भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से झटका : चुनाव याचिका में नई मांग खारिज, अब 3 नवंबर को होगी सुनवाई
हाईकोर्ट में भूपेश बघेल को राहत नहीं
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर चर्चा में हैं। पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनके एक आवेदन को खारिज कर दिया है। भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका में कुछ नए बिंदु शामिल करने की मांग की गई थी। इस पर अदालत ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अब हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुनाते हुए आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद चुनाव याचिका पर आगे की सुनवाई का रास्ता साफ है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। हालांकि आवेदन खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि चुनाव याचिका पर अंतिम फैसला आ गया है।
आखिर किस चुनाव को लेकर चल रहा विवाद?
पूरा मामला साल 2023 में हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। उस समय भूपेश बघेल पाटन विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार थे। उनके खिलाफ बीजेपी की ओर से विजय बघेल चुनाव मैदान में उतरे थे।
चुनाव परिणाम आने के बाद विजय बघेल ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की थी। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। याचिका में भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी।
विजय बघेल का आरोप है कि मतदान से पहले लागू प्रचार प्रतिबंध के दौरान भी भूपेश बघेल ने निर्वाचन क्षेत्र में रैली निकाली थी। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से चुनाव रद्द करने की मांग की थी।
मतदान से पहले 48 घंटे का क्या है नियम?
चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक मतदान समाप्त होने से पहले 48 घंटे की अवधि में सार्वजनिक चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध रहता है। इसे आमतौर पर चुनाव प्रचार की शांत अवधि कहा जाता है।
इस दौरान सार्वजनिक चुनावी सभाओं और जुलूसों जैसी गतिविधियों पर रोक रहती है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को बिना किसी अंतिम समय के प्रचार दबाव के अपना फैसला लेने का अवसर देना है।
विजय बघेल की चुनाव याचिका का मुख्य आरोप इसी अवधि में कथित चुनाव प्रचार से जुड़ा है। उनका दावा है कि भूपेश बघेल ने चुनाव प्रचार से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया। हालांकि यह आरोप अभी न्यायिक जांच के दायरे में है। हाईकोर्ट ने इस आधार पर भूपेश बघेल के निर्वाचन को अवैध घोषित नहीं किया है।
भूपेश बघेल ने याचिका पर क्या आपत्ति जताई?
चुनाव याचिका दायर होने के बाद भूपेश बघेल की ओर से भी कानूनी आपत्ति उठाई गई थी। उनकी ओर से तर्क दिया गया था कि विजय बघेल ने निर्धारित समय सीमा के बाद चुनाव याचिका दाखिल की है।
दरअसल, चुनाव संबंधी याचिकाएं दाखिल करने के लिए कानून में समय सीमा तय है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत सामान्य तौर पर चुनाव परिणाम घोषित होने से 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दाखिल करनी होती है।
भूपेश बघेल की ओर से इसी समय सीमा को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस आपत्ति के कारण मामले की सुनवाई के दौरान विजय बघेल की गवाही की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई थी। इसके बाद मामला केवल हाईकोर्ट तक सीमित नहीं रहा। कानूनी विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला?
हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान सामने आए विवाद को लेकर भूपेश बघेल की ओर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर निर्देश दिए गए। इसके बाद चुनाव याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।
इसी बीच भूपेश बघेल की ओर से याचिका में नए बिंदु जोड़ने के लिए आवेदन पेश किया गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस आवेदन पर फैसला सुरक्षित रखा था। अब आवेदन खारिज कर दिया गया है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में उन नए बिंदुओं का पूरा विवरण नहीं दिया गया है जिन्हें शामिल करने की मांग की गई थी।
आवेदन खारिज होने से क्या फर्क पड़ेगा?
हाईकोर्ट के ताजा आदेश को चुनाव याचिका की सुनवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भूपेश बघेल की ओर से जिन नए बिंदुओं को शामिल करने की मांग की गई थी, उन्हें इस आवेदन के जरिए जोड़ने की अनुमति नहीं मिली है। इसका असर आगे की कानूनी रणनीति पर पड़ सकता है। हालांकि चुनाव याचिका में लगाए गए मूल आरोपों और उनके जवाब पर न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
यह भी समझना जरूरी है कि किसी आवेदन का खारिज होना और चुनाव को अवैध घोषित करना दो अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल अदालत ने केवल आवेदन पर आदेश दिया है। मूल चुनाव याचिका का अंतिम निपटारा बाकी है।
अब 3 नवंबर की सुनवाई पर नजर
छत्तीसगढ़ की राजनीति में पाटन विधानसभा सीट का विशेष महत्व रहा है। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़ी रही है। ऐसे में उनके चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका राजनीतिक और कानूनी दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण बनी हुई है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी। उस दिन अदालत में आगे की प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की दलीलों पर नजर रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि विजय बघेल की चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होगी। क्या अदालत में गवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या पहले अन्य कानूनी मुद्दों का निपटारा होगा?
फिलहाल इतना साफ है कि भूपेश बघेल को अपने आवेदन पर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। चुनाव याचिका पर अंतिम फैसला आने तक कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।