इंदौर CMHO माधव हासानी को अपनों की ही जांच पर भरोसा नहीं, हाईकोर्ट में ये कहा
Rahul Dave | Jan 30, 2026, 10:28 IST
indore fake hospitals news
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में चल रहे फर्जी और अवैध अस्पतालों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कामकाजी शैली पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट में CMHO डॉ. माधव हासानी ने खुद माना कि उनकी बनाई 8 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
Indore News:मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में गुरुवार को फर्जी अस्पतालों के मामले पर अहम सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच के सामने CMHO (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) डॉ. माधव हासानी खुद पहुंचे थे।
CMHO ने कोर्ट को बताया कि अवैध अस्पतालों की जांच के लिए 8 सदस्यीय समिति बनाई गई थी। हालांकि वो रिपोर्ट से खुद संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने ये भी बताया कि रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।
मामले में अब फिर से जांच करने की जरूरत है। CMHO के इस बयान से यह साफ दिखता है कि स्वास्थ्य विभाग में बड़ी लापरवाही हो रही है।
याचिकाकर्ता चर्चित शास्त्री की तरफ से वकीलों ने कोर्ट (मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच) को बताया कि हाईकोर्ट ने CMHO को साफ-साफ जांच के आदेश दिए थे, फिर भी जानबूझकर इसमें देरी की जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई अस्पताल फर्जी दस्तावेजों पर चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर रहा है।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि कई ऐसे अस्पताल हैं जिनके पास न तो वैध स्वास्थ्य पंजीकरण है और न ही बिल्डिंग परमिशन। इस गंभीर बात को ध्यान में रखते हुए, हाईकोर्ट ने नगर निगम इंदौर से भी जवाब मांगा है।
फर्जी अस्पतालों के खिलाफ कलेक्टर शिवम वर्मा के पास भी शिकायत दी गई थी। इसमें यह आरोप लगाया गया था कि CMHO डॉ. माधव हासानी के संरक्षण में अवैध अस्पताल चल रहे हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना वैध अनुमति के अस्पताल (इंदौर फर्जी अस्पताल) चलाना विभाग की मिलीभगत को दिखाता है।
शिकायत में जिन 12 अस्पतालों का उल्लेख किया गया है, वे इस प्रकार हैं
शिकायत में यह भी बताया गया कि सिर्फ ये 12 अस्पताल ही नहीं, बल्कि शहर में करीब 31 और अस्पताल भी फर्जी दस्तावेजों पर चल रहे हैं।
याचिका में कहा गया कि इन अस्पतालों में बिना पंजीकरण और अनुमति के मरीजों को भर्ती करके उनका इलाज किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर लोगों की जान से खेलना है।
अब सबकी नजरें दो हफ्ते बाद आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। ये तय करेगी कि फर्जी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी या फिर किसी बहाने सब रुक जाएगा।
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CMHO ने कोर्ट को बताया कि अवैध अस्पतालों की जांच के लिए 8 सदस्यीय समिति बनाई गई थी। हालांकि वो रिपोर्ट से खुद संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने ये भी बताया कि रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।
मामले में अब फिर से जांच करने की जरूरत है। CMHO के इस बयान से यह साफ दिखता है कि स्वास्थ्य विभाग में बड़ी लापरवाही हो रही है।
वकीलों ने कोर्ट में क्या कहा
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई अस्पताल फर्जी दस्तावेजों पर चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर रहा है।
हाईकोर्ट का आदेश
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद हाईकोर्ट ने CMHO डॉ. माधव हासानी को दो हफ्ते में जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, नगर निगम इंदौर को भी अस्पतालों की बिल्डिंग परमिशन से जुड़ी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
नगर निगम से भी जवाब तलब
रिकॉर्ड में 12 अस्पताल बंद, फिर भी सवाल कायम
शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना वैध अनुमति के अस्पताल (इंदौर फर्जी अस्पताल) चलाना विभाग की मिलीभगत को दिखाता है।
शिकायत में जिन 12 अस्पतालों का उल्लेख किया गया है, वे इस प्रकार हैं
- लेडी हलीमा हॉस्पिटल, खजराना
- अविरल हॉस्पिटल, हवा बंगला
- मालवा हॉस्पिटल, अंजनी नगर
- अनमोल हॉस्पिटल, नेहरू नगर
- श्रद्धा हॉस्पिटल, बाणगंगा
- महाराणा प्रताप हॉस्पिटल, देवास नाका
- सिटीजन हॉस्पिटल, कान्यकुब्ज नगर
- आयुष्मान हॉस्पिटल, नगीन नगर
- देवी अहिल्या हॉस्पिटल, चितावद
- एम.जी. दर्श हॉस्पिटल, अखंड नगर
- मदरहुड हॉस्पिटल
- गुरुनानक देव हॉस्पिटल, सांवेर
31 और अस्पतालों पर भी आरोप
आम जनता की जान से खिलवाड़
अब सबकी नजरें दो हफ्ते बाद आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। ये तय करेगी कि फर्जी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी या फिर किसी बहाने सब रुक जाएगा।
इंदौर से जुड़ी से खबरें भी पढ़ें...
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