शिकायतों का अंबार, पर समाधान शून्य; बीजापुर के ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर
NEWS IN SHORT
- मरिवाड़ा गांव में छः में से पांच हैंडपंप खराब हैं।
- ग्रामीण दूषित नदी का पानी पीने को मजबूर हैं।
- पीने के पानी के लिए 2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
- PHE विभाग से कई बार शिकायतें की गईं।
- कोई समाधान नहीं मिला, ग्रामीणों में नाराजगी है।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त क्षेत्र के बीजापुर जिले का मरिवाड़ा गांव अब भी पेयजल संकट से जूझ रहा है। गंगालूर क्षेत्र का यह गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है, जहां की 200 से अधिक आबादी को पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। यहां स्थित छः में से पांच हैंडपंप पूरी तरह खराब हो गए हैं और एकमात्र चालू हैंडपंप भी पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहा है।
नदी के पानी से ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते
इस समस्या से तंग आकर, ग्रामीणों को अब पानी के लिए 2 किलोमीटर दूर नदी का रुख करना पड़ता है। यहां रेत हटाकर वे पानी इकट्ठा करते हैं, जो न केवल दूषित है बल्कि बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इस नदी का पानी पीकर ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते हैं, लेकिन इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने का खतरा बना हुआ है।
PHE विभाग से कई बार की गई शिकायत
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHE) विभाग और प्रशासन को इस समस्या के बारे में सूचित कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न तो हैंडपंपों की मरम्मत की गई है, न ही वैकल्पिक पानी के स्रोत उपलब्ध कराए गए हैं।
विभाग की इस लापरवाही के कारण ग्रामीणों में निराशा और गुस्सा बढ़ रहा है। जबकि बीजापुर जिले को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है और यहां विकास की उम्मीदें पनपी हैं, फिर भी इस गांव के बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह सवाल उठता है कि आखिरकार ग्रामीणों को कब तक ऐसे संकटों का सामना करना होगा?
निष्कर्ष
बीजापुर के मरिवाड़ा गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। 6 में से 5 हैंडपंप खराब हैं, जिससे ग्रामीण दूषित नदी का पानी पीने को मजबूर हैं। विभाग की लापरवाही के चलते समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, और ग्रामीणों में निराशा बढ़ती जा रही है।
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