भारतमाला घोटाला पार्ट-2 : 19 खसरों का खेल रच हड़पे करोड़ों, ED दफ्तर पहुंचे ग्रामीण
NEWS IN SHORT
- भारतमाला मुआवजा घोटाले में आया नया मामला
- 19 खसरों को 92 टुकड़ों में बांटकर करोड़ों के मुआवजे का खेल
- ग्रामीणों ने ईडी से की शिकायत, जांच की उठी मांग
- राजस्व अधिकारियों और रसूखदारों की भूमिका पर भी सवाल
- अभनपुर के बाद सिवनीकला मामला बना नया बड़ा भूमि विवाद
NEWS IN DETAIL
Dhamtari। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर सिवनीकला गांव से एक बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गई हैं। दावा किया गया है कि 19 खसरा नंबरों को अवैध तरीके से छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया, जिससे मुआवजा राशि कई गुना बढ़ गई और सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
भूमि रिकॉर्ड में बदलाव और मुआवजा बढ़ोतरी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि भारतमाला प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित जमीनों के रिकॉर्ड में बदलाव कर उन्हें 92 हिस्सों में बांटा गया। इसके बाद प्रत्येक हिस्से को अलग-अलग मुआवजा श्रेणी में दिखाया गया। इस प्रक्रिया से कुछ लोगों को असामान्य रूप से अधिक मुआवजा मिला, जबकि वास्तविक भूमिधारकों को अपेक्षाकृत कम राशि मिली।
2019 अधिसूचना के बाद शुरू हुई प्रक्रिया पर सवाल
जानकारी के अनुसार, रायपुर–विशाखापट्टनम भारतमाला कॉरिडोर के लिए सिवनीकला गांव की जमीनों के अधिग्रहण की अधिसूचना वर्ष 2019 में जारी की गई थी। इसी के बाद भूमि रिकॉर्ड में बदलाव और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू हुई, जिस पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रसूखदारों और राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में केवल जमीन मालिक ही नहीं, बल्कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग, राजनीतिक प्रतिनिधि और राजस्व विभाग के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। शिकायत में कहा गया है कि रिकॉर्ड में बदलाव बिना पारदर्शी प्रक्रिया के किए गए और मुआवजा वितरण में चयन करके लाभ दिया गया।
पीड़ित किसानों की शिकायत और प्रशासनिक अनदेखी का दावा
ग्राम सिवनीकला के कई किसानों का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन, कलेक्टर और संभागीय अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे उन्हें मजबूरी में ईडी के पास जाना पड़ा।
ईडी में शिकायत और उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक केंद्रीय एजेंसी स्तर पर जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।
अभनपुर मामले से तुलना और जांच पर उठते सवाल
इस विवाद की तुलना छत्तीसगढ़ के अभनपुर क्षेत्र में सामने आए भारतमाला मुआवजा घोटाले से भी की जा रही है, जहां एसीबी और ईडी ने कार्रवाई की थी और कई अधिकारियों पर केस दर्ज हुआ था। लेकिन सिवनीकला मामले में अब तक किसी बड़ी जांच एजेंसी की सक्रियता नहीं दिखी है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।
प्रशासनिक स्थिति और अब तक की चुप्पी
ग्रामीणों के अनुसार कई बार शिकायत देने के बावजूद न तो FIR दर्ज हुई और न ही मुआवजा वितरण की स्वतंत्र जांच कराई गई। प्रशासनिक स्तर पर केवल सीमित जांच की बातें सामने आई हैं, लेकिन कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
जमीन खरीद-बिक्री पर लगी रोक
सूत्रों के अनुसार, भारतमाला और रेलवे परियोजनाओं के चलते कई गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर पहले से रोक लगी हुई थी। इसके बावजूद भूमि रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुए, यह सवाल जांच के घेरे में है।
पूरे मामले से जुड़े प्रमुख सवाल
यह मामला अब सिर्फ मुआवजा विवाद नहीं बल्कि भूमि रिकॉर्ड की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रिकॉर्ड में बदलाव जानबूझकर किया गया और क्या वास्तविक किसानों को उनका उचित हक मिला या नहीं।
निष्कर्ष
सिवनीकला भारतमाला विवाद अब ईडी तक पहुंच चुका है और ग्रामीणों को उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। अगर आरोप साबित होते हैं तो यह छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण प्रणाली से जुड़ा एक बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भारतमाला मुआवजा घोटाले में क्या आरोप हैं?
19 खसरों को अवैध रूप से 92 टुकड़ों में बांटकर अधिक मुआवजा लेने का आरोप है। - ग्रामीणों ने क्या मांग की है?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की ईडी से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। - क्या पहले भी ऐसा मामला सामने आया है?
हां, अभनपुर में भी इसी तरह के मुआवजा घोटाले की जांच और कार्रवाई हो चुकी है।
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