165 करोड़ एफडी घोटाला : सिर्फ 32 तक पहुंची CBI, हाईकोर्ट ने मांगा पूरा सच
भिलाई नगर निगम के 165 करोड़ रुपए के एफडी घोटाले में जांच की रफ्तार अब हाईकोर्ट की निगरानी में है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीबीआई की ताजा स्टेटस रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए साफ कर दिया कि मामला अभी खत्म होने से काफी दूर है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने जांच की प्रगति पर नजर बनाए रखते हुए अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 तय की है। तब तक सीबीआई को नई स्टेटस रिपोर्ट और शपथपत्र दाखिल करना होगा।
196 में सिर्फ 32
सीबीआई की रिपोर्ट ने खुद जांच की धीमी रफ्तार की तस्वीर सामने रख दी। एजेंसी ने अदालत को बताया कि अब तक कुल 196 खाताधारकों में से केवल 32 की पहचान कर उनके बयान दर्ज किए जा सके हैं। यानी 164 खाताधारकों तक जांच अभी पहुंच ही नहीं सकी। यही वजह है कि अदालत ने जांच जारी रखने की अनुमति देते हुए अगली प्रगति रिपोर्ट तलब की है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों के लेनदेन की पूरी कड़ी आखिर कब सामने आएगी।
नगर निगम का पैसा निशाने पर
पूरा मामला भिलाई नगर निगम की करीब 165 करोड़ रुपए की एफडी से जुड़ा है। यह राशि शहर के विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं के लिए यस बैंक की भिलाई शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा कराई गई थी। आरोप है कि इसी सरकारी धन को बैंकिंग सिस्टम के भीतर बैठे लोगों और बाहरी नेटवर्क ने निशाना बनाया। फर्जी कागजात तैयार कर एफडी के खिलाफ लोन लेने और रकम को दूसरे खातों में मोड़ने का खेल रचा गया।
फर्जी दस्तावेजों का जाल
जांच में सामने आया कि फर्जी हस्ताक्षर, फर्जी अधिकृत पत्र और कागजी हेरफेर के जरिए पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने की कोशिश की गई। आरोप है कि बैंक के भीतर की जानकारी और अधिकारों का दुरुपयोग कर सरकारी धन को सुरक्षित एफडी से निकालकर संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल किया गया। यही वजह है कि यह मामला केवल बैंकिंग गड़बड़ी नहीं बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध माना जा रहा है।
इन दो नामों पर फोकस
एसीबी-ईओडब्ल्यू की शुरुआती जांच में यस बैंक की तत्कालीन भिलाई शाखा से जुड़े हितेश चौबे और अनिमेश सिंह की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में रही। आरोप है कि दोनों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, बैंकिंग प्रक्रिया का दुरुपयोग करने और रकम के ट्रांसफर में अहम भूमिका निभाई। हालांकि अंतिम दोष तय होना अदालत में सुनवाई और जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।
FIR से CBI तक सफर
नगर निगम की शिकायत और बैंक के आंतरिक ऑडिट के बाद पुलिस तथा एसीबी-ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की। इसके बाद कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और अदालत में चार्जशीट पेश की गई। मामले की गंभीरता और सरकारी धन के बड़े पैमाने पर कथित दुरुपयोग को देखते हुए जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा किन-किन खातों तक पहुंचा, किन लोगों ने लाभ उठाया और इस पूरे नेटवर्क की असली परतें क्या हैं।
जवाब अभी बाकी है
हाईकोर्ट के ताजा आदेश ने साफ संकेत दिया है कि अदालत जांच को अधूरा छोड़ने के पक्ष में नहीं है। सीबीआई को सितंबर तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। अब निगाह इस बात पर टिकी है कि 164 अज्ञात खाताधारकों तक एजेंसी कब पहुंचेगी, सरकारी खजाने से निकले 165 करोड़ रुपए की पूरी ट्रेल कब सामने आएगी और क्या इस मामले में किसी नए अधिकारी, बैंककर्मी या बिचौलिए की भूमिका भी उजागर होगी। फिलहाल 165 करोड़ का यह घोटाला जितना पुराना होता जा रहा है, उतने ही नए सवाल हर सुनवाई के साथ अदालत के सामने खड़े होते जा रहे हैं।
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