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NEWS IN SHORT
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा— छत्तीसगढ़ आना मुझे घर जैसा लगता है
- बस्तर पंडुम को बताया संस्कृति और उत्सव का जीवंत रूप
- नक्सलवाद से हुए नुकसान का जिक्र, कहा— अब बस्तर नक्सल मुक्त हो रहा
- हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने वालों का राष्ट्रपति ने किया स्वागत
- बस्तर पंडुम में 12 विधाओं में जनजातीय संस्कृति की भव्य प्रस्तुति
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ आना हमेशा घर जैसा लगता है: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम में कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें हमेशा घर जैसा महसूस होता है। यहां की संस्कृति प्राचीन, समृद्ध और सबसे मीठी है। बस्तर पंडुम को लोग केवल आयोजन नहीं, बल्कि उत्सव की तरह जीते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले चार दशकों में नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। बड़ी संख्या में नक्सली हथियार डाल रहे हैं और बस्तर नक्सल मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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हिंसा छोड़ने वालों का स्वागत
राष्ट्रपति ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वालों का स्वागत करते हुए कहा कि भटकाने वालों की बातों में न आएं। विकास और शांति ही बस्तर का भविष्य है।
बस्तर पंडुम के तहत विभिन्न जनजातियों द्वारा पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, वाद्ययंत्र, वेशभूषा और रीति-रिवाजों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी कलाकारों ने मंच को जीवंत कर दिया।
राज्यपाल बोले— ढोकरा शिल्प ने बस्तर को पहचान दी
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ गौरव का क्षण है। ढोकरा शिल्प ने बस्तर को देश-विदेश में पहचान दिलाई है। यहां का जनजातीय समाज प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है।
सीएम साय बोले— पंडुम केवल आयोजन नहीं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मां दंतेश्वरी की भूमि पर राष्ट्रपति का आगमन पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। बस्तर पंडुम आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को समर्पित मंच है। इस बार 54 हजार से अधिक लोगों ने पंजीयन कराया है और 12 विधाओं में आयोजन हो रहा है।
सीएम ने कहा कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक पूरे बस्तर से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। कई गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया है।
Sootr Knowledge
- बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति का सबसे बड़ा आयोजन है
- ढोकरा शिल्प बस्तर की अंतरराष्ट्रीय पहचान है
- जनजातीय समाज प्रकृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा है
- नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बन रहे हैं
- पंडुम से स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को मंच मिलता है
IMP FACTS
- आयोजन स्थल: लालबाग मैदान, जगदलपुर
- आयोजन: बस्तर पंडुम 2026
- पंजीयन: 54,000+ प्रतिभागी
- विधाएं: 12
- प्रमुख अतिथि: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
आगे क्या
राज्य सरकार बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'बस्तर पंडुम' को अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में शामिल करने की योजना बना रही है। साथ ही, आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए नई नीति के तहत रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
निष्कर्ष
बस्तर पंडुम 2026 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की पहचान है। राष्ट्रपति के संदेश ने स्पष्ट किया कि हिंसा नहीं, बल्कि संस्कृति, विकास और शांति ही बस्तर का भविष्य है।
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