बलौदाबाजार हिंसा : मास्टरमाइंड अमित बघेल की जमानत याचिका हाई कोर्ट में खारिज
Aishwarya Dwivedi | May 28, 2026, 14:41 IST
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बलौदाबाजार हिंसा और कलेक्टोरेट आगजनी के मुख्य आरोपी अमित बघेल समेत तीन की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि भीड़ भड़काने वालों को राहत नहीं मिल सकती।
NEWS IN SHORT
- हाई कोर्ट ने बलौदाबाजार आगजनी के तीन आरोपियों की जमानत खारिज की।
- जस्टिस नरेंद्र व्यास की सिंगल बेंच ने याचिका पर फैसला सुनाया।
- आरोपियों ने भड़काऊ भाषण देकर उग्र भीड़ से हिंसा करवाई थी।
- इस भीषण बवाल में करीब 15 करोड़ का नुकसान हुआ।
- हिंसक भीड़ के जानलेवा हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
NEWS IN DETAIL
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने तल्ख टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपियों ने करीब 7 से 8 हजार लोगों की भीड़ को भड़काकर सरकारी और निजी संपत्ति को लगभग 13 से 15 करोड़ रुपए का भारी नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही भीड़ से पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी करवाया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समाज में अमन-चैन और कानून व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करने वाले ऐसे गंभीर अपराध के आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
भड़की हुई हिंसक भीड़ ने पुलिस के बैरिकेड्स तोड़ दिए और कलेक्टोरेट व एसपी ऑफिस परिसर में जबरन घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। उग्र प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टोरेट भवन को आग के हवाले कर दिया और परिसर में खड़ी सैकड़ों गाड़ियों को फूंक दिया। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की रॉड से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
बचाव पक्ष की दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान अमित बघेल के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि 10 जून को जब बलौदाबाजार में यह हिंसा और आगजनी हो रही थी, तब उनके मुवक्किल वहां मौजूद नहीं थे बल्कि रजिस्ट्रार ऑफिस में थे।
हालांकि, कोर्ट ने अपराध की भयावहता और शुरुआती साक्ष्यों को देखते हुए इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और तीनों की याचिकाएं खारिज कर दीं। इस फैसले से साफ है कि कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वालों पर अदालत का रुख बेहद सख्त है।
निष्कर्ष
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