बलौदाबाजार में 11 करोड़ का लोन घोटाला, केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड पर FIR
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में राजकुमार सराफ के मकान पर शनिवार शाम से रविवार शाम तक कार्रवाई हुई। शुरुआत में इसे ED (Enforcement Directorate) की रेड समझा जा रहा था। लेकिन FIR कॉपी के मुताबिक यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI (Central Bureau of Investigation) ने की है। साथ ही आयकर विभाग यानी IT (Income Tax) ने भी इस मामले में कार्रवाई की है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर CBI ने करीब 11.38 करोड़ रुपए के बैंक लोन घोटाले में FIR दर्ज की है।
यह मामला धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टरों, गारंटर तथा कुछ बैंक अधिकारियों से जुड़ा है। कार्रवाई के दौरान भारत सरकार लिखी गाड़ी से अफसर मौके पर पहुंचे थे।
घर के बाहर पुलिस जवान भी तैनात रहे। पूरे 24 घंटे चली इस कार्रवाई ने इलाके में खासी हलचल मचा दी।
किस कंपनी पर लगा है आरोप
धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड बॉक्साइट की बिक्री और निर्यात का कारोबार करती थी। इसी कंपनी से जुड़ी KSR इंफ्रा और केपेक्स 2 एंटरप्राइजेज नाम की दो अन्य फर्में भी संचालित की जा रही थीं।
आरोप है कि कंपनी ने आपसी मिलीभगत से बैंक को धोखा देकर लोन की राशि का गलत इस्तेमाल किया। इससे बैंक को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। सीधे शब्दों में कहें तो आरोपियों पर कैश क्रेडिट के जरिए पैकिंग क्रेडिट चुकाने का आरोप है।
7 मई को बैंक ने दर्ज कराई थी शिकायत
CBI की FIR के मुताबिक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के डिप्टी जनरल मैनेजर और रीजनल हेड रणधीर कुमार ने 7 मई 2026 को शिकायत दी थी।
शिकायत में कहा गया कि कंपनी और उसके जिम्मेदार लोगों ने बैंक से मिली क्रेडिट सुविधा का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की। इसी शिकायत के आधार पर CBI ने जांच शुरू की।
15 करोड़ की एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट सुविधा
जांच में सामने आया कि 19 अप्रैल 2023 को कंपनी को 15 करोड़ रुपए की एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट यानी EPC (Export Packing Credit) सुविधा मंजूर हुई थी। इसमें 5 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट यानी CC (Cash Credit) सीमा और 7.50 करोड़ रुपए की लेटर ऑफ क्रेडिट यानी LC (Letter of Credit) सीमा शामिल थी।
यही रकम आगे चलकर विवाद की मुख्य वजह बनी।
सिस्टर कंसर्न के जरिए घुमाई गई रकम
CBI के मुताबिक कंपनी ने लोन की रकम सीधे कारोबार में लगाने के बजाय अपनी सहयोगी फर्मों भारत मल्टी ट्रेड, क्रिस एंटरप्राइजेज और राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज के खातों में ट्रांसफर की।
जांच में यह भी सामने आया कि भारत मल्टी ट्रेड के मालिक संतोष कुमार रमानी, कंपनी की सहयोगी फर्म केपेक्स 2 एंटरप्राइजेज से जुड़े हैं। वहीं क्रिस एंटरप्राइजेज के मालिक कृतार्थ सोनी, कंपनी के गारंटर कुशल सोनी के भाई हैं।
CBI का आरोप है कि कैश क्रेडिट खाते से निकाली गई रकम को अलग-अलग फर्मों के जरिए घुमाकर उसी दिन पैकिंग क्रेडिट खाते में जमा कराया गया। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि पैकिंग क्रेडिट का भुगतान हो चुका है।
लोन खाता हुआ NPA, फिर सामने आया मामला
बैंक के मुताबिक कंपनी समय पर लोन नहीं चुका सकी। इसके बाद 12 अक्टूबर 2024 को लोन खाता NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर दिया गया।
31 जनवरी 2026 तक बैंक का कुल 11.38 करोड़ रुपए बकाया था। यही आंकड़ा बाद में CBI जांच का आधार बना।
किन-किन पर दर्ज हुई FIR
CBI ने इस मामले में धमतरी केपेक्स प्राइवेट लिमिटेड, कंपनी की डायरेक्टर राजलक्ष्मी सराफ, अभिषेक गुप्ता, गारंटर कुशल सोनी, अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया है।
आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, लेखा में हेराफेरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अब आगे क्या
CBI का कहना है कि शुरुआती जांच में बैंक के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और लोन राशि के दुरुपयोग के पर्याप्त आधार मिले हैं। अब एजेंसी सभी वित्तीय लेन-देन, संबंधित कंपनियों, बैंक अधिकारियों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच करेगी।
आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है।
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