नए विधानसभा भवन की फॉल सीलिंग गिरी, उपयोगिता प्रमाण पत्र पर भी सवाल
छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन में दो दिन पहले फॉल सीलिंग गिरने की घटना सामने आई है। फॉल सीलिंग मुख्य हाल से लगे एक अधिकारी के कमरे की गिरी है। इसने भवन की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद अब एक आरटीआई जवाब ने इस मामले को और चर्चा में ला दिया है। सूचना के अधिकार के तहत लोक निर्माण विभाग (PWD) से हाल ही में मांगी गई जानकारी के जवाब में विभाग ने नए विधानसभा भवन का उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी। दोनों घटनाक्रमों ने नए विधानसभा भवन के निर्माण, सुरक्षा मानकों और भवन के औपचारिक प्रमाणन की प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
दो दिन पहले गिरी फॉल सीलिंग
नए विधानसभा भवन में दो दिन पहले फॉल सीलिंग गिरने की घटना सामने आई। घटना स्थल पर पहुंचे विधानसभा के ही एक अधिकारी ने बताया कि मुख्य हाल से लगे एक अधिकारी के कमरे की फॉल सीलिंग गिरी है। इसमें छत के अधिकांश हिस्से के साथ स्टील के पाइप भी गिरे हैं। हालत बहुत ही ख़राब थे। अगर उस वक्त कोई कमरे में बैठा होता तो अनहोनी हो सकती थी। अब इसे जल्द ही ठीक करवाया जा रहा है।
कमरे की हालत भयावह
इस घटना के बाद भवन में इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री और अंदरूनी हिस्सों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नए भवन में फॉल सीलिंग गिरने की नौबत क्यों आई और क्या निर्माण के दौरान और उसके बाद भवन के अलग-अलग हिस्सों की तकनीकी जांच नियमित रूप से की गई थी? हालांकि घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। घटना की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इस संबंध में विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा से भी बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया।
अब RTI के पुराने जवाब ने बढ़ाए सवाल
फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना के बीच अब उस आरटीआई जवाब की चर्चा हो रही है, जो लोक निर्माण विभाग ने पहले ही जारी किया था। आरटीआई कार्यकर्ता ने नए विधानसभा भवन के निर्माण के बाद जारी किए गए उपयोगिता प्रमाण पत्र समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां विभाग से मांगी थीं। लोक निर्माण विभाग, परियोजना मंडल-1, रायपुर के कार्यपालन अभियंता ने 17 जून 2026 को आरटीआई का जवाब दिया था। इसमें नए विधानसभा भवन का उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई थी। विभाग ने आरटीआई में मांगी गई कुछ अन्य जानकारियों के संबंध में भी बताया था कि संबंधित जानकारी अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है या उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
RTI में क्या-क्या पूछा गया था
आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश चौबे ने पीडब्लूडी से पूछा था की नए विधानसभा भवन का निर्माण पूरा होने के बाद क्या उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी किया गया है। यदि प्रमाण पत्र जारी किया गया है तो उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इसके अलावा भवन में विधानसभा सत्र आयोजित करने की अनुमति, अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण-पत्र यानी फायर एनओसी और भवन से संबंधित अन्य तकनीकी स्वीकृतियों की जानकारी भी मांगी गई थी।
लेकिन विभाग के जवाब में उपयोगिता प्रमाण पत्र की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। अब, जब भवन में फॉल सीलिंग गिरने की घटना सामने आई है, तो उपयोगिता प्रमाण पत्र और भवन की तकनीकी स्वीकृतियों की स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
नेता प्रतिपक्ष ने भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत भी नई विधानसभा की इस बिल्डिंग पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी कहा था कि 300 करोड़ में बनी इस बिल्डिंग की हालत बहुत ही ख़राब है। इतना ही नहीं विधानसभा से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि पहली बारिश में ही इस बिल्डिंग में सीपेज आ चुका है। बिल्डिंग के अधिकांश हिस्सों में सीपेज है। हालत ख़राब थे इसलिए विधानसभा शुरू होने से 15 दिन पहले ही आनन-फानन में इसे व्यवस्थित किया गया है।
सरकार और PWD को देना होगा जवाब
नया विधानसभा भवन राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों में से एक है। ऐसे में फॉल सीलिंग गिरने की घटना को केवल एक सामान्य तकनीकी खराबी मानकर छोड़ने के बजाय इसकी वास्तविक वजह सामने आना जरूरी है। साथ ही, भवन के उपयोगिता प्रमाण पत्र और अन्य तकनीकी स्वीकृतियों की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि फॉल सीलिंग गिरने की वजह निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन, फिटिंग या रखरखाव से जुड़ी है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं यदि भवन की सुरक्षा और तकनीकी स्वीकृतियों से जुड़ी कोई प्रक्रिया लंबित है, तो उसकी स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
फिलहाल नए विधानसभा भवन की फॉल सीलिंग गिरने की घटना ने एक पुरानी आरटीआई जानकारी को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। एक तरफ नए भवन में फॉल सीलिंग गिरने की घटना है और दूसरी तरफ आरटीआई में उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने की जानकारी। अब सरकार और लोक निर्माण विभाग के स्पष्टीकरण से ही यह साफ होगा कि भवन की तकनीकी स्वीकृतियों और सुरक्षा प्रमाणन की वास्तविक स्थिति क्या है।
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