उद्घाटन से पहले भारतमाला हाईवे में दरारें, अब 15 तरह के टेस्ट से होगी सड़क की जांच, निर्माण एजेंसी को नोटिस
Umeshwari Baghel | Oct 21, 2026, 17:07 IST
छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट की खुली पोल
Bharatmala Highway Quality Test: छत्तीसगढ़ में रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला हाईवे की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। सड़क का उद्घाटन अभी हुआ भी नहीं है। इससे पहले ही कांकेर जिले में सड़क पर दरारें आ गईं। मामला सामने आने के बाद एनएचएआई ने जांच तेज कर दी है। दिल्ली मुख्यालय से अधिकारियों की टीम भी मौके पर पहुंची।
सड़क की अलग-अलग परतों से नमूने लिए गए हैं। अब 15 तरह के टेस्ट से सड़क की गुणवत्ता जांची जाएगी। निर्माण एजेंसी को नोटिस भी जारी किया गया है।
रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना के तहत छह लेन हाईवे बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में इस हाईवे की लंबाई करीब 125 किलोमीटर है। इस हिस्से की लागत लगभग 4,146 करोड़ रुपए बताई गई है।
कांकेर जिले में सरगी और बासनवाही के बीच सड़क पर दरारें दिखाई दी थीं। मौलीपारा के आसपास सड़क का हिस्सा प्रभावित हुआ था। उद्घाटन से पहले ही सड़क की हालत देखकर निर्माण कार्य पर सवाल उठने लगे।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद सड़क की मरम्मत कर दी गई। अब अधिकारियों ने दरार आने की असली वजह तलाशने के लिए जांच शुरू की है।
सड़क में दरार आने का मामला एनएचएआई मुख्यालय तक पहुंच गया है। इसके बाद रायपुर और दिल्ली के अधिकारियों ने जांच शुरू की। अधिकारियों ने प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया। सड़क की ऊपरी और निचली परतों से नमूने जुटाए गए। इन नमूनों को अलग-अलग तकनीकी परीक्षणों के लिए लिया गया है।
सड़क की गुणवत्ता जांचने के लिए कुल 15 तरह के परीक्षण प्रस्तावित हैं। इसके अलावा स्वतंत्र जांच भी कराई जा रही है। दिल्ली की एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से भी सैंपलिंग कराई गई है।
इन जांचों से पता चलेगा कि निर्माण में किस स्तर पर कमी रही। सड़क की मजबूती और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी जांची जाएगी।
सड़क पर दरार आने के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं। निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता भी इसकी एक वजह हो सकती है। सड़क की परतों की मोटाई कम होने से भी परेशानी आ सकती है।
मिट्टी और गिट्टी को ठीक से नहीं दबाने पर सड़क कमजोर हो सकती है। पानी की निकासी सही नहीं होने से भी नुकसान हो सकता है। इन संभावित कारणों की जांच के लिए अलग-अलग टेस्ट किए जाएंगे। रिपोर्ट से सड़क की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
1. कोर कटिंग टेस्ट: इस जांच में सड़क से गोल आकार का नमूना निकाला जाता है। इससे सड़क की परतों की मोटाई मापी जाती है। यह भी देखा जाता है कि निर्माण तय मानकों के अनुसार हुआ या नहीं।
2. बिटुमिन कंटेंट टेस्ट: सड़क बनाने में इस्तेमाल डामर की जांच होती है। इसमें बिटुमिन की मात्रा मापी जाती है। इससे पता चलता है कि मिश्रण में निर्धारित मात्रा का इस्तेमाल हुआ या नहीं।
3. एग्रीगेट ग्रेडेशन टेस्ट: इस टेस्ट में गिट्टी और दूसरे पत्थरों की जांच होती है। उनके आकार और अनुपात को परखा जाता है। गिट्टी का गलत अनुपात सड़क की मजबूती प्रभावित कर सकता है।
4. फील्ड डेंसिटी और कम्पैक्शन टेस्ट: सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी और दूसरी परतों को दबाया जाता है। इस टेस्ट से उनके घनत्व की जांच होती है। इससे पता चलता है कि परतों को पर्याप्त रूप से दबाया गया या नहीं।
5. फॉलिंग वेट डिफ्लेक्टोमीटर टेस्ट: इस जांच में सड़क पर नियंत्रित भार डाला जाता है। इसके बाद सड़क के झुकाव को मापा जाता है। इससे सड़क की संरचनात्मक मजबूती का आकलन होता है।
6. रोड रफनेस टेस्ट: इस टेस्ट से सड़क की समतलता जांची जाती है। इससे पता चलता है कि सतह पर कितना उतार-चढ़ाव है। वाहन चलने के दौरान सड़क की स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाता है।
इन छह प्रमुख परीक्षणों के अलावा दूसरे टेस्ट भी प्रस्तावित हैं। सभी 15 परीक्षणों का पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है।
सड़क में दरार आने के बाद एनएचएआई ने संबंधित निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही विभागीय जांच भी चल रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि सड़क का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं। सड़क में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता भी परखी जाएगी।
थर्ड पार्टी जांच से भी निर्माण की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए दरारों की वास्तविक वजह अभी तय नहीं हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि निर्माण में कोई तकनीकी कमी थी या नहीं।
भारतामाला हाईवे को लेकर केवल सड़क की गुणवत्ता का सवाल नहीं है। आसपास के गांवों में रास्तों की समस्या भी सामने आई है। मालवीपारा पंचायत के किसानों का कहना है कि हाईवे बनने से खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। किसानों के आने-जाने के पुराने रास्ते प्रभावित हुए हैं।
स्थानीय किसान उत्तम साहू और देवेंद्र नेताम ने यह समस्या बताई है। किसान लोखनाथ मंडावी ने भी खेत तक रास्ता नहीं मिलने की बात कही है। ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे निर्माण के दौरान उनकी आवाजाही का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। अब उन्हें खेतों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
हाईवे निर्माण से विद्यार्थियों की परेशानी भी सामने आई है। गांव के पूर्व उपसरपंच हनुमान पांडेय ने स्कूल से जुड़ी समस्या बताई है। उनके मुताबिक हाईस्कूल सड़क के दूसरी ओर स्थित है।
स्कूल के लिए दूसरी जगह जमीन तलाश की गई है। ग्रामीणों ने नए शैक्षणिक सत्र से पहले स्कूल की व्यवस्था करने की मांग रखी थी। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
रायपुर-विशाखापट्टनम हाईवे भारतमाला परियोजना का अहम हिस्सा है। छत्तीसगढ़ में इसका करीब 125 किलोमीटर हिस्सा बनाया जा रहा है। इस हिस्से की लागत लगभग 4,146 करोड़ रुपए है।
इतनी बड़ी परियोजना में उद्घाटन से पहले दरारें सामने आना चिंता का विषय है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। एनएचएआई धमतरी पीआईयू के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शमशेर सिंह के मुताबिक प्रभावित हिस्से से नमूने लिए गए हैं। विभागीय जांच के साथ थर्ड पार्टी जांच भी कराई जा रही है।
फिलहाल सड़क के प्रभावित हिस्से की मरम्मत कर दी गई है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। इससे पता चलेगा कि दरारें क्यों आई थीं। निर्माण में कमी मिलने पर उसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।
उद्घाटन से पहले सड़क में कैसे आई दरार?
कांकेर जिले में सरगी और बासनवाही के बीच सड़क पर दरारें दिखाई दी थीं। मौलीपारा के आसपास सड़क का हिस्सा प्रभावित हुआ था। उद्घाटन से पहले ही सड़क की हालत देखकर निर्माण कार्य पर सवाल उठने लगे।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद सड़क की मरम्मत कर दी गई। अब अधिकारियों ने दरार आने की असली वजह तलाशने के लिए जांच शुरू की है।
दिल्ली से पहुंची टीम ने लिए सैंपल
सड़क की गुणवत्ता जांचने के लिए कुल 15 तरह के परीक्षण प्रस्तावित हैं। इसके अलावा स्वतंत्र जांच भी कराई जा रही है। दिल्ली की एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से भी सैंपलिंग कराई गई है।
इन जांचों से पता चलेगा कि निर्माण में किस स्तर पर कमी रही। सड़क की मजबूती और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी जांची जाएगी।
15 टेस्ट से कैसे सामने आएगी सच्चाई?
मिट्टी और गिट्टी को ठीक से नहीं दबाने पर सड़क कमजोर हो सकती है। पानी की निकासी सही नहीं होने से भी नुकसान हो सकता है। इन संभावित कारणों की जांच के लिए अलग-अलग टेस्ट किए जाएंगे। रिपोर्ट से सड़क की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
इन 6 टेस्ट से समझिए जांच का तरीका
2. बिटुमिन कंटेंट टेस्ट: सड़क बनाने में इस्तेमाल डामर की जांच होती है। इसमें बिटुमिन की मात्रा मापी जाती है। इससे पता चलता है कि मिश्रण में निर्धारित मात्रा का इस्तेमाल हुआ या नहीं।
3. एग्रीगेट ग्रेडेशन टेस्ट: इस टेस्ट में गिट्टी और दूसरे पत्थरों की जांच होती है। उनके आकार और अनुपात को परखा जाता है। गिट्टी का गलत अनुपात सड़क की मजबूती प्रभावित कर सकता है।
4. फील्ड डेंसिटी और कम्पैक्शन टेस्ट: सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी और दूसरी परतों को दबाया जाता है। इस टेस्ट से उनके घनत्व की जांच होती है। इससे पता चलता है कि परतों को पर्याप्त रूप से दबाया गया या नहीं।
5. फॉलिंग वेट डिफ्लेक्टोमीटर टेस्ट: इस जांच में सड़क पर नियंत्रित भार डाला जाता है। इसके बाद सड़क के झुकाव को मापा जाता है। इससे सड़क की संरचनात्मक मजबूती का आकलन होता है।
6. रोड रफनेस टेस्ट: इस टेस्ट से सड़क की समतलता जांची जाती है। इससे पता चलता है कि सतह पर कितना उतार-चढ़ाव है। वाहन चलने के दौरान सड़क की स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाता है।
इन छह प्रमुख परीक्षणों के अलावा दूसरे टेस्ट भी प्रस्तावित हैं। सभी 15 परीक्षणों का पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है।
निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी
थर्ड पार्टी जांच से भी निर्माण की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए दरारों की वास्तविक वजह अभी तय नहीं हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि निर्माण में कोई तकनीकी कमी थी या नहीं।
हाईवे ने किसानों की परेशानी भी बढ़ाई
स्थानीय किसान उत्तम साहू और देवेंद्र नेताम ने यह समस्या बताई है। किसान लोखनाथ मंडावी ने भी खेत तक रास्ता नहीं मिलने की बात कही है। ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे निर्माण के दौरान उनकी आवाजाही का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। अब उन्हें खेतों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
स्कूल जाने वाले छात्रों की भी बढ़ी मुश्किल
स्कूल के लिए दूसरी जगह जमीन तलाश की गई है। ग्रामीणों ने नए शैक्षणिक सत्र से पहले स्कूल की व्यवस्था करने की मांग रखी थी। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
4,146 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल
इतनी बड़ी परियोजना में उद्घाटन से पहले दरारें सामने आना चिंता का विषय है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। एनएचएआई धमतरी पीआईयू के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शमशेर सिंह के मुताबिक प्रभावित हिस्से से नमूने लिए गए हैं। विभागीय जांच के साथ थर्ड पार्टी जांच भी कराई जा रही है।
फिलहाल सड़क के प्रभावित हिस्से की मरम्मत कर दी गई है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। इससे पता चलेगा कि दरारें क्यों आई थीं। निर्माण में कमी मिलने पर उसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।
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