छत्तीसगढ़ में बघेल vs रमन की सियासी जंग तेज, झीरम से नक्सल नीति तक
Raipur. छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल कौन सच बोल रहा है? नहीं, बल्कि किसका सच भारी पड़ रहा है? बन गया है। एक पुरानी अखबार की कटिंग ने ऐसा सियासी तूफान खड़ा किया है, जिसमें आरोप, संकेत, और जवाब तीनों बेहद आक्रामक अंदाज में सामने आ रहे हैं। इस टकराव के केंद्र में हैं दो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और रमन सिंह। मुद्दा है नक्सलवाद, उसकी जड़ें और राजनीतिक जवाबदेही।
बघेल का कटिंग कार्ड
भूपेश बघेल ने जो अखबार की कटिंग शेयर की, वह सिर्फ एक पुरानी खबर नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत है। इस कटिंग में पूर्व पुलिस अधिकारी केपीएस गिल के हवाले से यह दावा दिखाया गया है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के दौर में सत्ता और सिस्टम के कुछ हिस्सों की भूमिका संदिग्ध रही।
बघेल यह इशारा कर रहे हैं कि नक्सलवाद सिर्फ जंगल की समस्या नहीं थी, बल्कि सिस्टम के भीतर भी कुछ गड़बड़ियां थीं। यह भी कहा कि उस दौर की सरकार (यानी रमन सिंह का कार्यकाल) पर सवाल उठना चाहिए और सबसे अहम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग कर उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि अगर जांच करनी है, तो पुराने राज भी खोलने होंगे। यानी, यह सिर्फ एक पोस्ट नहीं, बल्कि एक राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिश है। नक्सलवाद के नाम पर जो कहानी बताई गई, उसके पीछे एक दूसरी कहानी भी हो सकती है।
रमन सिंह ने कहा-कटिंग नहीं, सबूत लाओ
बघेल की इस पोस्ट को रमन सिंह ने सीधा राजनीतिक हमला मानते हुए जवाब दिया और वो भी बेहद तीखे अंदाज में। रमन सिंह ने अपनी पोस्ट में कहा-भूपेश झीरम घाटी के सबूत जेब में होने का दावा करते हैं, लेकिन हाथ डालते हैं तो सिर्फ अखबार की कटिंग ही निकलती है। रमन सिंह का कहना है-बघेल के पास ठोस सबूत नहीं हैं। वे सिर्फ पुरानी खबरों के सहारे सनसनी फैला रहे हैं और अपने 5 साल के कार्यकाल की कमियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा-दूसरों पर कीचड़ उछालकर अपने दाग नहीं छुपाए जा सकते।
झीरम घाटी-हर बहस की जड़
इस पूरे सियासी युद्ध का सबसे संवेदनशील केंद्र है 2013 का झीरम घाटी कांड। बघेल का कहना है-झीरम सिर्फ एक नक्सली हमला नहीं, संभवतः एक बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है और उस साजिश में अंदरूनी चूक या भूमिका की जांच जरूरी है। वहीं रमन का जवाब है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है, इसे राजनीतिक हथियार बनाना गलत है। अगर सबूत हैं तो सामने लाएं, कटिंग से सच्चाई साबित नहीं होती।
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