राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी बस्तर की संस्कृति, राष्ट्रपति मुर्मू देंगी स्पेशल डिनर

Arun Tiwari | Jul 29, 2026, 14:35 IST
बस्तर कलाकारों को राष्ट्रपति का डिनर
राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति का सम्मान होगा। राष्ट्रपति मुर्मू विशेष रात्रिभोज देंगी। CM साय के साथ 209 सदस्यीय दल दिल्ली में करेगा डिनर। बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, आदिवासी प्रतिनिधियों और पद्मश्री सम्मानित हस्तियों का अभिनंदन किया जाएगा।

नई दिल्ली में 30 जुलाई को छत्तीसगढ़ के लिए एक खास और गौरवपूर्ण पल आने वाला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन में बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, पारंपरिक आदिवासी नेतृत्व और पद्मश्री सम्मानित हस्तियों के सम्मान में विशेष रात्रिभोज का आयोजन करेंगी।



इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागी, विभिन्न जनजातीय समुदायों के पारंपरिक प्रतिनिधि, पद्मश्री सम्मानित हस्तियां और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं।



यह दौरा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच तक पहुंचाने का अवसर भी माना जा रहा है।



आदिवासी कला का सम्मान:

राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला यह विशेष रात्रिभोज आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं, इसलिए इस आयोजन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे देशभर में बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।



राष्ट्रपति भवन देखेंगे कलाकार:

दिल्ली प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन का भ्रमण करेगा। इसके अलावा सभी सदस्य संसद भवन, राष्ट्रीय स्मारकों और राजधानी के अन्य प्रमुख स्थलों का भी दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य प्रतिनिधियों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय धरोहरों से परिचित कराना भी है।



बस्तर पंडुम-2026 छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल है। इस आयोजन के माध्यम से बस्तर की जनजातीय कला, लोक संस्कृति, पारंपरिक खेल, लोकनृत्य, लोकगीत और सामाजिक परंपराओं को नई पहचान देने का प्रयास किया गया है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, कलाकारों और पारंपरिक नेतृत्व की भागीदारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।



राष्ट्रीय स्तर तक छत्तीसगढ़ की पहचान:

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लगातार यह कहते रहे हैं कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। सरकार का प्रयास है कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर केवल राज्य तक सीमित न रहे, बल्कि देश और दुनिया में उसे सम्मानजनक स्थान मिले। राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह सम्मान समारोह उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



बेहद खास आयोजन

राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी यह आयोजन बेहद अहम माना जा रहा है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बस्तर के पारंपरिक आदिवासी प्रतिनिधि, कलाकार और सम्मानित हस्तियां राष्ट्रपति भवन पहुंचेंगी। इससे न केवल बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि आदिवासी समाज की परंपराओं, जीवनशैली और योगदान को भी देशभर में नई प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।



राष्ट्रपति भवन में होने वाला यह विशेष सम्मान समारोह छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर के लोगों के लिए गर्व का अवसर माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इस पहल से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं को सहेजने की नई प्रेरणा भी मिलेगी।



FAQ

  1. बस्तर पंडुम क्या है?
    बस्तर पंडुम-2026 छत्तीसगढ़ की एक सांस्कृतिक पहल है, जिसमें बस्तर की जनजातीय कला, लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक खेल और आदिवासी परंपराओं को बढ़ावा दिया गया है।


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