बलौदाबाजार हिंसा : सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
गिरौधपुरी धाम में जैतखाम तोड़ने पर विवाद शुरू हुआ था। इसके विरोध में 10 जून को भारी प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन के दौरान भीड़ अचानक उग्र और हिंसक हो गई। उपद्रवियों ने कलेक्ट्रेट और एसपी ऑफिस में आग लगा दी। इस हिंसा में करोड़ों रुपए की सरकारी संपत्ति खाक हो गई।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार हिंसा मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने इस पूरे मामले पर सुनवाई की है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से इस पर लिखित जवाब मांगा है।
इस मामले में आरोपियों ने विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी (SLP - Special Leave Petition) दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया। अब अदालत इस मामले पर 17 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट से लगा था झटका
इससे पहले इस मामले के आरोपियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा था। हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया था। जेल में बंद आरोपी अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा ने जमानत मांगी थी।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने इस पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 19 मई 2026 को इन तीनों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद आरोपी अजय यादव ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
भारी नुकसान और गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ गंभीर दलीलें दी गईं। पुलिस और प्रशासन ने बताया कि अमित बघेल और अजय यादव छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के बड़े पदाधिकारी हैं। इन दोनों पर सात से आठ हजार लोगों की भारी भीड़ को भड़काने का आरोप है।
आरोपियों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमला करने के भी केस दर्ज हैं। इस भीषण हिंसा के कारण बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की शांति व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई थी। उपद्रवियों के तांडव के कारण सरकारी खजाने को करीब 13 से 15 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ था।
अमित बघेल के खिलाफ पहले से ही 17 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं अजय यादव के खिलाफ 13 और दिनेश कुमार वर्मा के खिलाफ एक मामला लंबित है। इसी वजह से अदालत ने उन्हें राहत देने से साफ मना कर दिया था।
कलेक्ट्रेट को लगा दी थी आग
यह पूरा विवाद 15 और 16 मई 2024 की दरमियानी रात को शुरू हुआ था। कुछ असामाजिक तत्वों ने गिरौधपुरी धाम में सतनामी समाज के पवित्र जैतखाम को नुकसान पहुंचाया था। पुलिस ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया था।
हालांकि सतनामी समाज के लोग पुलिस की इस जांच और कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे। वे लगातार इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे। जनता के भारी दबाव को देखते हुए प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने न्यायिक जांच की मंजूरी दे दी थी।
इसके बावजूद 10 जून को हजारों लोग कलेक्ट्रेट के पास इकट्ठा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने वहां जमकर हंगामा किया और देखते ही देखते यह प्रदर्शन हिंसक हो गया। उपद्रवियों ने वहां खड़े वाहनों को तोड़ा और फिर कलेक्टर तथा एसपी कार्यालय को आग के हवाले कर दिया।
इस आगजनी में पूरी इमारत जलकर खाक हो गई थी। प्रशासन के अनुसार इस घटना में कुल 12 करोड़ 53 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। पुलिस ने इसके बाद कड़ी कार्रवाई करते हुए 43 अलग-अलग मामलों में 187 लोगों को गिरफ्तार किया था। अब देखना होगा कि 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार क्या जवाब दाखिल करती है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल 'गिरौधपुरी धाम' किस समाज से संबंधित है?
उत्तर: गिरौधपुरी धाम सतनामी समाज का सबसे पवित्र और बड़ा धार्मिक स्थल है। यह महान संत गुरु घासीदास बाबा की जन्मभूमि और तपोभूमि है। - बलौदाबाजार हिंसा मामले की सुनवाई करने वाले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य पीठ की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की स्थापना 1 नवंबर 2000 को राज्य गठन के साथ बिलासपुर में हुई थी। यह देश का 19वां उच्च न्यायालय है। - भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की जाती है?
उत्तर: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 136 (Article 136) के तहत किसी भी अदालत के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की जा सकती है।
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