पहले हुआ काम, अब निकला टेंडर : बस्तर पीडब्ल्यूडी पर लगे गंभीर आरोप

Aishwarya Dwivedi | May 27, 2026, 18:17 IST
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बस्तर PWD ने गृहमंत्री के दौरे के निर्माण कार्यों में बड़ा खेल किया। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही चहेते ठेकेदारों से काम करा लिया गया, जिससे सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन हुआ है।

NEWS IN SHORT

  • PWD ने नियमों को ताक पर रखकर किया अनोखा खेल।
  • हेलीपैड और बादल परिसर निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितता।
  • बिना वर्क ऑर्डर पसंदीदा लोगों को सौंप दिया गया काम।
  • सवाल पूछने पर कहा- मेरा रिटायरमेंट है, परेशान न करें।
  • स्थानीय ठेकेदारों ने सिंडिकेट राज के खिलाफ खोला मोर्चा।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के बस्तर में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। मामला देश के गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे से जुड़ा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने का बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि विभाग ने जिन निर्माण कार्यों के लिए हाल ही में टेंडर जारी किए हैं, वे काम जमीनी स्तर पर पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। यानी पहले काम कराया गया और अब सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।



क्या है पूरा मामला?

PWD उत्तर बस्तर संभाग क्रमांक-1 जगदलपुर द्वारा जारी निविदा (NIT-4/2026-2027) के अनुसार, टेंडर फॉर्म लेने की अंतिम तिथि 25 मई और इसे जमा करने की तारीख 28 मई 2026 तय की गई है, जबकि टेंडर 29 मई को खोला जाना है। हैरान करने वाली बात यह है कि ये सारे काम 18 मई को गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से पहले ही निपटाए जा चुके हैं।



स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, नेतानार CRPF कैंप के पास हेलीपैड निर्माण और 'बादल सांस्कृतिक परिसर' के भवनों का रिनोवेशन कार्य गृहमंत्री के आने के कई दिन पहले ही शुरू होकर पूरा भी हो गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब निर्माण कार्य पहले ही खत्म हो चुका है, तो अब टेंडर निकालने का क्या औचित्य है?



Notice


स्थानीय ठेकेदारों में आक्रोश

इस पूरे मामले ने बस्तर के ईमानदार और स्थानीय ठेकेदारों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ठेकेदारों का आरोप है कि विभाग ने एक खास 'सिंडिकेट' के तहत अपने पसंदीदा ठेकेदारों को बिना किसी वैध वर्क ऑर्डर के काम सौंप दिया। नियमों के मुताबिक, किसी भी सरकारी काम से पहले निविदा प्रक्रिया जरूरी है ताकि सभी योग्य ठेकेदारों को बराबरी का मौका मिले। लेकिन इस 'बैकडोर एंट्री' ने पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा दी हैं।



मेरा रिटायरमेंट है, परेशान न करें

जब इस महाघोटाले को लेकर PWD के जिम्मेदार अधिकारी राजीव बतरा से संपर्क किया गया, तो उनका जवाब और भी हैरान करने वाला था। उन्होंने कथित तौर पर यह कहते हुए फोन काट दिया कि उनका रिटायरमेंट नजदीक है, इसलिए उन्हें परेशान न किया जाए। अधिकारी का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया विभाग की मिलीभगत की ओर साफ इशारा करता है।



निष्कर्ष

इस पूरे मामले से साफ है कि बस्तर पीडब्ल्यूडी ने नियमों को ताक पर रखकर पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई हैं। वीआईपी दौरे की आड़ में बिना टेंडर पहले ही काम करा लेना और पूछने पर अधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना रवैया, विभाग में गहरे पैठे भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज की ओर इशारा करता है। इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।



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