द सूत्र सर्वे: मध्यप्रदेश के 83 फीसदी लोगों ने माना कि उनके जिले का कलेक्टर भ्रष्ट है...

The Sootr | Jan 29, 2026, 18:04 IST
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collector corruption survey
Photograph: (thesootr)

मध्यप्रदेश में 83% लोग मानते हैं कि उनके जिले का कलेक्टर भ्रष्ट है। यह मुद्दा मुख्य सचिव की बैठक में उठा, जिसने प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचाई।

BHOPAL. मध्यप्रदेश का प्रशासनिक तंत्र इस वक्त अपने सबसे बड़े भरोसे के संकट से गुजर रहा है। जिले के सबसे ताकतवर और जिम्मेदार अधिकारी माने जाने वाले कलेक्टर आज जनता की नजरों में संदेह के घेरे में हैं। वजह कोई अफवाह नहीं, कोई राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि खुद प्रदेश के मुख्य सचिव की बैठक के बाद उठी बहस और उस पर जनता की सीधी राय है।

‘द सूत्र’ के ऑनलाइन पोल ने प्रदेश की हकीकत को सामने रख दिया है। इस सर्वे में शामिल 83 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनके जिले का कलेक्टर भ्रष्ट है। सिर्फ 17 प्रतिशत लोगों ने यह भरोसा जताया कि उनके जिले का कलेक्टर ईमानदार है। हालांकि सर्वे में कुछ लोगों ने कुछ जिलों के कलेक्टरों के काम की तारीफ भी की, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम है।

इस तरह शुरू हुआ विवाद

दरअसल, यह मामला 21 जनवरी को उस वक्त उभरा, जब मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन प्रदेश के सभी 55 जिलों के कलेक्टरों और एसपी की कॉन्फ्रेंस ले रहे थे। बैठक का एजेंडा सुशासन था, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय पर कामकाज की समीक्षा थी, लेकिन सूत्रों के अनुसार चर्चा के बीच भ्रष्टाचार और पैसों के लेन-देन का मुद्दा सामने आ गया।

बैठक के बाद एक बात तेजी से वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि चीफ सेक्रेटरी ने यह बात कही कि शिकायतें हर जिले से आती हैं और यह भी स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री स्वयं कहते हैं कि प्रदेश के कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करते।

इसी को लेकर सोशल मीडिया में हल्ला मच गया। हालांकि बाद में सीएस ने सफाई दी। सरकार के जनसंपर्क विभाग ने भी खंडन जारी किया कि सीएस ने बैठक में इस तरह की कोई बात नहीं कही थी। वायरल बात की जमीनी सच्चाई जानने के लिए ही 'द सूत्र' ने सर्वे किया और लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी की।

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प्रशासनिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया

आपको बता दें कि वायरल बयान के बाद प्रशासनिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई अधिकारियों ने इसे पूरे कलेक्टर कैडर को कटघरे में खड़ा करने वाला बयान बताया।

विवाद को बढ़ते देख मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टरों के वॉट्सऐप ग्रुप में एक मैसेज भेजकर सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने कहा, उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि सभी कलेक्टर भ्रष्ट हैं।



उन्होंने यह भी लिखा कि कई कलेक्टरों ने बेहतरीन काम किया है और उन्हीं की वजह से मध्यप्रदेश कई योजनाओं में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। साथ ही यह भी दोहराया कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समयसीमा में मामलों का निपटारा करना कलेक्टर की जिम्मेदारी है।

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जनता का गुस्सा फूटा

सवाल यह है कि क्या यह सफाई जनता के गुस्से को ठंडा कर पाई? ‘द सूत्र’ के पोल पर आईं प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि जनता अब सिर्फ स्पष्टीकरण से खुश नहीं है। एक यूजर ने लिखा कि जिस दिन नेता और मंत्री अपने जेब से खर्च करने लगेंगे, उसी दिन भ्रष्टाचार बंद होगा। दूसरे ने कहा कि कुछ गिने-चुने कलेक्टरों को छोड़कर बाकी सभी भ्रष्ट हैं।

सीधी जिले से आए एक लंबे कमेंट में यूजर ने लिखा कि यदि सांसद-विधायक ईमानदार होंगे तो कलेक्टर भी ईमानदार होंगे। यदि नेता भ्रष्ट होंगे तो कलेक्टर पर भी गलत काम का दबाव बनेगा, वरना ट्रांसफर तय है। यानी जनता के मुताबिक, यह सिर्फ अफसरों की नहीं, पूरे सत्ता-प्रशासन के गठजोड़ की समस्या है।

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