फूटा राखड़ बांध, नदी में घुला जहर और थमी बिजली
NEWS IN SHORT
- राखड़ बांध फूटने से प्रदूषण बढ़ा
- नदी में प्रदूषण का असर बढ़ा
- बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ
- तकनीकी खराबी से निस्तारण रुका
- जुर्माना और प्रशासनिक जांच जारी
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी कोरबा एक बार फिर प्रबंधन की बड़ी लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। हसदेव ताप विद्युत गृह (HTPS) के झाबु राखड़ बांध के फूटने से न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हुई है, बल्कि प्रदेश में बिजली का बड़ा संकट भी खड़ा हो गया है। हजारों टन जहरीली राख हसदेव नदी के जल में समा गई है, जिससे जीवनदायिनी नदी का पानी सफेद और विषैला हो चुका है।
दो इकाइयां ठप, 420 मेगावाट उत्पादन बंद
हादसे का सबसे सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। संयंत्र की 210-210 मेगावाट क्षमता वाली तीसरी और चौथी इकाइयां पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। कुल 420 मेगावाट उत्पादन ठप होने से राज्य को बिजली की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि यह कमी रायपुर जैसे बड़े शहर की कुल बिजली खपत के बराबर है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, एश हैंडलिंग सिस्टम और इंस्ट्रूमेंट एयर सिस्टम फेल होने के कारण इकाइयों को चालू करना फिलहाल संभव नहीं है।
नदी में घुला धीमा जहर
पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि राख में मौजूद लीड, क्रोमियम, कैडमियम और आर्सेनिक जैसे भारी तत्व हसदेव नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर रहे हैं। नदी का पानी जो पीने और कृषि के काम आता था, अब इंसानी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। नदी का रंग सफेद हो जाना जल प्रदूषण की भयावहता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
लापरवाही की कीमत: जुर्माना और जान की हानि
इस आपदा ने न केवल आर्थिक बल्कि मानवीय क्षति भी पहुंचाई है। जहां एक जेसीबी ऑपरेटर को इस हादसे में अपनी जान गंवानी पड़ी, वहीं प्रशासन की सुस्ती भी सवालों के घेरे में है। हालांकि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कड़ा रुख अपनाते हुए बिजली कंपनी पर 1 लाख 20 हजार रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाया है।
अधिकारी का बयान
"राखड़ बांध की मजबूती की जांच एनआईटी रायपुर की टीम से कराई जा रही है। जब तक राख की पाइपलाइन को सुरक्षित रूप से डिंडोलभाठा बांध तक नहीं जोड़ा जाता, तब तक इकाइयां बंद रहेंगी।" - प्रसन्ना सोनकर, क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी, कोरबा।
जवाबदेही पर सवाल
हादसे के 10 दिन बीत जाने के बाद भी किसी उच्च अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई नहीं होना विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। बार-बार होने वाली इन घटनाओं के बावजूद राखड़ निस्तारण के ठोस इंतजाम न होना "मैनेजमेंट फेल्योर" की ओर इशारा करता है। यदि समय रहते बांधों के रखरखाव और वैज्ञानिक निस्तारण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो कोरबा की पहचान 'ऊर्जाधानी' से बदलकर 'प्रदूषण की राजधानी' हो जाएगी।
निष्कर्ष
राखड़ बांध का फूटना कोरबा में गंभीर पर्यावरण और बिजली संकट का कारण बना। यह घटना बिजली उत्पादन और जल गुणवत्ता पर गहरा असर डाल रही है। प्रशासन को जल्द कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
यह खबरें भी पढ़ें...
कटघोरा में CSEB का राखड़ बांध टूटा, बहने लगा गांव तो जान बचाकर भागे ग्रामीण
ये प्यास है बड़ी: डूंगरी बांध से डूब जाएगी दिल्ली-मुंबई रेल लाइन, रेलवे ने जताई कड़ी आपत्ति
जबलपुर में बरगी बांध की नहर टूटी, आधा दर्जन गांवों में घुसा पानी; कई एकड़ की फसल जलमग्न