40 लाख का बैंक लोन घोटाला: EOW ने दर्ज किया केस, व्यापारी सहित पांच आरोपी जांच के घेरे में

Rahul Dave | Jan 31, 2026, 18:00 IST
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scam eow case
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इंदौर में 40 लाख रुपए के बैंक लोन घोटाले में पांच आरोपी जांच में हैं। इनमें एक व्यापारी और केनरा बैंक के अधिकारी शामिल हैं। ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज किया है।

News in Short

  • इंदौर में 40 लाख रुपए का लोन घोटाला सामने आया है।
  • फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन लिया गया, जांच में अनियमितताएं पाई गईं।
  • आरोपियों में व्यापारी और केनरा बैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।
  • लोन स्वीकृति के समय संपत्ति का मालिक को-ओब्लिगेंट नहीं था।
  • बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।

News in Detail

इंदौर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राष्ट्रीयकृत बैंक से लोन लेने का बड़ा मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू ने 40 लाख रुपए के बैंक लोन घोटाले में केस दर्ज किया है। मामले में एक व्यापारी और केनरा बैंक के तत्कालीन अधिकारी सहित पांच आरोपी जांच के घेरे में हैं।

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मशीन खरीद के नाम पर लिया गया लोन

ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई केनरा बैंक के आनंद शिवानंद तोतड की शिकायत पर की गई। शिकायत में बताया गया कि चन्द्रशेखर पचोरी और अन्य ने फर्जी दस्तावेज बनाकर 40 लाख रुपए का लोन ले लिया।

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पहले खाता खोला, फिर रची साजिश

जांच में सामने आया कि 12 अप्रैल 2018 को चन्द्रशेखर पचोरी ने 'मेसर्स जय शिव एंड कंपनी' के नाम से केनरा बैंक, नंदा नगर शाखा में चालू खाता खोला। इसके बाद केनरा बैंक नवलखा शाखा से 40 लाख रुपए के लोन के लिए आवेदन किया। इस मामले में राममोहन अग्रवाल को को-ओब्लिगेंट बनाया गया था। यानी इसका मतलब है कि मुख्य उधारकर्ता के साथ-साथ को-ओब्लिगेंट भी पूरी राशि चुकाने के लिए बाध्य होता है। यदि मुख्य व्यक्ति लोन चुकाने में असमर्थ हो।

संपत्ति को बताया वैध और निर्विवाद

लोन के लिए उषा नगर एक्सटेंशन स्थित प्लॉट क्रमांक 277 को बंधक संपत्ति दर्शाया गया। बैंक के पैनल अधिवक्ता की लीगल सर्च रिपोर्ट में संपत्ति को वैध और निर्विवाद बताया गया। साथ ही इसे सभी प्रकार के भार से मुक्त दर्शाया गया।

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किश्तें नहीं चुकाईं, खाता एनपीए

तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी ने 8 मई 2018 को लोन स्वीकृति की सिफारिश की। बैंक ने इसके आधार पर ऋण स्वीकृत कर दिया। लेकिन बाद में ऋण की किश्तों का भुगतान नहीं किया गया। 1 मई 2023 को खाता एनपीए घोषित कर दिया गया।

जांच में बड़ा खुलासा

EOW की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। पता चला कि को-ओब्लिगेंट राममोहन अग्रवाल लोन स्वीकृति के समय संपत्ति का मालिक ही नहीं था। उसने साल 2000 में प्लॉट खरीदा था। वर्ष 2001 में वहां 13 फ्लैट और 6 दुकानें बनाकर बेच दी गई थीं। फ्लैट नंबर 101 भी वर्ष 2009-10 में विक्रय हो चुका था।

भौतिक सत्यापन रिपोर्ट में हेरफेर

जांच में यह सामने आया कि बैंक कर्मचारियों ने गलत सत्यापन रिपोर्ट बनाई। शाखा प्रबंधक जतिन गुप्ता की रिपोर्ट में बहुमंजिला भवन का उल्लेख नहीं था। बैंक के पैनल वैल्यूवर ने भवन के फोटो संलग्न किए थे।

इन पर दर्ज हुआ मामला

ईओडब्ल्यू ने निम्न आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है

  • चन्द्रशेखर पचोरी, निवासी जूनी इंदौर
  • राममोहन अग्रवाल, को-ओब्लिगेंट
  • जतिन गुप्ता, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, केनरा बैंक नंदा नगर
  • कमलेश दरवानी, तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर, केनरा बैंक
  • मार्केटिंग इंदौर का प्रोपराइटर
आरोपियों पर धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत केस दर्ज किया गया है।

बैंक अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में

ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार बैंक अधिकारियों की भूमिका और आपसी साठगांठ की गहराई से जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे और भी कार्रवाई की जा सकती है।

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भ्रष्टाचार पर ईओडब्ल्यू की सख्ती

ईओडब्ल्यू इंदौर भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। वर्ष 2025 में कुल 20 भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2026 की शुरुआत में ही जनवरी माह में यह छठा मामला दर्ज किया गया है। यह एजेंसी की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।

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