/sootr/media/media_files/2026/01/31/vinod-katare-2026-01-31-15-59-28.jpg)
BHOPAL.मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में पदस्थ विनोद कटारे पर गंभीर आरोपों की लंबी फेहरिस्त है, इसके बावजूद उन्हें जूनियर होते हुए भी ग्वालियर क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक का प्रभार सौंप दिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि कटारे के खिलाफ न सिर्फ पुरानी कई शिकायतें हैं, बल्कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लिखित रूप में यह कह चुके हैं कि उन्हें कभी फील्ड पोस्टिंग न दी जाए। इसके बावजूद वे वरिष्ठ पद पर काम कर रहे हैं।
आरोप यह भी है कि अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर कटारे लगातार नियमों को तोड़ रहे हैं। बिजली कंपनी में साफ नियम है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में कोई अधिकारी अपने सगे रिश्तेदार को नहीं रख सकता है। इसके बावजूद कटारे ने अपने भतीजे संकल्प कटारे को शिवपुरी में हाईली स्किल्ड पोस्ट पर भर्ती करवा दिया है।
ये भी पढ़ें...MPPKVVCL Vacancy: मध्यप्रदेश बिजली कंपनी में बंपर भर्ती, 20 जनवरी लास्ट डेट
जूनियर होते हुए भी बने मुख्य महाप्रबंधक
विनोद कटारे ग्वालियर क्षेत्र में भंडार में महाप्रबंधक (चालू प्रभार) के रूप में पदस्थ थे। उनके ऊपर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विभागीय जांच भी चली थी। इसके बावजूद, ग्वालियर क्षेत्र में उनसे वरिष्ठ अधिकारियों के होते हुए भी जांच को समाप्त कर उन्हें मुख्य महाप्रबंधक ग्वालियर क्षेत्र का प्रभार सौंप दिया गया है।
कटारे की पिछली मैदानी पदस्थापनाओं के दौरान हुए गोलमाल को देखते हुए विद्युत मंडल प्रशासन ने साफ निर्देश दिए थे कि भविष्य में उन्हें फील्ड में पोस्टिंग न दी जाए। आरोप है कि कटारे ने अपने प्रभाव से इस फैसले को दबा दिया और इसके बाद लगातार पदों पर बने रहे।
मुरैना में करोड़ों का घोटाला
विनोद कटारे ने महाप्रबंधक मुरैना रहते हुए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में एक कंपनी के साथ मिलकर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया। जांच में सैंपल चेक के जरिए यह तथ्य सामने आया कि अमानक और गलत कामों को स्वीकार कर ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया, जिससे बिजली कंपनी को करीब 4 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
इस मामले में आरोप है कि जांच अधिकारी को हटवाकर तकनीकी निदेशक से जांच करवाई गई। इसमें अनियमितता तो मानी गई, लेकिन बाद में रिपोर्ट को इस तरह मोड़ा गया कि कटारे को फायदा मिल सके। यह कहकर मामला दबा दिया गया कि ठेकेदार की सुरक्षा राशि से नुकसान की भरपाई हो जाएगी।
अधूरे काम, डबल फंड और चोरी
मुरैना में ही महाप्रबंधक रहते हुए विनोद कटारे पर कई गंभीर आरोप लगे थे। 220 केवी सब स्टेशन मुरैना से 33 केवी फीडर लाइन डालने के लिए एसएसटीडी योजना से फंड लिया गया और स्टीमेट मंजूर कराया गया। काम शुरू हुआ, लेकिन अधूरा ही छोड़ दिया गया।
इसके बाद उसी अधूरे काम को पूरा करने के नाम पर एनडी योजना से एक करोड़ का अतिरिक्त फंड फिर लिया गया और नया स्टीमेट पास कराया गया। इसके बावजूद काम फिर भी पूरा नहीं हुआ। आरोप है कि जो तार लगाए गए थे, उन्हें भी ठेकेदार से मिलकर चोरी करवा दिया गया, लेकिन पुलिस में रिपोर्ट तक नहीं होने दी गई।
इसके बाद तार बदलने के नाम पर अलग से स्टीमेट भी मंजूर करा लिया गया, लेकिन इसके बाद भी यह काम कटारे की मुरैना में पूरी पदस्थी के दौरान अधूरा ही रहा। कहा जाता है कि कंपनी प्रबंधन से सांठगांठ कर इस मामले को दबा दिया गया। इसी समय मुरैना में सौभाग्य योजना के काम भी चल रहे थे। इनमें गड़बड़ियों की जांच के लिए कंपनी मुख्यालय से मुख्य अभियंता ग्वालियर को पत्र लिखे गए, लेकिन आरोप है कि अधिकारियों से मिलीभगत कर जांच को दबा दिया गया।
इसके अलावा, मेंटेनेंस के नाम पर भी करोड़ों रुपए का गबन किए जाने की बात सामने आई है। योजना के तहत करोड़ों के स्टीमेट मंजूर कराए गए, फिर कंपनी के भंडार से सामग्री निकलवाई गई और उसे ठेकेदारों को बेच दिया गया था। ईआरपी क्रमांक 323285 के मामले में कोई काम नहीं हुआ, फिर भी सामग्री बेच दी गई और लेबर का फर्जी भुगतान ठेकेदार को करवा दिया गया। इनमें से कुछ मामलों में केवल तत्कालीन प्रबंधक एसटीसी मुरैना को जिम्मेदार मानकर उनके खिलाफ तो विभागीय जांच चल रही है, लेकिन विनोद कटारे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
टेंडर घोटाले में 66 लाख से ज्यादा का नुकसान
ग्वालियर में सौभाग्य योजना के तहत टेंडर टीएस-5 और टीएस-559 के मामलों में भारी अनियमितता सामने आई थी। टीएस-559 के तहत कम दरों पर पोल उपलब्ध होने के बावजूद कटारे ने महंगे टेंडर टीएस-5 के तहत पोल खरीदे, जिससे कंपनी को 66 लाख 58 हजार 270 रुपए का नुकसान हुआ।इस पर उन्हें नोटिस जारी हुआ, लेकिन आरोप है कि बाद में आरोप पत्र में ही मूल आरोप बदलवा दिया गया। इसके बाद कंपनी प्रबंधन से सांठगांठ कर खुद को जांच में निर्दोष साबित करा लिया गया।
ग्वालियर में भी दोहराया खेल
ग्वालियर में 11 केवी छीमक-देवरा फीडर के अधूरे काम को पहले एर्रा इंफ्रा, फिर बजाज कंपनी से कराया गया और बिल पास करवा दिए गए। इसके बाद उसी काम को दोबारा अधूरा बताकर एसएसटीडी योजना में नया स्टीमेट स्वीकृत कर फंड हजम कर लिया गया। आज वही फीडर नई आरडीएसएस योजना में शामिल है।
मंत्री ने खुद मांगी थी जानकारी
कटारे के मामले में एक और चौंका देने वाली बात भी है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने ऊर्जा विभाग के पीएस को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि मुरैना जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना में गलत तरीके से बिल पास करने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है? सूत्रों का कहना है कि विनोद कटारे को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। लिहाजा, उन पर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और अब वे महाप्रबंधक बने बैठे हैं।
कटारे ने कहा- सभी आरोप गलत हैं
इस संबंध में पक्ष जानने के लिए 'द सूत्र' ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनकी ओर से जवाब नहीं आया। वहीं, ग्वालियर में पदस्थ महाप्रबंधक विनोद कटारे से बात की तो उन्होंने अपने तर्क रखे। उन्होंने कहा कि जांच के बाद सभी आरोप गलत पाए गए हैं और उन्हें वापस ले लिया गया है।
ये सभी आरोप एक ही व्यक्ति ने लगाए थे, जो अभी हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत पर है और उसके समर्थकों ने भी इन्हें फैलाया। सरकार विधानसभा में पहले ही स्पष्ट रूप से जवाब दे चुकी है कि मेरे खिलाफ कुछ भी नहीं है। इससे यह पूरी तरह साफ है कि मैं सीजीएम के पद पर क्यों हूं। ईर्ष्या के चलते उसी व्यक्ति ने विधानसभा और उन्हीं स्थानों पर बार-बार वही मुद्दे उठाए हैं, लेकिन तथ्य तो तथ्य ही होते हैं।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us