भारतमाला घोटाला: गोपाल गांधी से जुड़े ठिकानों पर ईडी का छापा, कई दतावेज और डेटा जब्त

Harrison Masih | Apr 27, 2026, 12:50 IST
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भारतमाला परियोजना घोटाले में छत्तीसगढ़ में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। जमीन कारोबारी गोपाल गांधी के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। ईडी ने अब तक करोड़ों की संपत्तियां अटैच की हैं, 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

Raipur. छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत हुए भूमि मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने आज जमीन कारोबारी गोपाल गांधी समेत उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की, जो घोटाले में शामिल हैं। इस छापेमारी में ईडी के 13 अफसरों की टीम ने गोपाल गांधी के अभनपुर स्थित घर और ऑफिस पर दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की तलाश की। इस दौरान टीम ने महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा जब्त किए हैं, जो इस मामले की जांच में अहम साबित हो सकते हैं।



पूर्व मंत्री के भाई के घर भी दबिश

ईडी की की टीम ने धमतरी जिले के कुरुद में द्वारा भूपेंद्र चंद्राकर के घर भी दबिश दी है। भूपेंद्र चंद्राकर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के भाई हैं। घोटाले की जांच के सिलसिले में ईडी ने आज सुबह भूपेंद्र चंद्राकर के घर पहुंचकर दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी। टीम सात घंटे से अधिक समय से जांच में जुटी हुई है, और इस दौरान चंद्राकर से पूछताछ भी की जा रही है। खबर फैलते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिसके चलते पुलिस बल को भी सुरक्षा के मद्देनजर तैनात कर दिया गया है। इस कार्रवाई को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।



क्या है घोटाले का मामला?

यह घोटाला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान हुआ था। आरोप है कि करीब 500 करोड़ रूपए से अधिक की धांधली की गई। जमीन दलालों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से कृषि भूमि को गैर-कृषि भूमि में बदलकर उसका मुआवजा बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एक ही खसरे की जमीन को कागजों में छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग लोगों को मुआवजा दिलाया गया।



अधिकारियों और जमीन दलालों की मिलीभगत

जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में राजस्व विभाग के अधिकारियों (जैसे एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी) ने जमीन दलालों के साथ मिलकर इस गड़बड़ी को अंजाम दिया। इन अधिकारियों ने कागजी मुआवजे को बढ़ाने के लिए विभिन्न गैर-कानूनी तरीकों का इस्तेमाल किया। यह मामला बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण के दौरान घटी धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।



ईडी की अब तक की कार्रवाई

इस मामले में ईडी ने पहले भी रायपुर और महासमुंद में छापेमारी की थी और करोड़ों रूपए की संपत्तियां अटैच की थीं। इसके अलावा, 40 लाख रूपए से अधिक नकद राशि जब्त की गई थी। 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, जिनमें सरकारी अधिकारी और जमीन दलाल शामिल हैं। इस घोटाले में निर्भय साहू (तत्कालीन सब-डिविज़नल ऑफिसर) और अन्य अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।



आगे की जांच

ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की संयुक्त जांच जारी है। दोनों एजेंसियां इस मामले में और भी गहरी जांच कर रही हैं, ताकि घोटाले में शामिल अन्य लोगों का पता चल सके और कड़ी कार्रवाई की जा सके। इस घोटाले से जुड़े अन्य दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।



निष्कर्ष

भारतमाला परियोजना घोटाला (Bharatmala project scam) में ईडी की छापेमारी और जांच में कई अहम खुलासे हो रहे हैं। यह घोटाला छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला बनकर उभरा है, और इस पर कार्रवाई से यह संदेश गया है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।



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