्रदेश के 55 जिलों में 1200 शराब दुकानों के लिए ई-टेंडर बुलवाए गए हैं।
  • भोपाल समेत पांच जिलों में एक भी टेंडर नहीं आया है।
  • शराब दुकानों के आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।
  • नई नीति में शराब दुकानों को छोटे समूहों में बांटने का निर्णय लिया गया है।

News In Detail

भोपाल समेत 5 जिलों में एक भी टेंडर नहीं आया

2 मार्च, सोमवार को जब टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख खत्म हुई, तो शाम 6 बजे टेंडर खोले गए। इसके बाद पता चला कि भोपाल समेत प्रदेश के पांच जिलों- नीमच, अलीराजपुर, अनूपपुर और मुरैना में एक भी टेंडर नहीं आया।

खास बात ये है कि भोपाल में 87 शराब की दुकानों के लिए 20 ग्रुप बनाए गए थे। इनकी रिजर्व प्राइज 1431 करोड़ रुपए रखी गई थी, लेकिन इन दुकानों के लिए किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई।

भोपाल में टेंडर न आने का कारण

मध्य प्रदेश के भोपाल में टेंडर न आने की वजह ये है कि पिछले साल कुछ दुकानों पर महंगी शराब बेची गई थी। उस पर विभाग का कोई नियंत्रण नहीं था। इसके अलावा, आसपास के जिलों जैसे रायसेन और विदिशा से अवैध तरीके से शराब भोपाल लाई गई। पिछले 9 महीनों में बड़े ग्रुप्स की मोनोपॉली हावी रही, जिससे विभाग निष्क्रिय हो गया और इस बार ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई।

शराब दुकानों की नीलामी के तीन चरण

शराब दुकानों की नीलामी तीन चरणों में की जा रही है। पहले चरण की ई-टेंडर प्रक्रिया 27 फरवरी को शुरू हुई थी और 2 मार्च तक ऑफलाइन टेंडर लोड और ऑफर सबमिट किए गए थे। भोपाल में हालांकि एक भी टेंडर नहीं आया। दूसरे चरण की प्रक्रिया 5 मार्च तक चलेगी, और तीसरे चरण में 7 मार्च को ई-टेंडर खोले जाएंगे।

इस बार शराब दुकानों के लिए आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है। प्रदेश के 55 जिलों के 926 समूहों के लिए 3 हजार 553 शराब की दुकानों की रिजर्व प्राइज 18591.37 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है।

नई नीति में बड़ा बदलाव

सरकार ने बड़ी शराब दुकानों की मोनोपॉली (Liquor monopoly) को खत्म करने के लिए दुकानों को छोटे समूहों में बांट दिया है। अब ठेकेदारों को सीधे नवीनीकरण की सुविधा नहीं मिलेगी और उन्हें खुली प्रतिस्पर्धा में भाग लेना होगा।

बड़े शहरों में ज्यादा कीमतें: भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैन में शराब दुकानों की कीमतें बढ़ी हैं।

नई आबकारी नीति के तहत, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में शराब दुकानों की कीमतें अन्य क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा रखी गई हैं, जो इन क्षेत्रों की मांग और बाजार क्षमता को दर्शाता है।

ये खबरें भी पढ़ें...

इंदौर में ये शराब दुकान सबसे महंगी, हर दिन इतने करोड़ की शराब पिएंगे इंदौरी

MP New Liquor Policy: ई-टेंडर से होगी शराब दुकानों की नीलामी, नहीं खुलेगी नई दुकान

दुबई से निकले इंदौर के पूर्व विधायक, बिजनेसमैन और उद्योगपति, मुंबई के लिए हुए रवाना

आईएएस रोहित सिसोनिया का निलंबन एक महीने बढ़ा, यह है वजह

Liquor monopoly आबकारी नीति भोपाल मध्य प्रदेश शराब दुकान
Advertisment