बीजापुर में तेंदूपत्ता के 18 हजार बोरे जलकर राख, 10 करोड़ का नुकसान
बीजापुर जिले के ईटपाल इलाके में सोमवार दोपहर एक निजी तेंदूपत्ता गोदाम में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में गोदाम में रखे लगभग 18 हजार बोरे तेंदूपत्ता जलकर राख हो गए। शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस आगजनी में 10 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है।
दोपहर ढाई बजे लगी आग
जानकारी के अनुसार, वन विभाग ने तेंदूपत्ता भंडारण के लिए ईटपाल क्षेत्र में एक निजी गोदाम किराए पर लिया था। सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे अचानक गोदाम से धुआं उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। तेज गर्मी और सूखे मौसम के कारण आग तेजी से फैलती चली गई।
गोदाम में बड़ी मात्रा में सूखे तेंदूपत्ते भरे होने के कारण आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल हो गया। धुएं का विशाल गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगा, जिससे आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
राहत और बचाव कार्य में जुटीं कई एजेंसियां
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए अतिरिक्त मदद बुलानी पड़ी। राहत और बचाव कार्य में वन विभाग, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी शामिल हुए।
सबसे पहले गोदाम परिसर में खड़े वाहनों को बाहर निकाला गया, ताकि आग अन्य हिस्सों तक न फैले। देर रात तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका था और दमकल कर्मी लगातार मशक्कत करते रहे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि गोदाम में बड़े पैमाने पर तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया था, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। मौके पर न तो पर्याप्त अग्निशमन यंत्र मौजूद थे और न ही पानी की समुचित व्यवस्था दिखाई दी।
लोगों का कहना है कि इतने बड़े भंडारण केंद्र में फायर सेफ्टी के सभी मानकों का पालन किया जाना चाहिए था। इस घटना के बाद तेंदूपत्ता भंडारण केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच जारी, कारणों का अब तक पता नहीं
बीजापुर के डीएफओ रमेश जांगड़े ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन और फायर ब्रिगेड को अलर्ट किया गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और मामले की जांच की जा रही है।
वहीं आलोक तिवारी ने कहा कि वे बीजापुर पहुंचकर पूरे मामले की समीक्षा करेंगे और यह जांच की जाएगी कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।
जनहानि नहीं
राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। हालांकि करोड़ों रुपए मूल्य का तेंदूपत्ता जल जाने से वन विभाग और संबंधित एजेंसियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
FAQ
- तेंदूपत्ता को हरा सोना क्यों कहा जाता है?
तेंदूपत्ता को ‘हरा सोना’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है। बीड़ी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तेंदूपत्ते की बाजार में काफी मांग रहती है, जिससे हर साल करोड़ों रुपए का कारोबार होता है। - तेंदूपत्ता का उपयोग और फायदे क्या हैं?
तेंदूपत्ता का सबसे ज्यादा उपयोग बीड़ी बनाने में किया जाता है। यह लाखों लोगों को रोजगार देने वाला वन उत्पाद माना जाता है। तेंदूपत्ता संग्रहण से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को मौसमी आय मिलती है, वहीं राज्य सरकार को भी राजस्व प्राप्त होता है। कुछ जगहों पर इसका उपयोग पारंपरिक औषधीय कार्यों में भी किया जाता है।
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